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हलिया विकास खंड में लहलहाएंगे ड्रैगन फ्रूट के पौधे
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हलिया विकास खंड में श्याम प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन के तहत उद्यान विभाग की ओर से एक दर्जन गांवों में ड्रैगन फ्रूट का पौधरोपण कराया जा रहा है। मंगलवार को जिला कृषि अधिकारी ने पौधरोपण कार्यों का निरीक्षण कर जायजा लिया।
श्याम प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन के तहत उद्यान विभाग की ओर हलिया क्लस्टर में चयनित बसुहरा, बरी, मवई, कोटार, चक कोटार, हथेड़ा, अहुंगीकला, पुरवा अवसान सिंह, भटवारी व देवघटा पांडेय गांव पहुंचे जिला कृषि अधिकारी पवन कुमार प्रजापति ने पौधरोपण कार्य में लगे किसानों से पूछताछ की। जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम ने बताया कि योजना के तहत चयनित गांवों के किसानों को न्यूनतम 11 व अधिकतम 45 कंप्लीट पिलर दिए जा रहे हैं। जिसमें एक कंक्रीट पोल, चार ड्रैगन फ्रूट पौधे, एक लोहे की रिंग, एक पुराना टायर तथा वर्मी कंपोस्ट आदि दिए जा रहे हैं। जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि कुल लागत का 85 प्रतिशत रूर्बन मिशन के तहत तथा 15 प्रतिशत किसान स्वयं खर्च वहन करेंगे। उन्होंने बताया इस योजना का लाभ चयनित गांवों के सभी किसान प्राप्त कर सकते हैं। जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि योजना में अनुसूचित जाति, जनजाति व महिला किसानों को वरीयता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि एक पिलर में लगे पौधे से लगभग 18 माह बाद फल आने शुरू हो जाते हैं। एक पिलर से छह से सात किलोग्राम फल प्राप्त होंगे। एक बार तैयार ड्रैगन फ्रूट पौधे 25 वर्षों तक बरकरार रहेंगे। प्रत्येक वर्ष उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ती रहेगी। जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट के फल शारीरिक विकारों को दूर करने में मदद करते हैं। ड्रैगन फ्रूट किसी बीमारी को जड़ से खत्म तो नहीं करते हैं, लेकिन विभिन्न लक्षणों को कम कर आराम जरूर दिला सकते हैं। उन्होंने बताया कि डायबिटीज, हृदय रोग, कैंसर, कोलस्ट्राल के नियंत्रण के लिए, पेट, श्वांस रोग, गठिया, हड्डियों और दांत संबंधी समस्याओं में इसका उपयोग कारगर होता है। ड्रैगन फ्रूट विभिन्न तरीकों से प्रयोग में लाए जा सकते हैं। इसे सीधे काटकर भी खाया जा सकता है। फ्रूट चाट या सलाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। मुरब्बा, कैंडी, जेली या शेक बनाकर भी लोग इसका उपयोग कर सकते हैं।
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श्याम प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन के तहत उद्यान विभाग की ओर हलिया क्लस्टर में चयनित बसुहरा, बरी, मवई, कोटार, चक कोटार, हथेड़ा, अहुंगीकला, पुरवा अवसान सिंह, भटवारी व देवघटा पांडेय गांव पहुंचे जिला कृषि अधिकारी पवन कुमार प्रजापति ने पौधरोपण कार्य में लगे किसानों से पूछताछ की। जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम ने बताया कि योजना के तहत चयनित गांवों के किसानों को न्यूनतम 11 व अधिकतम 45 कंप्लीट पिलर दिए जा रहे हैं। जिसमें एक कंक्रीट पोल, चार ड्रैगन फ्रूट पौधे, एक लोहे की रिंग, एक पुराना टायर तथा वर्मी कंपोस्ट आदि दिए जा रहे हैं। जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि कुल लागत का 85 प्रतिशत रूर्बन मिशन के तहत तथा 15 प्रतिशत किसान स्वयं खर्च वहन करेंगे। उन्होंने बताया इस योजना का लाभ चयनित गांवों के सभी किसान प्राप्त कर सकते हैं। जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि योजना में अनुसूचित जाति, जनजाति व महिला किसानों को वरीयता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि एक पिलर में लगे पौधे से लगभग 18 माह बाद फल आने शुरू हो जाते हैं। एक पिलर से छह से सात किलोग्राम फल प्राप्त होंगे। एक बार तैयार ड्रैगन फ्रूट पौधे 25 वर्षों तक बरकरार रहेंगे। प्रत्येक वर्ष उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ती रहेगी। जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट के फल शारीरिक विकारों को दूर करने में मदद करते हैं। ड्रैगन फ्रूट किसी बीमारी को जड़ से खत्म तो नहीं करते हैं, लेकिन विभिन्न लक्षणों को कम कर आराम जरूर दिला सकते हैं। उन्होंने बताया कि डायबिटीज, हृदय रोग, कैंसर, कोलस्ट्राल के नियंत्रण के लिए, पेट, श्वांस रोग, गठिया, हड्डियों और दांत संबंधी समस्याओं में इसका उपयोग कारगर होता है। ड्रैगन फ्रूट विभिन्न तरीकों से प्रयोग में लाए जा सकते हैं। इसे सीधे काटकर भी खाया जा सकता है। फ्रूट चाट या सलाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। मुरब्बा, कैंडी, जेली या शेक बनाकर भी लोग इसका उपयोग कर सकते हैं।
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