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Mirzapur News: कछुआ सेंचुरी में अवैध खनन पर डीएम सख्त, आठ से 16 गुना बढ़ी जुर्माना राशि
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जिले में करीब 30 किमी का दायरा कछुआ अभयारण्य घोषित है। इसमें प्रयागराज और मिर्जापुर का भी कुछ हिस्सा है। भदोही के घाटों पर बालू खनन पर 2023 से रोक है। इसके बावजूद करीब आठ से नौ घाटों पर रात में अवैध तरीके से बालू का खनन हो रहा है। खनन रोकने के लिए डीएम शैलेष कुमार ने जुर्माना राशि आठ से 16 गुना तक बढ़ा दी है। अब बालू खनन में पकड़े जाने पर 26 से 27 हजार के बजाय दो से चार लाख तक जुर्माना देना होगा।
भारतीय वन्यजीव संस्थान ने मार्च 2021 में सर्वेक्षण कराया था। इसमें भदोही के अरई करवधिया से बारीपुर और प्रयागराज के मेजा स्थित कोठरी गांव तक गंगा में 30 किमी क्षेत्र को कछुआ सेंचुरी घोषित किया है। इसमें छह-छह किमी मिर्जापुर-भदोही और 18 किमी प्रयागराज की सीमा में शामिल है। पहले ईको सेंसेटिव जोन का दायरा एक किमी था। इससे जिले के पुरवा, इब्राहिमपुर गंगा घाट पर बालू खनन होता था, लेकिन 2023 में दायरा 10 किमी कर दिया गया है। इसके चलते इन गांवों में खनन पर रोक लगा दी गई। प्रशासन की सख्ती के बाद भी गंगा से सटे इब्राहिमपुर, पुरवां, बेरासपुर, बिहरोजपुर, सेमराध, दानीपट्टी, रामपुर, गुलौरी और जहांगीराबाद में रात में अवैध तरीके से बालू का खनन चल रहा था। खनन अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी ने जुर्माना राशि को दो से चार लाख किया है। अब खनन में वाहन पकड़ने पर मालिक से नई जुर्माना राशि वसूल की जाएगी।
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कछुआ सेंक्चुरी के लाभ
प्रभागीय वनाधिकारी विवेक कुमार यादव ने बताया कि भारत में कछुओं की 29 प्रजातियां पाई जाती हैं। जिनमें 14 सिर्फ गंगा में मिलती हैं। गंगा की सफाई में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कछुआ सेंचुरी से जैव विविधता बरकरार रहती है। गंगा का जल निर्मल रहता। गंगा की निर्मलता को बनाए रखने के लिए कछुआ सेंचुरी जरूरी है।-- -- -- -- -- -- -
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वर्जन
कछुआ सेंचुरी में खनन पर पूरी तरह रोक है। गंगा से सटे आठ से नौ गांवों से रात के समय अवैध खनन की शिकायतें आ रही थीं। जुर्माना कम होने से इस पर रोक नहीं लग पा रही थी। अब दो से चार लाख का जुर्माना लगेगा। विधिक कार्रवाई भी की जाएगी।-शैलेष कुमार, डीएम भदोही
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भारतीय वन्यजीव संस्थान ने मार्च 2021 में सर्वेक्षण कराया था। इसमें भदोही के अरई करवधिया से बारीपुर और प्रयागराज के मेजा स्थित कोठरी गांव तक गंगा में 30 किमी क्षेत्र को कछुआ सेंचुरी घोषित किया है। इसमें छह-छह किमी मिर्जापुर-भदोही और 18 किमी प्रयागराज की सीमा में शामिल है। पहले ईको सेंसेटिव जोन का दायरा एक किमी था। इससे जिले के पुरवा, इब्राहिमपुर गंगा घाट पर बालू खनन होता था, लेकिन 2023 में दायरा 10 किमी कर दिया गया है। इसके चलते इन गांवों में खनन पर रोक लगा दी गई। प्रशासन की सख्ती के बाद भी गंगा से सटे इब्राहिमपुर, पुरवां, बेरासपुर, बिहरोजपुर, सेमराध, दानीपट्टी, रामपुर, गुलौरी और जहांगीराबाद में रात में अवैध तरीके से बालू का खनन चल रहा था। खनन अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी ने जुर्माना राशि को दो से चार लाख किया है। अब खनन में वाहन पकड़ने पर मालिक से नई जुर्माना राशि वसूल की जाएगी।
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कछुआ सेंक्चुरी के लाभ
प्रभागीय वनाधिकारी विवेक कुमार यादव ने बताया कि भारत में कछुओं की 29 प्रजातियां पाई जाती हैं। जिनमें 14 सिर्फ गंगा में मिलती हैं। गंगा की सफाई में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कछुआ सेंचुरी से जैव विविधता बरकरार रहती है। गंगा का जल निर्मल रहता। गंगा की निर्मलता को बनाए रखने के लिए कछुआ सेंचुरी जरूरी है।
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कछुआ सेंचुरी में खनन पर पूरी तरह रोक है। गंगा से सटे आठ से नौ गांवों से रात के समय अवैध खनन की शिकायतें आ रही थीं। जुर्माना कम होने से इस पर रोक नहीं लग पा रही थी। अब दो से चार लाख का जुर्माना लगेगा। विधिक कार्रवाई भी की जाएगी।-शैलेष कुमार, डीएम भदोही