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श्रीकृष्ण के जन्म लेेते ही हुई आतिशबाजी
ब्यूरो / अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Sun, 06 Sep 2015 12:01 AM IST
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नगरीय इलाके सहित जनपद के ग्राम्यांचलों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन त्योहार बड़े ही श्रद्घापूर्वक मनाया गया। मंदिरों सहित घरों में सजाई गई एक से बढ़कर एक नयनाभिराम झांकियों को देखने लोगों का तांता लगा रहा। भगवान श्रीकृष्ण लीलाओं की मनोहारी झांकियां देख भक्तजन मंत्रमुग्ध हो उठे। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म होते ही आकाश में आतिशबाजी का भव्य नजारा देखने को मिला।
मधुर भजनों की धुन से पूरा वातवारण भक्तिमय हो रहा था। वहीं, रंग-बिरंगे झालरों व फूल-पत्तियों से की गई सजावट की छटा देेखते बन रही थी। भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष के अष्टमी तिथि शनिवार को रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म होते ही आसमान में आतिशबाजियां छूटने लगीं।
वहीं, जगह-जगह भजन-कीर्तन और सोहर गान का भी कार्यक्रम होने लगा। नगर के पुलिस लाइन परिसर, जिला कारागार एवं जनपद के अधिकांश थानों में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। जन्मोत्सव के तहत जगह-जगह सजाई गई एक से बढ़कर एक भव्य झांकी का दर्शन करने के लिए दर्शकों का रेला लगा रहा। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के तहत भक्तों के बीच प्रसाद का भी वितरण किया गया।
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विंध्याचल धाम में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व बड़े ही श्रद्घाभाव से मनाया गया। मंदिर की आकर्षक फूल-पत्तियों सहित रंगीन लाइट से की गई सजावट एक अलौकिक छटा बिखेर रही थी। मंदिर परिसर में विराजमान मां विंध्यवासिनी एवं राधा-कृष्ण का फूलों से किया गया भव्य शृंगार दर्शन पाकर श्रद्घालु निहाल हो उठे। भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कहीं-कहीं भजन-कीर्तन तो कहीं पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
त्योहार पर घरों में तरह-तरह के आकर्षक खिलौनों से की गई भव्य सजावट देख बच्चे खुशी से उछल रहे थे, वहीं श्रीकृष्ण लीलाओं से संबंधित भव्य झांकियां दर्शकों के बीच आकर्षण का केंद्र बने रहे। नगर सहित ग्रामीण अंचलों में स्थित विभिन्न मंदिरों पर की गई मनोहारी झांकियों की सजावट देखते बन रही थी। नयनाभिराम झांकियों को देखने के लिए शाम से देर रात तक भक्तजन डटे रहे।
प्रख्यात ज्योतिषाचार्य डा. रामलाल त्रिपाठी ने बताया कि द्वापर युग के अंत में भगवान श्रीकृष्ण का प्रादुर्भाव हुआ था। भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को सिंह राशि पर सूर्य, वृष राशि पर चंद्रमा, रोहिणी नक्षत्र एवं रात्रि 12 बजे का समय था।
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मधुर भजनों की धुन से पूरा वातवारण भक्तिमय हो रहा था। वहीं, रंग-बिरंगे झालरों व फूल-पत्तियों से की गई सजावट की छटा देेखते बन रही थी। भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष के अष्टमी तिथि शनिवार को रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म होते ही आसमान में आतिशबाजियां छूटने लगीं।
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वहीं, जगह-जगह भजन-कीर्तन और सोहर गान का भी कार्यक्रम होने लगा। नगर के पुलिस लाइन परिसर, जिला कारागार एवं जनपद के अधिकांश थानों में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। जन्मोत्सव के तहत जगह-जगह सजाई गई एक से बढ़कर एक भव्य झांकी का दर्शन करने के लिए दर्शकों का रेला लगा रहा। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के तहत भक्तों के बीच प्रसाद का भी वितरण किया गया।
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विंध्याचल धाम में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व बड़े ही श्रद्घाभाव से मनाया गया। मंदिर की आकर्षक फूल-पत्तियों सहित रंगीन लाइट से की गई सजावट एक अलौकिक छटा बिखेर रही थी। मंदिर परिसर में विराजमान मां विंध्यवासिनी एवं राधा-कृष्ण का फूलों से किया गया भव्य शृंगार दर्शन पाकर श्रद्घालु निहाल हो उठे। भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कहीं-कहीं भजन-कीर्तन तो कहीं पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
त्योहार पर घरों में तरह-तरह के आकर्षक खिलौनों से की गई भव्य सजावट देख बच्चे खुशी से उछल रहे थे, वहीं श्रीकृष्ण लीलाओं से संबंधित भव्य झांकियां दर्शकों के बीच आकर्षण का केंद्र बने रहे। नगर सहित ग्रामीण अंचलों में स्थित विभिन्न मंदिरों पर की गई मनोहारी झांकियों की सजावट देखते बन रही थी। नयनाभिराम झांकियों को देखने के लिए शाम से देर रात तक भक्तजन डटे रहे।
प्रख्यात ज्योतिषाचार्य डा. रामलाल त्रिपाठी ने बताया कि द्वापर युग के अंत में भगवान श्रीकृष्ण का प्रादुर्भाव हुआ था। भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को सिंह राशि पर सूर्य, वृष राशि पर चंद्रमा, रोहिणी नक्षत्र एवं रात्रि 12 बजे का समय था।