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Mirzapur News: सरसों की बोअाई में न करें जल्दबाजी, तापमान अनुकूल होने का करें इंतजार
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पिछले दिनों हुई बारिश के बाद पूर्वांचल में बड़ी संख्या में किसान खाली खेतों में सरसों की बोअाई की तैयारी में जुट गए हैं। कई किसान बीज भंडारों से बीज भी खरीद रहे हैं।
हालांकि, कृषि वैज्ञानिकों ने अभी बुवाई में जल्दबाजी न करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि मौजूदा तापमान सरसों के अच्छे जमाव और पौधों के विकास के लिए अनुकूल नहीं है। तापमान अनुकूल होने पर बुवाई करने से बेहतर उत्पादन मिल सकता है।
बीएचयू के बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर कृषि विज्ञान केंद्र के प्रो. श्रीराम सिंह ने बताया कि सरसों की अच्छी फसल के लिए बुवाई के समय तापमान का अनुकूल होना जरूरी है। इसके लिए अधिकतम तापमान करीब 25 और न्यूनतम 15 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। मृदा का तापमान करीब 28 डिग्री सेल्सियस उचित माना जाता है।
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सामान्य तौर पर अक्टूबर के मध्य से नवंबर के प्रथम पखवाड़े के बीच सरसों की बोअाई के लिए तापमान अनुकूल होने की संभावना रहती है। उन्होंने बताया कि सरसों की खेती के लिए उचित जल निकासी वाली बलुई दोमट या दोमट मिट्टी बेहतर होती है। मिट्टी का पीएच मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए। बीज के अच्छे जमाव के लिए खेत में पर्याप्त नमी भी जरूरी है। इसलिए किसान बारिश के बाद खेत की नमी और तापमान की स्थिति देखकर ही बुवाई करें।
दलहनी-तिलहनी फसलों से बढ़ेगी आमदनी : कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को तिलहनी और दलहनी फसलों की खेती पर भी ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इन फसलों को नकदी फसल के रूप में अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ देश में दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं।
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हालांकि, कृषि वैज्ञानिकों ने अभी बुवाई में जल्दबाजी न करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि मौजूदा तापमान सरसों के अच्छे जमाव और पौधों के विकास के लिए अनुकूल नहीं है। तापमान अनुकूल होने पर बुवाई करने से बेहतर उत्पादन मिल सकता है।
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बीएचयू के बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर कृषि विज्ञान केंद्र के प्रो. श्रीराम सिंह ने बताया कि सरसों की अच्छी फसल के लिए बुवाई के समय तापमान का अनुकूल होना जरूरी है। इसके लिए अधिकतम तापमान करीब 25 और न्यूनतम 15 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। मृदा का तापमान करीब 28 डिग्री सेल्सियस उचित माना जाता है।
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सामान्य तौर पर अक्टूबर के मध्य से नवंबर के प्रथम पखवाड़े के बीच सरसों की बोअाई के लिए तापमान अनुकूल होने की संभावना रहती है। उन्होंने बताया कि सरसों की खेती के लिए उचित जल निकासी वाली बलुई दोमट या दोमट मिट्टी बेहतर होती है। मिट्टी का पीएच मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए। बीज के अच्छे जमाव के लिए खेत में पर्याप्त नमी भी जरूरी है। इसलिए किसान बारिश के बाद खेत की नमी और तापमान की स्थिति देखकर ही बुवाई करें।
दलहनी-तिलहनी फसलों से बढ़ेगी आमदनी : कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को तिलहनी और दलहनी फसलों की खेती पर भी ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इन फसलों को नकदी फसल के रूप में अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ देश में दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं।