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सिमटने लगीं गंगा, दुश्वारियां बढ़ने लगीं
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Sun, 28 Aug 2016 12:08 AM IST
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उतरा पानी
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एक सप्ताह से लगातार खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा का जलस्तर शनिवार को खतरे से निशान से लगभग 40 सेंटीमीटर नीचे आ गया। जलस्तर घटना शुरू होने से लोगों ने राहत की सांस जरूर ली है लेकिन उतरतना पानी अपने पीछे दुश्वारियां भी छोड़ता जा रहा है। पानी घटने पर शिविर व रिश्तेदारों के यहां रह रहे शरणार्थी धीरे धीरे अपने घरों को लौटने लगे है। हालांकि कीचड़ और गंदगी के चलते लोगों का रहना आसान नहीं है। केंद्रीय जल बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक शाम छह बजे तक गंगा का जलस्तर 77.320 था जबकि खतरे का निशान 77.724 है। पानी तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से कम हो रहा है।
बता दें कि 16 अगस्त से लगातार बढ़ रही गंगा एक सप्ताह तक जिले के आधा दर्जन ब्लाकों में तबाही मचाने के बाद शनिवार को पहली बार खतरे के निशान से नीचे बही। तीन सेंटीमीटर की दर से घट रहे गंगा के जलस्तर की जानकारी होते ही आलाधिकारियों ने राहत की संास ली। सबसे बड़ी राहत बाढ़ प्रभावित लोगों को हुआ जो अपना घरबार छोड़कर शिविर में जीवन बिताने के लिए मजबूर है। बता दें कि गंगा का जलस्तर बढ़ने से जनपद के छानबे, कोन, सिटी, मझवां, पहाड़ी, सीखड़ तथा नरायपुर व जमालपुर ब्लाक के लोगों को काफी परेशानी उठाना पड़ा। गांवों में पानी घुसने से लोग अपना घरबार छोड़कर परिवार के साथ शिविर तथा रिश्तेदोरों के यहां रहने चले गए।
यहीं नहीं मिर्जापुर औराई मार्ग, मिर्जापुर इलाहाबाद, मिर्जापुर विंध्याचल मार्ग, अकोढ़ी बबुरा, चील्ह गोपीगंज मार्ग, चील्ह रामपुर, चील्ह कंपनीघाट मार्ग, समेत चुनार, कैलहट, सीखड़, कछवां के अलावा हलिया कोटाघाट मार्ग पानी उूब जाने के कारण तीन दिनों तक आवागमन पूरी ठप रहा। पानी कम होन के बाद इन मार्गो पर आवागमन शुरू हो गया है। वहीं एक हप्तों से गांवों की बिजली भी आ गई।
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हालांकि बाढ़ का पानी अपने साथ लगाया कीचड़ मलबा भी छोड़ गया है, जिसमें सड़न से बीमारियों के फैलने की आशंका है।
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बता दें कि 16 अगस्त से लगातार बढ़ रही गंगा एक सप्ताह तक जिले के आधा दर्जन ब्लाकों में तबाही मचाने के बाद शनिवार को पहली बार खतरे के निशान से नीचे बही। तीन सेंटीमीटर की दर से घट रहे गंगा के जलस्तर की जानकारी होते ही आलाधिकारियों ने राहत की संास ली। सबसे बड़ी राहत बाढ़ प्रभावित लोगों को हुआ जो अपना घरबार छोड़कर शिविर में जीवन बिताने के लिए मजबूर है। बता दें कि गंगा का जलस्तर बढ़ने से जनपद के छानबे, कोन, सिटी, मझवां, पहाड़ी, सीखड़ तथा नरायपुर व जमालपुर ब्लाक के लोगों को काफी परेशानी उठाना पड़ा। गांवों में पानी घुसने से लोग अपना घरबार छोड़कर परिवार के साथ शिविर तथा रिश्तेदोरों के यहां रहने चले गए।
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यहीं नहीं मिर्जापुर औराई मार्ग, मिर्जापुर इलाहाबाद, मिर्जापुर विंध्याचल मार्ग, अकोढ़ी बबुरा, चील्ह गोपीगंज मार्ग, चील्ह रामपुर, चील्ह कंपनीघाट मार्ग, समेत चुनार, कैलहट, सीखड़, कछवां के अलावा हलिया कोटाघाट मार्ग पानी उूब जाने के कारण तीन दिनों तक आवागमन पूरी ठप रहा। पानी कम होन के बाद इन मार्गो पर आवागमन शुरू हो गया है। वहीं एक हप्तों से गांवों की बिजली भी आ गई।
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हालांकि बाढ़ का पानी अपने साथ लगाया कीचड़ मलबा भी छोड़ गया है, जिसमें सड़न से बीमारियों के फैलने की आशंका है।