मिर्जापुर। गंगा समेत नदियों का जल स्तर धीरे-धीरे बढ़ाव पर हैं। बढ़ते पानी को लेकर गंगा के उत्तरी इलाके के तटवर्ती गांवों के किसानो के माथे पर चिंता की लकीरें खींच रही हैं। सावन मास बीतने के बाद जब गंगा का पानी न बढ़ा तो किसानों ने राहत की सांस ली। इधर चौबिस घंटे में 63 सेंटीमीटर पानी बढ़ने से पसोपेश में पड़ गए।बाढ़ कंट्रोल रुम के मुताबिक बुधवार को सुबह आठ बजे तक 66.107 सेंटीमीटर गंगा में पानी रहा जो वृहस्पतिवार को 66.170 सेंटीमीटर तक पहुंच गया। नगर के बाबा घाट, बरियाघाट व अन्य घाटों की कई सीढ़ियां पानी में डूब गए। गंगा बढ़ते पानी को लेकर लोगों के माथे पर बाढ़ की चिंताएं बढ़ गई। कोन विकास खंड कोन के गंगा के तटवर्ती गांव सेमरा, खुलवा, धौरहरा, हरसिंहपुर ,मल्लेपुर, जगदीशपुर, मवैया, लखनपुर, मझिगवां ,पुराने वाडा, चील्ह, मलाधरपुर, भटेवरा, डिगुर पट्टी, कमासिन, कोल्हुआ, रामपुर, चेक सारी, भोगांव,गहिया, मुजेहरा कला गांव में बाढ़ की आशंका को देखते हुए ग्रामीण भयभीत हैं। गंगा का पानी अभी गंगा की तलहटी में ही है। लेकिन गंगा के बढ़ने से किसान और तटवर्ती निवासी सहमे हुए हैं। गंगा की तराई में होने वाली खेती नेनुआ, कोहड़ा, भिंडी,लौकी, परवल, करैला के भारी मात्रा में बर्बाद होने का खतरा बना हुआ है। चील्ह गांव निवासी धर्मराज का कहना है बाढ़ के समय में हम लोगों की चिंता बढ़ जाती है। पानी घरों में घुस जाते हैं जिससे भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। शनी यादव का कहना है कि अन्य जगह पर बाढ़ आई जिससे हमलोग भी भयग्रस्त है। बिल्लू ने बताया कि हम लोगों की ओर से ज्यादातर सब्जी की खेती किया गया है। यदि बाढ़ आई तो सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। जगदप यादव ने कहा कि अभी गंगा काफी नीचे है लेकिन उनके बढ़ने का समय हो गया है। यदि बाढ़ आई तो तटवर्ती इलाके को परेशानी झेलनी पड़ेगी।