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सामुदायिक शौचालयों पर लटक रहे ताले
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मिर्जापुर। जिले को ओडीएफ काफी पहले ही घोषित कर दिया गया है। इसी के साथ ही जिले की सभी ग्राम पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है। लेकिन उनमें से अधिकांश में ताला लटक रहा है। इससे कई जगहों पर ग्रामीण अब खुले में भी जाने लगे हैं। संचालन के लिए अधिकांश जगहों पर इन शौचालयों को स्वयं सहायता समूहों को दिया गया है। इसके बाद भी इनका संचालन नहीं हो पा रहा है।
जिले में 809 ग्राम पंचायत हैं। इनमें से 800 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनाया गया है। इन सभी को समूह की महिलाओं को संचालन के लिए दिया गया है। जिगना: विकास खंड छानबे में अभी भी सामुदायिक शौचालय अधूरे पडे हैं। भले ही वे कागज पर संचालित हो रहे हों। बतादें कि ग्राम पंचायत खैरा, कोठराकंतित, कोठरामिश्रान, कोलेपुर, असवादुगरहा, तेलियानी, भांवा, बरहाखुर्द, सुमतिया, रन्नोपट्टी, विन्ध्याचल, केवटान, किसुनपुर, बरीदुबे सहित कई ग्राम पंचायत के सामुदायिक शौचालय अधूरे पडे हैं। इस संबंध में सहायक विकास अधिकारी पंचायत का कहना है कि 50 प्रतिशत शौचालय ही संचालित हैं। शेष को संचालित करने का प्रयास किया जा रहा है। जो अधूरे हैं उन्हें पूरा कराने के लिए ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी को कहा गया है ।
हलिया: विकास खंड के 79 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय तो बनाया गया है लेकिन रखरखाव के लिए स्वयं सहायता समूह को जिम्मेदारी दी गई है। ग्राम सभा से उनके खाते में पैसा भी दे दिया गया है। इसके बावजूद भी कहीं सामुदायिक शौचालय में ताला नहीं खुल रहे हैं। अधिकतर सामुदायिक शौचालयों में ताला लटक रहा है। पानी की टंकी तो जरूर सामुदायिक शौचालय पर रखी गई है। लेकिन अगर निरीक्षण किया जाए तो किसी समुदायिक शौचालय की पानी टंकी में पानी का अभाव दिखाई दे रहा है।
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सीखड़: विकासखंड के 32 ग्राम सभा में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया है जबकि तीन ग्राम सभा में रामगढ़, फुलहा, प्रेमापुर में शौचालय का निर्माण नहीं हो सका है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के माध्यम से इन शौचालयों का संचालन किया जाता है। लेकिन अधिकांश ग्राम सभाओं में आज भी इनपर ताला लटका हुआ हैं। विकास खंड में कुल 35 ग्राम सभा है।
नगर क्षेत्र में भी बंद हैं सामुदायिक शौचालय
मिर्जापुर। नगर पालिका क्षेत्र में भी कई जगहों पर सामुदायिक शौचालय बंद पड़े हैं। इसमें संगमोहाल, मंडी समिति तथा नारघाट स्थित महिलाओं के लिए बना पिंक शौचालय भी बंद पड़ा है। इसी प्रकार सिविल लाइन स्थित बिजली आफिस के बगल का शौचालय भी बंद पड़ा था। लेकिन इन दिनों उसका रंगरोगन हो रहा है। बताया जा रहा है कि उसको शीघ्र ही खोला जाएगा।
जिला पंचायत राज अधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि जिले के सभी सामुदायिक शौचालय को समूह की महिलाओं को संचालन के लिए दे दिया गया है। उनका निश्चित समय है। वह उसी समय खुलते हैं।
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जिले में 809 ग्राम पंचायत हैं। इनमें से 800 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनाया गया है। इन सभी को समूह की महिलाओं को संचालन के लिए दिया गया है। जिगना: विकास खंड छानबे में अभी भी सामुदायिक शौचालय अधूरे पडे हैं। भले ही वे कागज पर संचालित हो रहे हों। बतादें कि ग्राम पंचायत खैरा, कोठराकंतित, कोठरामिश्रान, कोलेपुर, असवादुगरहा, तेलियानी, भांवा, बरहाखुर्द, सुमतिया, रन्नोपट्टी, विन्ध्याचल, केवटान, किसुनपुर, बरीदुबे सहित कई ग्राम पंचायत के सामुदायिक शौचालय अधूरे पडे हैं। इस संबंध में सहायक विकास अधिकारी पंचायत का कहना है कि 50 प्रतिशत शौचालय ही संचालित हैं। शेष को संचालित करने का प्रयास किया जा रहा है। जो अधूरे हैं उन्हें पूरा कराने के लिए ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी को कहा गया है ।
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हलिया: विकास खंड के 79 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय तो बनाया गया है लेकिन रखरखाव के लिए स्वयं सहायता समूह को जिम्मेदारी दी गई है। ग्राम सभा से उनके खाते में पैसा भी दे दिया गया है। इसके बावजूद भी कहीं सामुदायिक शौचालय में ताला नहीं खुल रहे हैं। अधिकतर सामुदायिक शौचालयों में ताला लटक रहा है। पानी की टंकी तो जरूर सामुदायिक शौचालय पर रखी गई है। लेकिन अगर निरीक्षण किया जाए तो किसी समुदायिक शौचालय की पानी टंकी में पानी का अभाव दिखाई दे रहा है।
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सीखड़: विकासखंड के 32 ग्राम सभा में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया है जबकि तीन ग्राम सभा में रामगढ़, फुलहा, प्रेमापुर में शौचालय का निर्माण नहीं हो सका है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के माध्यम से इन शौचालयों का संचालन किया जाता है। लेकिन अधिकांश ग्राम सभाओं में आज भी इनपर ताला लटका हुआ हैं। विकास खंड में कुल 35 ग्राम सभा है।
नगर क्षेत्र में भी बंद हैं सामुदायिक शौचालय
मिर्जापुर। नगर पालिका क्षेत्र में भी कई जगहों पर सामुदायिक शौचालय बंद पड़े हैं। इसमें संगमोहाल, मंडी समिति तथा नारघाट स्थित महिलाओं के लिए बना पिंक शौचालय भी बंद पड़ा है। इसी प्रकार सिविल लाइन स्थित बिजली आफिस के बगल का शौचालय भी बंद पड़ा था। लेकिन इन दिनों उसका रंगरोगन हो रहा है। बताया जा रहा है कि उसको शीघ्र ही खोला जाएगा।
जिला पंचायत राज अधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि जिले के सभी सामुदायिक शौचालय को समूह की महिलाओं को संचालन के लिए दे दिया गया है। उनका निश्चित समय है। वह उसी समय खुलते हैं।