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फसलों के अवशेष खेतों में न जलाएं, फैलता है प्रदूषण

Sun, 31 Oct 2021 01:00 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 31 Oct 2021 01:00 AM IST
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Do not burn crop residues in the fields, pollution spreads
फसल अवशेष प्रबंधन योजनान्तर्गत खेतो में पराली न जलाने व जागरुकता के लिए जिलाधिकारी ने शनिवार को कलेक्ट्रेट परिसर से प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर विकास खंडवार न्याय पंचायतो के लिए रवाना किया।
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प्रचार वाहन विकास खंड पटेहरा के न्याय पंचायत पटेहरा खुर्द, बहुती, पथरौल, रामपुर अतरी में व हलिया के न्याय पंचायत बरौधा, हलिया, बबुरा कलां, खुटहां, मतवार, विकास खंड सीखड़ के न्याय पंचायत मेड़िया, धनैता, हांसीपुर में, विकास खंड लालगंज के रजई, कटाई, दुबार कला, पचोखर, विकास खंड-राजगढ़ के देवपुरा, धौरहा, तेन्दुआ कला, सरिया, राजगढ़, पहाड़ी विकास खंड में पहाड़ी, भोजपुर, कठिनई, नेवढ़िया व दांती न्याय पंचायत में, विकास खंड सीटी के अमोई, दुबरा पहाड़ी, बेदौली, बरकछा कला, राजपुर, विकास खंड- नरायनपुर के बघई, धौरहां, अघवार, शेरपुर, विकास खंड कोन के बल्लीपरवा, मुजेहरा, चील्ह, हुसैनीपुर के न्याय पंचायत में तथा विकास खंड जमालपुर के ओड़ी, मदारपुर, बहुआर, रोशनहर, विकास खंड- मझवा के गोधना, जमुआ, जलालपुर, महामलपुर, विकास खंड छानबे में गैपुरा, विजयपुर, कुशहां, नराईया, खैरा, हरगढ़ के न्याय पंचायत में प्रचार प्रसार किया जाएगा। जिलाधिकारी ने किसानों से अनुरोध करते हुए किसानों से कहा धान फसल के अवशेषों को खेतों में न जलायें। खेतो मेंजलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है। जिससे श्वांस संबंधी तमाम बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। डीएम ने कहा इससे हमारे जलवायु के ऊपर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जिलाधिकारी ने बताया फसल अवशेष जलाने वाले दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण आदेश के क्रम में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के लिए अर्थदंड की व्यवस्था की गयी है। जो इस प्रकार है। दो एकड़ से कम खेत होने की दशा में 2500 प्रति घटना। दो एकड़ से अधिक किंतु पांच एकड़ तक खेत होने की दशा में अर्थदंड के रुप में 5000 प्रति घटना व पांच एकड़ से अधिक खेत में फसलों के अवशेष जलाने पर 15 हजार रुपये अर्थदंड का प्रावधान किया गया है ।उपकृषि निदेशक डा अशोक उपाध्याय ने कहा खेतो में पराली जलाने से खेत में पाए जाने वाले सभी प्रकार के मित्र कीट मर जाने से खेत की उर्वरा शक्ति क्षीण हो जाती है। तथा मिट्टी की कार्बन भी जलकर नष्ट हो जाने से उस भूमि में कोई भी फसल उगाना एवं उत्पादन करना संभव नहीं होता है। उन्होने अवशेष फसलों को खेतों में जलाने की जगह सड़ा गला कर जैविक खाद के रूप में प्रयोग करने की सलाह दी।
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