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तालाब की जमीन पर बने मकानों को कोर्ट के आदेश पर ढहाया

Wed, 08 Jul 2020 10:33 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jul 2020 10:33 PM IST
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demolished house built on the pond land
पड़री के पट्टी गांव में तालाब के जमीन पर बनाये गए मकान को गिराता जेसीबी मशीन। - फोटो : MIRZAPUR
पड़री। थाना क्षेत्र के चौहान पट्टी गांव में बुधवार को तालाब की जमीन पर बने 18 मकानों को गिराया गया। कोर्ट के आदेश पर जैसे ही जिला प्रशासन की टीम पहुंची। जेसीबी व फोर्स को देखते ही लोगों में हड़कंप मच गया। एसडीएम सदर गौरव श्रीवास्तव के नेतृत्व में पहुंची छह थाने की पुलिस तथा राजस्व टीम के साथ एक प्लाटून पीएससी व महिला पुलिस सुरक्षा की दृष्टि से फायर ब्रिगेड के साथ पहुंचे। इसके बाद शुरू हुआ अवैध निर्माण को गिराने का सिलसिला। एसडीएम सदर ने तालाब की जमीन पर बने 18 लोगों के मकान को धराशायी कराया। जिससे 18 परिवार के लगभग दो सौ की संख्या में लोग पूर्ण रूप से घर से बेघर हो गए। कुछ लोग प्राथमिक विद्यालय में शरण लिए, जबकि ज्यादातर लोग अगल-बगल पड़ोसियों के यहां रहने के लिए विवश हुए। एसडीएम सदर गौरव श्रीवास्तव ने बताया कि चौहान पट्टी गांव निवासी दीपक कुमार सिंह ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल किया था।
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उच्च न्यायालय के आदेश पर पहले 2018 से बेदखली का आदेश पारित हुआ। जिसके बाद कई बार संबंधित लोगों को नोटिस दी गई और आठ बार पैमाइश भी करा कर तालाब पर अतिक्रमण करने वालों को चिन्हित किया गया। जिसके बाद नाम खारिज करते हुए तहसीलदार न्यायिक सदर 122 बी धारा 67 की कार्रवाई की गई। बार-बार नोटिस देने के बाद भी लोगों द्वारा अतिक्रमण नहीं हटाने पर बुधवार को चार जेसीबी के माध्यम से घर को ढहाया गया। जबकि तालाब की जमीन पर बनाए गए मकान मालिक उमाशंकर दुबे, श्याम कुमारी देवी, शैलेश दुबे, संतोष यादव, बलिराम यादव आदि लोगों ने बताया कि यह जमीन हम लोग रजिस्ट्री कराए थे। रजिस्ट्री कराने के बाद मकान बनाया गया।
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अपना आशियाना ढहते देख नहीं रोक पाए आंसू
पड़री। अपने घरों को जेसीबी से गिरता देख लोग काफी परेशान व रोते देखे गए। बूढ़े हो या बच्चे बस एक ही बात कह रहे थे। बरसात के इस मौसम में आखिर हम जाएं तो जाएं कहां। बेदखल हुए लोगों में बलिराम यादव यादव, शिवकुमार दशरथ जोखू रघुनाथ यादव मित्तल यादव छविनाथ यादव अमरनाथ यादव संतोष यादव छब्बू यादव राजेंद्र प्रसाद यादव राजेंद्र प्रसाद यादव, शैलेश कुमार आदि लोग वर्तमान समय में अपने परिवार के साथ प्राथमिक विद्यालय में शरण लिए तो कुछ लोग अगल बगल रहने को विवश हो गए हैं।
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