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Mirzapur News: कैमूर वन्य जीव विहार से नहीं रह गए तेंदुए, सांभर भी कम

Fri, 05 May 2023 01:02 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 05 May 2023 01:02 AM IST
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Leopards are no more from Kaimur Wildlife Sanctuary, Sambhar is also less
मिर्जापुर। कैमूर वन्य जीव विहार (सोनभद्र-मिर्जापुर) में जंगली जानवरों का शिकार होने से संख्या घट रही है। कैमूर वन्य जीव विहार में तेंदुए नदारद हो गए हैं, सांभर भी नाम मात्र के रह गए हैं। वनों के अवैध कटान व खनन भी इसका प्रमुख कारण बताया जा रहा है। कटान के चलते जानवरों के छिपने का स्थान न होने से वे गांवों का रुख कर रहे हैं। इसके चलते जंगल से सटे गांवों में आसानी से वन्य जीवों का शिकार हो रहा है।
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कैमूर वन्य जीव विहार (सोनभद्र-मिर्जापुर) की ओर से प्रत्येक तीन वर्ष पर जंगली जानवरों की गणना कराई जाती है। आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2019 में यहां नर सांभर की संख्या 51 थी, जबकि 25 मादा सांभर व 5 बच्चे थे। वहीं वर्ष 2022 में सांभर घटकर 5 नर, 8 मादा व दो बच्चे ही रह गए। इसी तरह वर्ष 2019 में तेंदुआ 7 नर, 6 मादा व दो बच्चे थे। चिंकारा 17 नर, 39 मादा व सात बच्चे थे। काला हिरन 131 नर, 394 मादा व 99 बच्चे थे। चीतल 57 नर, 95 मादा व 25 बच्चे थे। भालू की संख्या 24 नर व 22 मादा थी। तीन साल बाद 2022 में तेंदुआ नर और मादा की संख्या शून्य हो गई, जबकि चिंकारा 12 नर, 17 मादा, तीन बच्चे रह गए। इसी तरह से काला हिरन 132 नर, 325 मादा व 53 बच्चे तथा चीतल 41 नर, 59 मादा व 22 बच्चे थे। इसी तरह भालू नर 12, मादा 7 व छह बच्चे बचे रह गए हैं।
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हलिया अभ्यारण्य क्षेत्र में हिरन, भालू, चीता, मोर, नीलगाय सहित कई अन्य प्रजातियों के वन्य जीव निवास करते हैं। पांच वर्ष पूर्व कुछ लोगों द्वारा शिकार करने के लिए बिजली का नंगा तार बिछाया था। इसके चलते खेत की रखवाली करने निकले एक किसान की मौत तक हो चुकी है। वहीं सेंचुरी क्षेत्र से आए दिन गुजर रहे अवैध बालू और गिट्टी लदी गाड़ियां भी वन्य जीवों की संख्या कम होने का कारण बनी हुई हैं।
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वन क्षेत्र से गुजरने वाले वाहनों की चपेट में आने से जंगली जीव जान गवा रहे हैं। क्षेत्र के भवानीपुर, राजा का झरना, सिद्धनाथ की दरी, चंदनपुर, खोराडीह, खटखरिया, चौखड़ा, निकरिका के जंगलों में चिता, भालू, हिरण, नीलगाय, जंगली सुअर, खरगोश का शिकार होने के कारण अब वे जंगलों में नहीं दिखाई पड़ते हैं। उधर, मिर्जापुर-सोनभद्र सीमा पर बेरोकटोक जंगलों का कटान हो रहा है। शिकारी रात में सर्च कर जानवरों का आखेट कर रहे हैं। इसके चलते जंगली सुअर, हिरन (बारहसिंघा) आदि जानवरों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। सुकृत रेंज को छोड़ दिया जाय तो मड़िहान व सिरसी रेंज का क्षेत्रफल लगभग 25 हजार हेक्टेयर में फैला हुआ है। दो दशक पूर्व घनघोर जंगलों में चीता, भालू जैसे जानवर रहा करते थे। पटेहरा, सिरसी, मड़िहान व लालगंज रेंज के जंगलों में एक दशक पहले जंगली जानवरों का जमावड़ा देखा जाता था। अब सिरसी, लेदुकी, सरसवा, बहुती पटेहरा, गढ़वा आदि जंगलों में सूअर, नीलगाय, मोर, खरगोश कभी कभार ही दिखाई पड़ते हैं।

जंगलों के अंधाधुंध कटान से नीलगाय गांव के ईद गिर्द दिखाई पड़ते हैं। बेलन नदी सूख जाने पर वन सेंचुरी हलिया में सुरक्षित रह गए जानवरों में चीता, काला हिरन, भालू बेलन नदी पार करके गर्मी के मौसम में लेदुकी, गढ़वा के जंगलों में देखे जाते हैं। जिन्हें शिकारी आसानी से अपना शिकार बना लेते हैं। वन विभाग द्वारा जानवरों की सुरक्षा के लिए कोई उपाय नहीं किया जा रहा। है। परिणामस्वरूप अब जंगलों में बहुत कम जानवर दिख रहे हैं। कैमूर वन्य जीव प्रभाग के वन्य जीव प्रतिपालक अरविंद कुमार का कहना है कि जानवरों की सुरक्षा के लिए समय-समय पर वन क्षेत्रों में पेट्रोलिंग कराई जाती है। पानी की कमी न हो, इसके लिए 29 स्थानों पर वाटर होल बनाए गए हैं। इनमें टैंकर से पानी भरा जाता है। रही बात तेंदुआ की संख्या की तो यह घटती बढ़ती रहती है। यह घुमंतू जीव होता है। फरवरी माह में गुर्मा रेंज में दो तेंदुओं की आपस में लड़ने से मौत हो गई थी।
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