मिर्जापुर: ग्रामीण क्षेत्रों में पकड़ बरकरार, साइकिल ने पकड़ी रफ्तार, सपा मुखिया अखिलेश यादव के पूर्वांचल दौरे का दिखा असर
- पंचायत चुनाव में मंडल में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी सपा
- एक बार फिर भाजपा के स्थानीय नेताओं का नहीं चला जादू
- अपना दल एस ने भी मंडल में दिखाई दमदारी
- दो जिलों में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला
विस्तार
मिर्जापुर विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर साइकिल ने रफ्तार पकड़ ली है। विंध्याचल मंडल की बात करें तो जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने सबसे ज्यादा सीट हासिल की। मिर्जापुर में 12 सीटों के साथ ही मंडल में 33 सीटों पर कब्जा जमाया। इस कामयाबी को ग्रामीण क्षेत्रों में सपा की मजबूत पकड़ और फरवरी में पार्टी मुखिया अखिलेश यादव के पूर्वांचल दौरे के असर के रूप में देखा जा रहा है। वहीं केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद पंचायत चुनाव में पार्टी समर्थित प्रत्याशियों को महज पांच सीट से ही संतोष करना पड़ा।
वहीं अपने दम पर पंचायत चुनाव लड़ी अपना दल एस ने जहां मिर्जापुर में चार वहीं सोनभद्र में तीन सीटों पर विजय हासिल कर अपनी दमदारी पेश की। वहीं पिछले आंकड़ों को देखा जाए तो बसपा का प्रदर्शन सामान्य रहा। जहां तक कांग्रेस की बात है तो भदोही और सोनभद्र में समर्थित प्रत्याशी खाता तक नहीं खोल पाए। इससे बेहतर प्रदर्शन तो मंडल में दो सीट हासिल कर निषाद पार्टी ने किया।
बंगाल चुनाव के बाद सभी की निगाहें पंचायत चुनाव के परिणाम पर टिकी थीं। लोगों को उम्मीद थी कि वहां नहीं तो यहां भाजपा का प्रदर्शन बेहतर रहेगा। लेकिन एक बार फिर पंचायत चुनाव में सपा ने बाजी मारी। विंध्याचल मंडल की बात करें तो मिर्जापुर में 12, भदोही में 10 और सोनभद्र में 11 सीटों पर सपा समर्थित प्रत्याशियों ने कब्जा जमाया। इन परिणामों ने जहां ग्रामीण क्षेत्रों में सपा की पकड़ को प्रदर्शित किया तो वहीं विधान सभा चुनाव से पहले अन्य पार्टियों को कड़ा संदेश भी दिया है। वहीं ज्यादा की उम्मीद कर रहे भाजपा को फिर कुछ सीटों से ही संतोष करना पड़ा। मिर्जापुर में पांच, भदोही में चार और सोनभद्र में छह सीटों पर भाजपा के समर्थन वाले उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। परिणामों के चलते एक बार फिर नगर और व्यापारियों की पार्टी कही जाने वाली भाजपा इस मिथक को नहीं तोड़ पाई।
ग्रामीण क्षेत्रों में अपना मजबूत प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं हुई। वहीं भाजपा के मंत्री, सांसद, विधायक सरीखे स्थानीय चेहरे भी पार्टी को जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंचा सके। यह हाल तब है जब हर छोटे बड़े आयोजन, उद्घाटन, लोकार्पण को पार्टी भुना रही है और स्थानीय चेहरों को चमकाने का एक भी मौका नहीं छोड़ रही है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि मिर्जापुर में भाजपा के एक मंत्री, दो राज्यसभा सांसद और तीन विधायक के बावजूद पांच सीटों पर ही सिमट कर रह गई। दूसरी ओर भाजपा की सहयोगी पार्टी अपना दल ने फिर से ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी मजबूत दावेदारी पेश की।
मिर्जापुर से 04 और सोनभद्र से तीन सीटों पर अद एस के प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। बसपा ने मिर्जापुर से 06, सोनभद्र और भदोही से 03-03 सीटों पर जीत हासिल की। पार्टी के पिछले रिपोर्ट कार्ड को देखा जाए तो उनका प्रदर्शन सामान्य रहा। कांग्रेस की बात करें तो मंडल के दो जिलों भदोही और सोनभद्र में खाता ही नहीं खुला। मिर्जापुर में तीन सीट से ही संतोष करना पड़ा।
मिर्जापुर-44
सपा- 12
बसपा- 06
अपना दल एस-04
भाजपा-05
कांग्रेस-03
भारतीय किसान यूनियन-1
महान दल-1
निर्दल-12
संत रविदास नगर- भदोही-26
सपा-10
भाजपा-04
बसपा-03
निषाद पार्टी-01
कांग्रेस-00
निर्दल-08
सोनभद्र-31
सपा-11
भाजपा-06
अपना दल एस-03
बसपा-03
जन अधिकार पार्टी-01
निषाद पार्टी- 01
कांग्रेस-00
निर्दल- 06