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दहेज हत्या में पति को 10 वर्ष की कैद
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मिर्जापुर। हलिया थाना क्षेत्र के औरा गांव में दहेज हत्या में विवाहिता की हत्या के मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम जितेंद्र मिश्रा की अदालत ने दोष सिद्ध होने पर पति 10 वर्ष की कैद के साथ 26 के अर्थदंड से दंडित किया।
लालगंज थाना क्षेत्र के रामपुर अतरी निवासी रमाशंकर पाल ने अपनी पुत्री वनदेवी उर्फ वंदना की शादी हलिया थाना क्षेत्र के औरा गांव निवासी झुरुपाल के पुत्र अमृतलाल से किया था। रमाशंकर का आरोप है कि दहेज में बाइक न मिलने पर उसकी पुत्री को ससुराल वाले प्रताड़ित करते थे। बाइक देने के बाद एक लाख रुपये की मांग करने लगे। न देने पर पति अमृतलाल पाल, देवर वालेश्वर व सास डंगरी ने 18 मई 2013 को उसकी पुत्री की हत्या कर शव को पेड़ से लटका दिया। रमाशंकर की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी पति, देवर व सास के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचना में विलंब होने के कारण मृतका के पिता रमाशंकर ने पुलिस महानिदेशक लखनऊ को पत्र लिखा था। डीजीपी ने गुणवत्तापूूर्ण विवेचना के लिए सीओ अमित किशोर श्रीवास्तव को विवेचना दिया था। सीओ ने गुणवत्तापूर्ण विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। अभियोजन की तरह से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सच्चिदानंद तिवारी ने छह गवाहों को परीक्षित कराया। अधिवक्ताओं की दलील और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य व गवाहों के बयान के आधार पर शनिवार को सुनवाई की गई। न्यायालय ने पति को पत्नी की हत्या और प्रताड़ना के जुर्म में दोष सिद्ध पाया। देवर, सास व ससुर को संदेह का लाभ देकर मुक्त कर दिया। न्यायालय ने आरोपी पति को 10 वर्ष की कड़ी कैद के साथ 26 हजार रुपये जुर्माने से दंडित कर जेल भेज दिया।
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लालगंज थाना क्षेत्र के रामपुर अतरी निवासी रमाशंकर पाल ने अपनी पुत्री वनदेवी उर्फ वंदना की शादी हलिया थाना क्षेत्र के औरा गांव निवासी झुरुपाल के पुत्र अमृतलाल से किया था। रमाशंकर का आरोप है कि दहेज में बाइक न मिलने पर उसकी पुत्री को ससुराल वाले प्रताड़ित करते थे। बाइक देने के बाद एक लाख रुपये की मांग करने लगे। न देने पर पति अमृतलाल पाल, देवर वालेश्वर व सास डंगरी ने 18 मई 2013 को उसकी पुत्री की हत्या कर शव को पेड़ से लटका दिया। रमाशंकर की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी पति, देवर व सास के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचना में विलंब होने के कारण मृतका के पिता रमाशंकर ने पुलिस महानिदेशक लखनऊ को पत्र लिखा था। डीजीपी ने गुणवत्तापूूर्ण विवेचना के लिए सीओ अमित किशोर श्रीवास्तव को विवेचना दिया था। सीओ ने गुणवत्तापूर्ण विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। अभियोजन की तरह से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सच्चिदानंद तिवारी ने छह गवाहों को परीक्षित कराया। अधिवक्ताओं की दलील और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य व गवाहों के बयान के आधार पर शनिवार को सुनवाई की गई। न्यायालय ने पति को पत्नी की हत्या और प्रताड़ना के जुर्म में दोष सिद्ध पाया। देवर, सास व ससुर को संदेह का लाभ देकर मुक्त कर दिया। न्यायालय ने आरोपी पति को 10 वर्ष की कड़ी कैद के साथ 26 हजार रुपये जुर्माने से दंडित कर जेल भेज दिया।
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