Mirzapur: तेंदुए के भय से घरों में कैद हुए लोग, खेतों में जाने से डर रहे किसान, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
जिले के बरैनी गांव स्थित गंगा किनारे तेंदुआ दिखने से ग्रामीण अब भी डरे हुए हैं। इधर, सोशल मीडिया पर तेंदुए का टहलते हुए वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में और दहशत फैल गई है। किसान खेतों में जाने से भी कतरा रहे हैं।
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मिर्जापुर जिले के मझवां विकास खंड क्षेत्र के गड़ौली, केवटाबीर और बरैनी गांव स्थित गंगा किनारे दो दिन पहले तेंदुआ दिखने से ग्रामीण भयभीत हैं। ग्रामीण खेतों में जाने से डर रहे हैं। इससे खेती कार्य प्रभावित हो रहा है। महिलाएं मवेशियों के लिए हरे चारे का भी इंतजाम नहीं कर पा रही हैं।
केवटाबीर, गड़ौली व बरैनी गांव के ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिन से गंगा किनारे तेंदुआ दिखाई दे रहा है। दो दिन पहले तेंदुआ हमला कर एक बकरी को खा गया था। तेंदुए के डर से किसान खेतों में अकेले जाने से कतरा रहे हैं। गंगा के कछार की तरफ तेंदुआ होने की सूचना से ग्रामीणों में भय है।
ग्रामीणों का कहना है कि बुधवार की रात से शनिवार तक वन विभाग की टीम क्षेत्र में कांबिंग भी कर रही है, लेकिन पंजे के निशान को छोड़कर वन विभाग तेंदुआ तक नहीं पहुंच सका है। वन दरोगा मनोज कुमार का कहना है कि पंजों के निशान से तेंदुआ होने की स्थिति स्पष्ट हो रही है। ग्रामीणों को भयभीत होने की जगह सजगता से काम लेना होगा।
सोशल मीडिया पर रात में टहलते हुए तेंदुए का वीडियो वायरल
मझवां क्षेत्र में तीन दिन से वन विभाग तेंदुआ के पंजे का निशान ढूंढ कर पुष्टि करने में जुटा हुआ है, वहीं शनिवार को देर शाम सोशल मीडिया पर टार्च की रोशनी में विचरण करते हुए एक तेंदुए का वीडियो वायरल हो रहा है।
उधर, वीडियो वायरल होते ही मझवां के गड़ौली और आसपास के क्षेत्रों में लोगों में भय व्याप्त हो गया। लोग अपने-अपने घरों में ही रहे। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को देख वन विभाग भी सतर्क हो गया। वायरल वीडियो मझवां विकास खंड क्षेत्र का है। मंदिर की चहारदीवारी पर तेंदुआ टार्च की रोशनी में दहाड़ें मार रहा है।
वन विभाग के आंकड़ों में जिले में नहीं है तेंदुआ
मझवां विकास खंड में भले ही ग्रामीणों को तेंदुआ दिखने की सूचना मिल रही है, लेकिन वन विभाग के आंकड़ों में कैमूर वन्य जीव विहार में तेंदुआ नहीं है। वन विभाग की ओर से प्रत्येक तीन वर्ष में जंगली जानवरों की गणना कराई जाती है। कैमूर वन्य जीव विहार की तरफ से वर्ष 2019 में वन्य पशुओं की गणना कराई गई थी, जिसमें चार नर, पांच मादा व छह बच्चों समेत कुल तेंदुओं की संख्या 15 रही। तीन साल बाद 2022 में हुई गणना में यह संख्या घटकर शून्य हो गई। संवाद
क्या कहते हैं लोग
- मल्लाह बस्ती में ज्यादातर लोगों की आजीविका मछली पकड़ने से चलती है। रात में गंगा किनारे मछली पकड़ने जाते हैं। जब से क्षेत्र में तेंदुआ दिखा है, लोग गंगा किनारे जाने से डर रहे हैं। गंगा के किनारे झुंड के साथ लोग जाने को विवश हैं। - महात्मा निषाद, बरैनी।
- दो दिन पहले गांव के कुछ लोगों ने गंगा किनारे तेंदुए को देखा और उसका वीडियो तथा फोटो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। तब से ग्रामीण भय के साए में जी रहे हैं। जब तक वह पकड़ा नहीं जाएगा, ग्रामीणों में हर समय दहशत रहेगी। - मोनू वर्मा, केवटाबीर।
- पशुओं के लिए हरे चारे के लिए गेहूं की तरफ गई थीं। खेत में तेंदुआ के पैरों के निशान मिले। वन विभाग की टीम उसकी फोटो खींचकर ले गई है। लेकिन अभी तक तेंदुआ न तो पकड़ा गया है और न ही उसका कोई पता चल रहा है। इससे गांव में भय का माहौल है। - सुघरा, केवटाबीर।
- ज्यादातर ग्रामीण गंगा किनारे सब्जी की खेती किए हुए हैं। प्रतिदिन खेतों में जाकर उसकी निराई, गुड़ाई और टमाटर तोड़ने का कार्य किया जाता है। जब से क्षेत्र में तेंदुआ दिखा है, खेत की तरफ जाने की हिम्मत नहीं पड़ रही है। - दिव्या, गड़ौली।
अधिकारी बोले
मिर्जापुर के दक्षिण कछार बेल्ट चुनार, चंदौली होते हुए कैमूर वाइड लाइन से जुड़ा हुआ है। जिससे जंगली जानवर गंगा के कछार की तरफ बहक कर आ जाते है। कुछ दिन इधर उधर घूमने के बाद पुन: कैमूर वाइड लाइन की ओर लौट जाते हैं।
-सत्य प्रकाश वर्मा, क्षेत्रीय वनाधिकारी मिर्जापुर।
गड़ौली क्षेत्र में तेंदुआ देखे जाने की सूचना पर वन विभाग की टीम लगातार तीन दिन से मझवां क्षेत्र स्थित गंगा कछार में कांबिंग कर रही है। कछार स्थित कुछ खेतों में जानवर के पंजे के निशान मिले हैं। जो तेंदुए के हो भी सकते हैं और नहीं भी हो सकते हैं। फोटो कराकर जांच के लिए भेज दी गई है। जब तक तेंदुए के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती है, ग्रामीणों को सावधानी बरतनी होगी।
- अरविंद राज मिश्र, प्रभागीय वनाधिकारी