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Mirzapur News: अवसाद के चलते चिकित्सक ने परिवार के साथ दी जान
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अहरौरा। डॉक्टर्स और इंजीनियर का आर्थिक रूप से संपन्न व शिक्षित परिवार अवसाद के चलते निराशा का शिकार हो गया। मरीजों का इलाज कर आंखों को रोशनी देने वाले चिकित्सक पर अवसाद के चलते निराशा हावी हो गई। इलाज के बावजूद चिकित्सक अपने को नहीं संभाल सके। नेत्र चिकित्सक ने पत्नी और बच्चों के साथ मौत को गले लगा लिया। मामला अहरौरा के फरहदा गांव निवासी नेत्र चिकित्सक डाॅ. अरुण कुमार का है। उन्होंने रायबरेली स्थित आरेडिका के सरकारी आवास में सोमवार को फंदे से लटक कर जान दे दी।
जिले के अहरौरा थाना क्षेत्र के फरहदा निवासी कैलाश नाथ ने एनसीएल में अपनी सेवा के दौरान तीन बेटों की परवरिश की। इनके बड़े पुत्र नेत्र चिकित्सक डॉ. अरुण कुमार आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना (आरेडिका) रायबरेली में नियुक्ति के बाद कार्यरत थे। मध्य प्रदेश के जयंत स्थित एनसीएल कॉलेज में शिक्षा ग्रहण करने के बाद लगभग डेढ़ दशक पूर्व उनकी शादी मिर्जापुर के बरकछा निवासी अर्चना के साथ हुई। बड़ी बेटी अदीवा (12) व छोटा बेटा आरव (4) के साथ वे रह रहे थे। परिजनों का कहना है कि कुछ वर्ष पहले पारिवारिक विसंगतियों के चलते डॉ. अरुण कुमार अवसादग्रस्त हो गए। इस हालात से उबरने के लिए उन्होंने अपना इलाज कराना मुनासिब समझा। वर्षों तक इलाज चलता रहा। अंततः निराशा हावी हो गई और सोमवार को पत्नी और बच्चों के साथ उन्होंने अपनी इहलीला समाप्त कर ली। पुलिस परिजनों का बयान लेकर घटना की जांच कर रही है। मौत के स्पष्ट कारण का अब तक पता नहीं चल सका है। मौत की जानकारी मिलने पर परिजन स्तब्ध हैं। पिता कैलाश नाथ तथा मां कलावती के अलावा परिवार के अन्य सदस्याें का रो-रोकर बुरा हाल है। फरहदा गांव में मातम छाया है। शोक संतप्त परिवार को ढाढ़स बंधाने के लिए ग्रामीण पहुंच रहे हैं। चाचा उमानाथ ने बताया कि वे लोग घटनास्थल पर जा रहे हैं। मौत की वजह आर्थिक परेशानी नहीं हो सकती है। घटना की जांच होनी चाहिए।
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जिले के अहरौरा थाना क्षेत्र के फरहदा निवासी कैलाश नाथ ने एनसीएल में अपनी सेवा के दौरान तीन बेटों की परवरिश की। इनके बड़े पुत्र नेत्र चिकित्सक डॉ. अरुण कुमार आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना (आरेडिका) रायबरेली में नियुक्ति के बाद कार्यरत थे। मध्य प्रदेश के जयंत स्थित एनसीएल कॉलेज में शिक्षा ग्रहण करने के बाद लगभग डेढ़ दशक पूर्व उनकी शादी मिर्जापुर के बरकछा निवासी अर्चना के साथ हुई। बड़ी बेटी अदीवा (12) व छोटा बेटा आरव (4) के साथ वे रह रहे थे। परिजनों का कहना है कि कुछ वर्ष पहले पारिवारिक विसंगतियों के चलते डॉ. अरुण कुमार अवसादग्रस्त हो गए। इस हालात से उबरने के लिए उन्होंने अपना इलाज कराना मुनासिब समझा। वर्षों तक इलाज चलता रहा। अंततः निराशा हावी हो गई और सोमवार को पत्नी और बच्चों के साथ उन्होंने अपनी इहलीला समाप्त कर ली। पुलिस परिजनों का बयान लेकर घटना की जांच कर रही है। मौत के स्पष्ट कारण का अब तक पता नहीं चल सका है। मौत की जानकारी मिलने पर परिजन स्तब्ध हैं। पिता कैलाश नाथ तथा मां कलावती के अलावा परिवार के अन्य सदस्याें का रो-रोकर बुरा हाल है। फरहदा गांव में मातम छाया है। शोक संतप्त परिवार को ढाढ़स बंधाने के लिए ग्रामीण पहुंच रहे हैं। चाचा उमानाथ ने बताया कि वे लोग घटनास्थल पर जा रहे हैं। मौत की वजह आर्थिक परेशानी नहीं हो सकती है। घटना की जांच होनी चाहिए।
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