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Mirzapur News: जिउतिया आज, बेटों की दीर्घायु के लिए माताएं रखेंगी निर्जला व्रत
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वासलीगंज स्थित फल की दुकान से खरीदारी करते लोग।- संवाद।
- फोटो : udhampur news
फल और खिलौनों से सजी रहीं दुकानें, बाजारों में बूंदी के लड्डू की खूब रही मांग
मिर्जापुर। बेटों की लंबी उम्र और उनकी सुख शांति के लिए माताएं आज जिउतिया का निर्जला व्रत रखेंगी। पर्व की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को बाजारों में फल और खिलौनों की दुकानें सजी रहीं। रेडीमेड कपड़ों की दुकानों पर भी चहल-पहल रही। लोग छोटे बच्चों के लिए नए परिधान और खिलौने खरीदने में जुटे रहे।
नगर में वासलीगंज, घंटाघर, मुकेरी बाजार, तेलियागंज, त्रिमुहानी, संगमोहाल, त्रिमोहानी, रमईपट्टी, सिविल लाइन, रामबाग, महुवरिया आदि बाजारों में सुबह से ही ग्राहकों की चहल-पहल रही। पुरुष और महिलाएं फल, डलिया, खिलौने और कपड़ों की खरीदारी में जुटे रहे। पर्व पर सोने और चांदी के जितिया की मांग रहती है। सोने के भाव में आई तेजी के चलते ज्यादातर लोग चांदी के ही जितिया खरीद कर संतोष किए।
त्योहार पर बढ़ी मांग को देखते हुए 30 से 40 रुपये दर्जन बिकने वाला केला जिउतिया की पूर्व संध्या पर 40 से 50 रुपये दर्जन बिका। इसी तरह सेब के भाव भी बढ़े रहे। 80 रुपये किलो बिकने वाला सेब शनिवार को बढ़कर 100 से 120 रुपये किलोग्राम बिक रहा था। नाशपाती, अनार, संतरा और मोसंबी की खूब मांग रही। इनके दामों में भी अन्य दिनों की तुलना में प्रति किलो 20 रुपये से ज्यादा का अंतर रहा। मिष्ठान की दुकानों पर बूंदी के लड्डू की खूब मांग रही। कीमत 240 रुपये प्रति किलो रही।
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जीमूतवाहन ने नागवंश की रक्षा के लिए जीवन त्याग दिया था
दोपहर तीन से शाम 6:15 बजे तक जीउतिया पूजन और जीमूतवाहन की कथा का शुभ मुहूर्त
अदलहाट। संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और संकटों से रक्षा की कामना के लिए माताएं शनिवार को जिउतिया का व्रत रखेंगी। धार्मिक मान्यता है कि अश्विन कृष्ण अष्टमी को 24 घंटे निर्जला व्रत रखकर गंधर्व राजकुमार जीमूतवाहन का पूजन किया जाता है।
मान्यता है कि जीमूतवाहन ने नागवंश की रक्षा के लिए जीवन त्याग दिया था। इसी त्याग और तपस्या के स्मरण में माताएं संतान की रक्षा के लिए यह व्रत रखती हैं। ज्योतिषाचार्य पं विजय शंकर मिश्र ने बताया कि अश्विन कृष्ण अष्टमी शनिवार सुबह आठ बजे से रविवार सुबह 5:53 बजे तक रहेगी। शनिवार दोपहर तीन से शाम 6:15 बजे तक जीउतिया पूजन और जीमूतवाहन की कथा श्रवण का शुभ मुहूर्त है। पारण रविवार सुबह 7:28 बजे के बाद किया जाएगा। धार्मिक मान्यता में इस दिन चील के दर्शन और पूजन का भी विशेष महत्व बताया है।
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मिर्जापुर। बेटों की लंबी उम्र और उनकी सुख शांति के लिए माताएं आज जिउतिया का निर्जला व्रत रखेंगी। पर्व की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को बाजारों में फल और खिलौनों की दुकानें सजी रहीं। रेडीमेड कपड़ों की दुकानों पर भी चहल-पहल रही। लोग छोटे बच्चों के लिए नए परिधान और खिलौने खरीदने में जुटे रहे।
नगर में वासलीगंज, घंटाघर, मुकेरी बाजार, तेलियागंज, त्रिमुहानी, संगमोहाल, त्रिमोहानी, रमईपट्टी, सिविल लाइन, रामबाग, महुवरिया आदि बाजारों में सुबह से ही ग्राहकों की चहल-पहल रही। पुरुष और महिलाएं फल, डलिया, खिलौने और कपड़ों की खरीदारी में जुटे रहे। पर्व पर सोने और चांदी के जितिया की मांग रहती है। सोने के भाव में आई तेजी के चलते ज्यादातर लोग चांदी के ही जितिया खरीद कर संतोष किए।
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त्योहार पर बढ़ी मांग को देखते हुए 30 से 40 रुपये दर्जन बिकने वाला केला जिउतिया की पूर्व संध्या पर 40 से 50 रुपये दर्जन बिका। इसी तरह सेब के भाव भी बढ़े रहे। 80 रुपये किलो बिकने वाला सेब शनिवार को बढ़कर 100 से 120 रुपये किलोग्राम बिक रहा था। नाशपाती, अनार, संतरा और मोसंबी की खूब मांग रही। इनके दामों में भी अन्य दिनों की तुलना में प्रति किलो 20 रुपये से ज्यादा का अंतर रहा। मिष्ठान की दुकानों पर बूंदी के लड्डू की खूब मांग रही। कीमत 240 रुपये प्रति किलो रही।
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जीमूतवाहन ने नागवंश की रक्षा के लिए जीवन त्याग दिया था
दोपहर तीन से शाम 6:15 बजे तक जीउतिया पूजन और जीमूतवाहन की कथा का शुभ मुहूर्त
अदलहाट। संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और संकटों से रक्षा की कामना के लिए माताएं शनिवार को जिउतिया का व्रत रखेंगी। धार्मिक मान्यता है कि अश्विन कृष्ण अष्टमी को 24 घंटे निर्जला व्रत रखकर गंधर्व राजकुमार जीमूतवाहन का पूजन किया जाता है।
मान्यता है कि जीमूतवाहन ने नागवंश की रक्षा के लिए जीवन त्याग दिया था। इसी त्याग और तपस्या के स्मरण में माताएं संतान की रक्षा के लिए यह व्रत रखती हैं। ज्योतिषाचार्य पं विजय शंकर मिश्र ने बताया कि अश्विन कृष्ण अष्टमी शनिवार सुबह आठ बजे से रविवार सुबह 5:53 बजे तक रहेगी। शनिवार दोपहर तीन से शाम 6:15 बजे तक जीउतिया पूजन और जीमूतवाहन की कथा श्रवण का शुभ मुहूर्त है। पारण रविवार सुबह 7:28 बजे के बाद किया जाएगा। धार्मिक मान्यता में इस दिन चील के दर्शन और पूजन का भी विशेष महत्व बताया है।