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एक डाक्टर-एक बेड के सहारे रेल कर्मियों की स्वास्थ्य व्यवस्था
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मिर्जापुर। बी श्रेणी का रेलवे स्टेशन होने के बाद भी मिर्जापुर रेलवे कालोनी में स्थित अस्पताल की हालत बहुत ही दयनीय है। अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की ही नहीं कर्मचारियों की भी कमी है। इसके चलते अस्पताल में प्राथमिक उपचार भी बमुश्किल हो पाता है। ज्यादातर मरीजों को जिले के मंडलीय अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। चोट लगने पर अस्पताल में ड्रेसिंग करने वाला कोई नहीं है। कभी-कभी सफाईकर्मी से ड्रेसिंग का कार्य कराया जाता है।
रेलवे कालोनी में हजारों लोग रहते हैं। उनके स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए रेलवे कालोनी में ही अस्पताल बनाया गया है। जहां पर रेल कर्मचारियों के साथ ट्रेन में बीमार होने वाले यात्रियों का मेमो आने पर उपचार किया जाता है। बड़ी बात ये है कि अस्पताल में बेहतर उपचार की कोई सुविधा नहीं है। हजारों लोगों के उपचार के लिए सिर्फ एक बेड है। अस्पताल सुबह नौ बजे से एक और शाम को चार से पांच बजे तक खुलता है। अस्पताल में मरीज आते हैं, पर उनको संपूर्ण इलाज नहीं मिल पाता है। अस्पताल में सिर्फ एक डा. कुलदीप की तैनाती है। इसके अलावा एक फार्मासिस्ट, तीन अटेंडेंट, एक सफाईकर्मी और चतुर्थश्रेणी कर्मचारी है। अस्पताल में दो डाक्टर की पोस्ट है, इसमें एक डाक्टर की पोस्ट दो वर्ष से खाली चल रही है। इसके अलावा अस्पताल में तीन वर्ष से ड्रेसर की पोस्ट खाली चल रही है। चोट लगने पर अस्पताल में ड्रेसिंग सफाईकर्मी को करनी पड़ती है।
कई बार अस्पताल में लग चुका है दुर्व्यवहार का आरोप
मिर्जापुर। रेलवे अस्पताल में उपचार की सुविधा तो बद्तर है ही वहां पर मरीजों से बेहतर बर्ताव भी नहीं किया जाता है। अवकाश प्राप्त रेलवे कर्मचारी आए दिन अस्पताल में बैठने के लिए कुर्सी न होने और अस्पताल के कर्मचारी पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते रहते हैं। अवकाश प्राप्त कर्मचारियों की ओर से कई बार शिकायत की गई, पर रेलवे ने कोई कार्रवाई नहीं की, न ही व्यवस्था में सुधार किया।
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सफाई स्वास्थ्य निरीक्षक की कुर्सी रही खाली
मिर्जापुर। अस्पताल परिसर में ही सफाई स्वास्थ्य निरीक्षक का कक्ष है। मंगलवार की दोपहर में कुर्सी खाली थी। पूछने पर अस्पताल के स्टाफ ने बताया कि वो सप्ताह में एक बार शनिवार को आते हैं।
न महिला डाक्टर है न ही स्टाफ नर्स
मिर्जापुर। रेलवे अस्पताल में न तो कोई महिला डाक्टर की तैनाती की गई है, न ही स्टाफ नर्स है। इस कारण कालोनी की बीमार महिलाओं को परेशानी होती है। रेलवे कालोनी में आधी आबादी के स्वास्थ्य को लेकर कोई सुविधा नहीं है। प्रसव आदि अन्य महिला संबंधी रोग के लिए महिलाओं का उपचार नहीं हो पाता।
वर्जन
रेलवे अस्पताल सिर्फ नाम मात्र के लिए है। यहां बेहतर उपचार नहीं होता है। सिर्फ छोटे रोग ही उपचार होता है। अस्पताल में दवाएं भी नहीं मिल पाती है।
माता प्रसाद, सफाईकर्मी
एक माह पहले हाथ फ्रैक्चर हुआ था। अस्पताल में दिखाने पर प्रयागराज रेफर कर दिया गया। अस्पताल में डाक्टर और सुविधाओं की कमी है।
रामपति सरोज, रेलकर्मी
अस्पताल में प्राथमिक उपचार होता है। गंभीर मामलों में मरीज को इलाहाबाद रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में डाक्टर और अन्य स्टाफ की कमी है। दो वर्ष से डाक्टर और तीन वर्ष से ड्रेसर नहीं है। नर्स भी नहीं है।
डा. कुलदीप, सहायक मंडल चिकित्साधिकारी
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रेलवे कालोनी में हजारों लोग रहते हैं। उनके स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए रेलवे कालोनी में ही अस्पताल बनाया गया है। जहां पर रेल कर्मचारियों के साथ ट्रेन में बीमार होने वाले यात्रियों का मेमो आने पर उपचार किया जाता है। बड़ी बात ये है कि अस्पताल में बेहतर उपचार की कोई सुविधा नहीं है। हजारों लोगों के उपचार के लिए सिर्फ एक बेड है। अस्पताल सुबह नौ बजे से एक और शाम को चार से पांच बजे तक खुलता है। अस्पताल में मरीज आते हैं, पर उनको संपूर्ण इलाज नहीं मिल पाता है। अस्पताल में सिर्फ एक डा. कुलदीप की तैनाती है। इसके अलावा एक फार्मासिस्ट, तीन अटेंडेंट, एक सफाईकर्मी और चतुर्थश्रेणी कर्मचारी है। अस्पताल में दो डाक्टर की पोस्ट है, इसमें एक डाक्टर की पोस्ट दो वर्ष से खाली चल रही है। इसके अलावा अस्पताल में तीन वर्ष से ड्रेसर की पोस्ट खाली चल रही है। चोट लगने पर अस्पताल में ड्रेसिंग सफाईकर्मी को करनी पड़ती है।
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कई बार अस्पताल में लग चुका है दुर्व्यवहार का आरोप
मिर्जापुर। रेलवे अस्पताल में उपचार की सुविधा तो बद्तर है ही वहां पर मरीजों से बेहतर बर्ताव भी नहीं किया जाता है। अवकाश प्राप्त रेलवे कर्मचारी आए दिन अस्पताल में बैठने के लिए कुर्सी न होने और अस्पताल के कर्मचारी पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते रहते हैं। अवकाश प्राप्त कर्मचारियों की ओर से कई बार शिकायत की गई, पर रेलवे ने कोई कार्रवाई नहीं की, न ही व्यवस्था में सुधार किया।
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सफाई स्वास्थ्य निरीक्षक की कुर्सी रही खाली
मिर्जापुर। अस्पताल परिसर में ही सफाई स्वास्थ्य निरीक्षक का कक्ष है। मंगलवार की दोपहर में कुर्सी खाली थी। पूछने पर अस्पताल के स्टाफ ने बताया कि वो सप्ताह में एक बार शनिवार को आते हैं।
न महिला डाक्टर है न ही स्टाफ नर्स
मिर्जापुर। रेलवे अस्पताल में न तो कोई महिला डाक्टर की तैनाती की गई है, न ही स्टाफ नर्स है। इस कारण कालोनी की बीमार महिलाओं को परेशानी होती है। रेलवे कालोनी में आधी आबादी के स्वास्थ्य को लेकर कोई सुविधा नहीं है। प्रसव आदि अन्य महिला संबंधी रोग के लिए महिलाओं का उपचार नहीं हो पाता।
वर्जन
रेलवे अस्पताल सिर्फ नाम मात्र के लिए है। यहां बेहतर उपचार नहीं होता है। सिर्फ छोटे रोग ही उपचार होता है। अस्पताल में दवाएं भी नहीं मिल पाती है।
माता प्रसाद, सफाईकर्मी
एक माह पहले हाथ फ्रैक्चर हुआ था। अस्पताल में दिखाने पर प्रयागराज रेफर कर दिया गया। अस्पताल में डाक्टर और सुविधाओं की कमी है।
रामपति सरोज, रेलकर्मी
अस्पताल में प्राथमिक उपचार होता है। गंभीर मामलों में मरीज को इलाहाबाद रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में डाक्टर और अन्य स्टाफ की कमी है। दो वर्ष से डाक्टर और तीन वर्ष से ड्रेसर नहीं है। नर्स भी नहीं है।
डा. कुलदीप, सहायक मंडल चिकित्साधिकारी