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Mirzapur News: आशा बहुओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 18 हजार करने की मांग
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कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करती आशा व आंगनबाड़ी। स्रोत- संवाद
मिर्जापुर। भारतीय मजदूर संघ ने कर्मचारियों और श्रमिकों की समस्याओं के समाधान की मांग के लिए जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। इसमें आशा बहुओं का 18 हजार और आशा संगिनियों का 24 हजार रुपये प्रतिमाह करने के साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं का नियमितीकरण कर न्यूनतम मानदेय 18 हजार रुपये देने की मांग की गई है।
राष्ट्रीय संगठन मंत्री हेमलता ने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और प्रशासनिक उपेक्षा से कर्मचारी, संविदाकर्मी, योजना कर्मी और असंगठित क्षेत्र के मजदूर परेशान हैं। सफाई कर्मियों को सुरक्षा उपकरण और उचित पारिश्रमिक नहीं मिलने का भी मुद्दा उठाया गया।
ज्ञापन में आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें एक जनवरी 2026 से लागू करने, न्यूनतम वेतनमान दो हजार रुपये निर्धारित करने और बीएसएनएल में वर्ष 2017 से लंबित सातवें वेतनमान को लागू करने की मांग की गई। इसके अलावा यूपीएसआरटीसी के संविदा कर्मचारियों को रिक्त पदों पर नियमित करने और मृतक आश्रित कोटे में भर्ती की प्रशासनिक अनुमति की बाध्यता खत्म करने की मांग की गई। पटरी-रेहड़ी दुकानदारों को वेंडिंग जोन में उचित स्थान देने, प्रशासनिक व पुलिस उत्पीड़न पर रोक लगाने और ई-रिक्शा व ऑटो चालकों के लिए व्यवस्थित पार्किंग की व्यवस्था करने की मांग भी की गई।
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जिलाध्यक्ष रेखा सिंह ने कहा कि जनहित और श्रमिकों की मांगों पर शासन स्तर से जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाए। इस दौरान चंद्रीकली, निशा सिंह, सुधा मौर्या, आरती मिश्रा, शकुंतला मिश्रा, सीता देवी, नारंगी देवी, मोना देवी, उर्मिला, सावित्री आदि रहीं।
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राष्ट्रीय संगठन मंत्री हेमलता ने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और प्रशासनिक उपेक्षा से कर्मचारी, संविदाकर्मी, योजना कर्मी और असंगठित क्षेत्र के मजदूर परेशान हैं। सफाई कर्मियों को सुरक्षा उपकरण और उचित पारिश्रमिक नहीं मिलने का भी मुद्दा उठाया गया।
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ज्ञापन में आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें एक जनवरी 2026 से लागू करने, न्यूनतम वेतनमान दो हजार रुपये निर्धारित करने और बीएसएनएल में वर्ष 2017 से लंबित सातवें वेतनमान को लागू करने की मांग की गई। इसके अलावा यूपीएसआरटीसी के संविदा कर्मचारियों को रिक्त पदों पर नियमित करने और मृतक आश्रित कोटे में भर्ती की प्रशासनिक अनुमति की बाध्यता खत्म करने की मांग की गई। पटरी-रेहड़ी दुकानदारों को वेंडिंग जोन में उचित स्थान देने, प्रशासनिक व पुलिस उत्पीड़न पर रोक लगाने और ई-रिक्शा व ऑटो चालकों के लिए व्यवस्थित पार्किंग की व्यवस्था करने की मांग भी की गई।
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जिलाध्यक्ष रेखा सिंह ने कहा कि जनहित और श्रमिकों की मांगों पर शासन स्तर से जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाए। इस दौरान चंद्रीकली, निशा सिंह, सुधा मौर्या, आरती मिश्रा, शकुंतला मिश्रा, सीता देवी, नारंगी देवी, मोना देवी, उर्मिला, सावित्री आदि रहीं।