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जल रहे कूड़े से पर्यावरण हो रहा प्रदूषित
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नगर के कई क्षेत्रों में इन दिनों कूड़े को जला दिया जा रहा है। इससे वातावरण प्रदूषित हो रहा है।
नगर के बथुआ स्थित गांधीघाट व फतहां में कूड़ा डंप किया जा रहा है। इसी प्रकार की स्थिति बरौंधा कचार व अन्य जगहों की है। कूड़े को निस्तारित न कर उसे जला दिया जा रहा है। यह पहली बार नहीं है कि इस प्रकार कूड़े का निस्तारण किया जा रहा हो। इसके पहले भी कई बार कतिपय कर्मचारी कूड़े को जला देेते थे। जिसका नागरिकों ने विरोध किया था। जहां कूड़ा जलाया जा रहा था वहां पर लोगों को सांस लेने में परेशानी शुरू हो गई थी। विरोध करने पर कूड़े को जलाना बंद कर दिया गया। लेकिन आजकल फिर से कर्मचारी क़ूड़े को जलाने लगे हैं। इस समय कोविड का खतरा है। इसमें मुख्य रूप से सांस व फेफड़े की ही समस्या होती है। यदि इसको नियंत्रित नहीं किया गया तो यह खतरनाक रूप ले सकता है। सबसे खतरे की बात यह है कि इन कूड़ों में प्लास्टिक भी शामिल हैं जिससे विषैली गैस तीव्र गति से निकलती हैं।
कूड़े के निस्तारण की नहीं है कोई व्यवस्था
नगर पालिका क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। दशकों पहले सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का निर्माण शुरू कराया गया था। साढ़े 11 करोड़ की यह परियोजना कंपनियों की आपसी लड़ाई में फंस गई। मामला न्यायालय तक पहुंच गया और अब यह प्लांट लंबित है। इस पर अब तक साढ़ छह करोड़ रुपये खर्च भी हो चुके हैं लेकिन जो मशीनें लगाई गई थीं वह अब जंग खा रही हैं। इससे नगर क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण अब भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है। कूड़े को इकट्ठा करने के लिए नगर में डंपिंग जोन भी बनाए गए थे। इनमें से तीन डंपिंग जोन, बरियाघाट, टीबी अस्पताल तिराहा व मुसफ्फरगंज को हटा दिया गया। इससे भी समस्या कुछ बढ़ी है।
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नगर के बथुआ स्थित गांधीघाट व फतहां में कूड़ा डंप किया जा रहा है। इसी प्रकार की स्थिति बरौंधा कचार व अन्य जगहों की है। कूड़े को निस्तारित न कर उसे जला दिया जा रहा है। यह पहली बार नहीं है कि इस प्रकार कूड़े का निस्तारण किया जा रहा हो। इसके पहले भी कई बार कतिपय कर्मचारी कूड़े को जला देेते थे। जिसका नागरिकों ने विरोध किया था। जहां कूड़ा जलाया जा रहा था वहां पर लोगों को सांस लेने में परेशानी शुरू हो गई थी। विरोध करने पर कूड़े को जलाना बंद कर दिया गया। लेकिन आजकल फिर से कर्मचारी क़ूड़े को जलाने लगे हैं। इस समय कोविड का खतरा है। इसमें मुख्य रूप से सांस व फेफड़े की ही समस्या होती है। यदि इसको नियंत्रित नहीं किया गया तो यह खतरनाक रूप ले सकता है। सबसे खतरे की बात यह है कि इन कूड़ों में प्लास्टिक भी शामिल हैं जिससे विषैली गैस तीव्र गति से निकलती हैं।
कूड़े के निस्तारण की नहीं है कोई व्यवस्था
नगर पालिका क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। दशकों पहले सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का निर्माण शुरू कराया गया था। साढ़े 11 करोड़ की यह परियोजना कंपनियों की आपसी लड़ाई में फंस गई। मामला न्यायालय तक पहुंच गया और अब यह प्लांट लंबित है। इस पर अब तक साढ़ छह करोड़ रुपये खर्च भी हो चुके हैं लेकिन जो मशीनें लगाई गई थीं वह अब जंग खा रही हैं। इससे नगर क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण अब भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है। कूड़े को इकट्ठा करने के लिए नगर में डंपिंग जोन भी बनाए गए थे। इनमें से तीन डंपिंग जोन, बरियाघाट, टीबी अस्पताल तिराहा व मुसफ्फरगंज को हटा दिया गया। इससे भी समस्या कुछ बढ़ी है।
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