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एक मौका चुका, काजल को अब सरकार से मदद की आस
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अदलहाट। सरकार की ओर से कोई मदद न मिलने के कारण एवरेस्ट फतह कर देश का नाम रोशन करने का सपना सजोने वाली पर्वतारोही काजल पटेल को इस बार भी मायूसी हाथ लगी है। पांच जनवरी को रजिस्ट्रेशन का पांच लाख रुपया जमा होना था, डीएम से लेकर राज्यमंत्री के पहल के बाद भी सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिल सकी। पैसा न जमा होने से पहला मौका भले ही चूक गया हो पर एशियन ट्रैकिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने काजल पटेल को जनवरी तक का मौका दिया है, इसलिए अभी सरकार से मदद की आस बरकरार है।
2018 में हिमांचल प्रदेश के अटल बिहारी बाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनरिंग एंड एलिड स्पोर्ट ट्रेनिंग सेंटर से एडवांस माउंटेनरिंग कोर्स कर एवरेस्ट की ऊंची बर्फीली चोटी पर फतह करने का सपना संजो कर निकली काजल पटेल को लगातार दूसरे वर्ष आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। जमालपुर ब्लाक के हिनौतीमाफी गांव के किसान संतराम सिंह की पुत्री पर्वतारोही काजल पटेल को हिमालय की ऊंची चोटी पर भारतीय तिरंगा फहराने के सपनों को साकार करने के लिए 25 लाख रुपये के मदद दरकार है। इसमें पांच लाख का रजिस्ट्रेशन शुल्क पांच जनवरी 2020 तक जमा करना था। बाकी का पैसा पांच मार्च को जमा करनेे के बाद 58 दिन का सफर शुरू होता। साधारण परिवार में जन्मी काजल पटेल ने सरकार से मदद की गुहार लगाई। ऊर्जा राज्य मंत्री रमाशंकर सिंह पटेल काजल के संबंध में मुख्यमंत्री से दो बार वार्ता कर चुके है। इसके बाद भी अभी तक कोई सफलता हाथ लगी रही है। डीएम सुशील कुमार पटेल ने भी शासन में पत्र लिखा है, पर अब तक मदद नहीं मिल सकी। रजिस्ट्रेशन शुल्क का पांच लाख जमा करने की तारीख तो बीत गई है, पर नेपाल सरकार की देखरेख में चलने वाले एशियन ट्रैकिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने काजल पटेल को जनवरी माह तक का समय दिया है। देखना होगा बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं को गिनाने वाली सरकार कितनी मददगार साबित होती है या फिर दूसरे वर्ष भी कालज को निराशा हाथ लगेगी।
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2018 में हिमांचल प्रदेश के अटल बिहारी बाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनरिंग एंड एलिड स्पोर्ट ट्रेनिंग सेंटर से एडवांस माउंटेनरिंग कोर्स कर एवरेस्ट की ऊंची बर्फीली चोटी पर फतह करने का सपना संजो कर निकली काजल पटेल को लगातार दूसरे वर्ष आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। जमालपुर ब्लाक के हिनौतीमाफी गांव के किसान संतराम सिंह की पुत्री पर्वतारोही काजल पटेल को हिमालय की ऊंची चोटी पर भारतीय तिरंगा फहराने के सपनों को साकार करने के लिए 25 लाख रुपये के मदद दरकार है। इसमें पांच लाख का रजिस्ट्रेशन शुल्क पांच जनवरी 2020 तक जमा करना था। बाकी का पैसा पांच मार्च को जमा करनेे के बाद 58 दिन का सफर शुरू होता। साधारण परिवार में जन्मी काजल पटेल ने सरकार से मदद की गुहार लगाई। ऊर्जा राज्य मंत्री रमाशंकर सिंह पटेल काजल के संबंध में मुख्यमंत्री से दो बार वार्ता कर चुके है। इसके बाद भी अभी तक कोई सफलता हाथ लगी रही है। डीएम सुशील कुमार पटेल ने भी शासन में पत्र लिखा है, पर अब तक मदद नहीं मिल सकी। रजिस्ट्रेशन शुल्क का पांच लाख जमा करने की तारीख तो बीत गई है, पर नेपाल सरकार की देखरेख में चलने वाले एशियन ट्रैकिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने काजल पटेल को जनवरी माह तक का समय दिया है। देखना होगा बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं को गिनाने वाली सरकार कितनी मददगार साबित होती है या फिर दूसरे वर्ष भी कालज को निराशा हाथ लगेगी।
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