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Mirzapur News: ऑक्सीजन प्लांट पांच और चालू सिर्फ दो
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मिर्जापुर। देश में कोरोना के नए मामले सामने आने लगे हैं। सरकार की तरफ से सर्विलांस एक्टिव करने के लिए अलर्ट जारी किया गया है। कोविड में मरीजाें को ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है। जिले में मेडिकल सुविधाएं बढ़ी हैं। ऑक्सीजन के पांच प्लांट लग चुके हैं, परंतु वर्तमान में सिर्फ दो ऑक्सीजन प्लांट ही चल रहे हैं। इसमें भी एक आए दिन खराब रहता है तो दूसरे को शिफ्ट किया जाना है।
इसके अलावा तीसरे प्लांट के लिए पाइपलाइन बिछाई जानी है। कमोवेश यही स्थिति वेंटिलेटर की भी है। स्वास्थ्य महकमे के लोगों का कहना है कि पर्याप्त संख्या में वेंटिलेटर उपलब्ध है। परंतु पूर्व में कोविड पर नियंत्रण के बाद रखे गए वेंटिलेटर को प्रयोग करने का बाद ही पता चल सकेगा कि उनमें से कितने क्रियाशील हैं। कोविड का नया वैरिएंट केरल आदि राज्यों में मिला है। केंद्र ने राज्यों को सख्ती बढ़ाने का भी निर्देश दिया है। पूर्व में जब कोविड की दूसरी लहर में मरीजों को ऑक्सीजन की समस्या झेलनी पड़ी थी और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी थी तो उस दौरान से अब तक जिले में पांच ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा चुके हैं। इसके साथ ही 12 बड़े और 54 छोटे वेंटिलेटर अस्पताल में मरीजों के लिए उपलब्ध कराए गए।
उधर, फरवरी माह में तो कोविड का टीकाकरण भी बंद कर दिया गया। लेकिन अब जबकि फिर से देश में कोविड के नए मरीज मिलने लगे हैं, ऐसे में आने वाले समय में अस्पताल में उपचार की व्यवस्था सुदृढ़ किया जाना जरूरी है। कोविड संक्रमण के बाद सबसे पहले 300 एलपीएम क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया। इसके बाद 250 एलपीएम, 900 एलपीएम क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट मंडलीय अस्पताल में लगाया गया।
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इसके बाद विंध्याचल सीएचसी में भी 250 एलपीएम क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया। हाल ही में मंडलीय अस्पताल में 20 हजार लीटर क्षमता का लिक्विड ऑक्सीजन का प्लांट का कार्य पूरा हुआ है। कहने के लिए तो पांच ऑक्सीजन प्लांट हैं, परंतु वर्तमान में सिर्फ दो ऑक्सीजन प्लांट ही क्रियाशील हैं। इसमें एक विंध्याचल और दूसरा मंडलीय अस्पताल में 300 एलपीएम क्षमता का प्लांट क्रियाशील है। जिला महिला अस्पताल में लगा 900 एलपीएम क्षमता का प्लांट बंद है। उसे मंडलीय अस्पताल में शिफ्ट किया जाना है। मंडलीय अस्पताल में 250 एलपीएम क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट, जिससे इमरजेंसी वार्ड में पाइपलाइन से सप्लाई की जाती है, वह आए दिन खराब रहता है। यह प्लांट इस समय खराब है। इमरजेंसी में सिलिंडर से ऑक्सीजन की सप्लाई की जाती है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.आरबी कमल का कहना है कि 20 हजार लीटर क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट बनकर तैयार है। पाइपलाइन का कार्य किया जाना है। इसके अलावा 900 एलपीएम क्षमता का प्लांट शिफ्ट किया जाना है। इसके लिए बजट मिल गया है। इसके अलावा 250 एलपीएम क्षमता के प्लांट में शुद्ध ऑक्सीजन की समस्या है। उस पर काम चल रहा है। इसके अलावा 300 एलपीएम क्षमता के प्लांट से वार्डों में ऑक्सीजन की सप्लाई हो रही है। सभी वेंटिलेटर क्रियाशील हैं। अभी कोविड को लेकर कोई गाइड लाइन नहीं आई है।
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इसके अलावा तीसरे प्लांट के लिए पाइपलाइन बिछाई जानी है। कमोवेश यही स्थिति वेंटिलेटर की भी है। स्वास्थ्य महकमे के लोगों का कहना है कि पर्याप्त संख्या में वेंटिलेटर उपलब्ध है। परंतु पूर्व में कोविड पर नियंत्रण के बाद रखे गए वेंटिलेटर को प्रयोग करने का बाद ही पता चल सकेगा कि उनमें से कितने क्रियाशील हैं। कोविड का नया वैरिएंट केरल आदि राज्यों में मिला है। केंद्र ने राज्यों को सख्ती बढ़ाने का भी निर्देश दिया है। पूर्व में जब कोविड की दूसरी लहर में मरीजों को ऑक्सीजन की समस्या झेलनी पड़ी थी और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी थी तो उस दौरान से अब तक जिले में पांच ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा चुके हैं। इसके साथ ही 12 बड़े और 54 छोटे वेंटिलेटर अस्पताल में मरीजों के लिए उपलब्ध कराए गए।
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उधर, फरवरी माह में तो कोविड का टीकाकरण भी बंद कर दिया गया। लेकिन अब जबकि फिर से देश में कोविड के नए मरीज मिलने लगे हैं, ऐसे में आने वाले समय में अस्पताल में उपचार की व्यवस्था सुदृढ़ किया जाना जरूरी है। कोविड संक्रमण के बाद सबसे पहले 300 एलपीएम क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया। इसके बाद 250 एलपीएम, 900 एलपीएम क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट मंडलीय अस्पताल में लगाया गया।
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इसके बाद विंध्याचल सीएचसी में भी 250 एलपीएम क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया। हाल ही में मंडलीय अस्पताल में 20 हजार लीटर क्षमता का लिक्विड ऑक्सीजन का प्लांट का कार्य पूरा हुआ है। कहने के लिए तो पांच ऑक्सीजन प्लांट हैं, परंतु वर्तमान में सिर्फ दो ऑक्सीजन प्लांट ही क्रियाशील हैं। इसमें एक विंध्याचल और दूसरा मंडलीय अस्पताल में 300 एलपीएम क्षमता का प्लांट क्रियाशील है। जिला महिला अस्पताल में लगा 900 एलपीएम क्षमता का प्लांट बंद है। उसे मंडलीय अस्पताल में शिफ्ट किया जाना है। मंडलीय अस्पताल में 250 एलपीएम क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट, जिससे इमरजेंसी वार्ड में पाइपलाइन से सप्लाई की जाती है, वह आए दिन खराब रहता है। यह प्लांट इस समय खराब है। इमरजेंसी में सिलिंडर से ऑक्सीजन की सप्लाई की जाती है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.आरबी कमल का कहना है कि 20 हजार लीटर क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट बनकर तैयार है। पाइपलाइन का कार्य किया जाना है। इसके अलावा 900 एलपीएम क्षमता का प्लांट शिफ्ट किया जाना है। इसके लिए बजट मिल गया है। इसके अलावा 250 एलपीएम क्षमता के प्लांट में शुद्ध ऑक्सीजन की समस्या है। उस पर काम चल रहा है। इसके अलावा 300 एलपीएम क्षमता के प्लांट से वार्डों में ऑक्सीजन की सप्लाई हो रही है। सभी वेंटिलेटर क्रियाशील हैं। अभी कोविड को लेकर कोई गाइड लाइन नहीं आई है।