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पुस्तक से करें यारी, आनलाइन हो पूरी तैयारी
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मिर्जापुर। लाकडाउन में सर्वाधिक नुकसान यदि किसी का हो रहा है तो वह विद्यार्थियों का हो रहा है। चाहे वह परिषदीय विद्यालयों का विद्यार्थी हो अथवा स्नातक अथवा परास्नातक कक्षाओं का। किसी की परीक्षा नहीं हुई तो किसी का पाठ्यक्रम अधूरा रह गया है। ऐसे में अब सभी परिषदीय विद्यालयों, माध्यमिक बोर्ड व विश्वविद्यालयों ने आनलाइन शिक्षण का तरीका अपनाया है। हालांकि इसमें अभी काफी परेशानी आ रही है।
अधिकतर विद्यार्थियों के पास अभी एंड्रायड फोन न होने से वह न तो साधारण तरीके से चलने वाले व्हाट्सएप समूह में प्रतिभाग कर पा रहे हैं और न ही जूम एप अथवा इसी प्रकार की कोई अन्य आनलाइन तरीके से विद्यालय से जुट पा रहे हैं। इससे यह व्यवस्था तो अभी जिले में गति नहीं पकड़ पा रही है लेकिन शुरूआत अच्छी है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि अधिकतर शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए इस पर काम कर रहे हैं। इससे कुछ विद्यार्थी लाभान्वित भी हो रहे हैं। इसमें एक समस्या यह है कि अभी सभी बच्चों का मोबाइल नंबर भी एकत्र नहीं हो सका है। इससे उनको जोड़ने में परेशानी हो रही है। वैसे शिक्षक व अभिभावक सभी इस प्रयोग को लेकर काफी उत्साहित हैं। शिक्षकों का कहना है कि जो व्यवस्था है वह तो हो ही रही है लेकिन विद्यार्थी अपनी पाठ्य पुस्तकों का भी अध्ययन करें।
महाविद्यालय से इस संबंध में निर्देश आया है। कुछ कक्षाओं के समूह बने हैं और कुछ पर काम हो रहा है। यू- ट्यूब पर वैसे भी विश्वविद्यालय ने पाठ्यक्रम डाला हुआ है। वहां से भी लाभ लिया जा सकता है।
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- डा. प्रतिमा भारती
अब तो परीक्षाओं का समय हो रहा है। इस समय लाकडाउन के चलते सभी कुछ स्थगित है। इसलिए विद्यार्थी घर पर ही आनलाइन तैयारी करें। वे मोबाइल व समूहों के माध्यम से शिक्षकों से टिप्स ले सकते हैं।
- डा. रिचा शुक्ला
परिषदीय विद्यालयों में भी आनलाइन कक्षाएं चलाई जा रही हैं। हालांकि अभी यह सीमित है और इसका कम प्रसार है लेकिन इसके अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। अभिभावक भी काफी उत्साहित हैं।
- रीना सिन्हा
विश्वविद्यालय ने आनलाइन कक्षाओं के बारे में निर्देश दिया है। समूहों का गठन किया जा रहा है। अब तो परीक्षा का समय भी नजदीक है। जूम एप, व्हाट्सएप ग्रुप व यू ट्यूब से भी विद्यार्थी अपनी जरूरत की सामग्री ले सकते हैं।
- डा. सुभाष पांडेय
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अधिकतर विद्यार्थियों के पास अभी एंड्रायड फोन न होने से वह न तो साधारण तरीके से चलने वाले व्हाट्सएप समूह में प्रतिभाग कर पा रहे हैं और न ही जूम एप अथवा इसी प्रकार की कोई अन्य आनलाइन तरीके से विद्यालय से जुट पा रहे हैं। इससे यह व्यवस्था तो अभी जिले में गति नहीं पकड़ पा रही है लेकिन शुरूआत अच्छी है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि अधिकतर शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए इस पर काम कर रहे हैं। इससे कुछ विद्यार्थी लाभान्वित भी हो रहे हैं। इसमें एक समस्या यह है कि अभी सभी बच्चों का मोबाइल नंबर भी एकत्र नहीं हो सका है। इससे उनको जोड़ने में परेशानी हो रही है। वैसे शिक्षक व अभिभावक सभी इस प्रयोग को लेकर काफी उत्साहित हैं। शिक्षकों का कहना है कि जो व्यवस्था है वह तो हो ही रही है लेकिन विद्यार्थी अपनी पाठ्य पुस्तकों का भी अध्ययन करें।
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महाविद्यालय से इस संबंध में निर्देश आया है। कुछ कक्षाओं के समूह बने हैं और कुछ पर काम हो रहा है। यू- ट्यूब पर वैसे भी विश्वविद्यालय ने पाठ्यक्रम डाला हुआ है। वहां से भी लाभ लिया जा सकता है।
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- डा. प्रतिमा भारती
अब तो परीक्षाओं का समय हो रहा है। इस समय लाकडाउन के चलते सभी कुछ स्थगित है। इसलिए विद्यार्थी घर पर ही आनलाइन तैयारी करें। वे मोबाइल व समूहों के माध्यम से शिक्षकों से टिप्स ले सकते हैं।
- डा. रिचा शुक्ला
परिषदीय विद्यालयों में भी आनलाइन कक्षाएं चलाई जा रही हैं। हालांकि अभी यह सीमित है और इसका कम प्रसार है लेकिन इसके अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। अभिभावक भी काफी उत्साहित हैं।
- रीना सिन्हा
विश्वविद्यालय ने आनलाइन कक्षाओं के बारे में निर्देश दिया है। समूहों का गठन किया जा रहा है। अब तो परीक्षा का समय भी नजदीक है। जूम एप, व्हाट्सएप ग्रुप व यू ट्यूब से भी विद्यार्थी अपनी जरूरत की सामग्री ले सकते हैं।
- डा. सुभाष पांडेय