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कटान रोकने के लिए करोड़ों की बनी योजना काम नहीं आई
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सिंचाई विभाग की ओर से कार्य कराए जाने के बावजूद कटान रुकने का नाम नहीं ले रहा है। थोड़ी-थोड़ी दूर पर हुए कार्य के बावजूद बरसात के मौसम में जगह-जगह किनारों के कटने का सिलसिला जारी है। कटान रोकने के लिए ठोस उपाय नहीं किए जाने से जो कार्य हुए हैं, उस पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से 1044 लाख रुपये से सीडीओ आवास से आफिसर कालोनी, मल्हानी बस्ती व डीएम आवास तक जगह-जगह लांचिंग एप्रन डालकर कार्य कराए गए हैं। कार्य पूरे भी हो गए हैं। इसी तरह 1147 लाख रुपये से फतहां से घोड़े शहीद महावीर पार्क तक 310 मीटर कार्य कराए जाना है। जिनमें 250 मीटर कार्य पूरे होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन बारिश के मौसम में सड़क के किनारे जल निकासी के लिए ठोस उपाय नहीं किए जाने से बरसात का पानी इधर-उधर से सीधे गंगा नदी में जा रहा है। गंगा में पानी बढ़ने के साथ ही उसमें पानी बहने कटानरोधी कार्यों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जिलाधिकारी आवास के पास हुए कटान रोधी कार्य किया गया है लेकिन वहां अप और डाउन स्ट्रीम छूटा हुआ है। पिछले वर्ष गंगा में आई बाढ़ के दौरान पानी उफान पर होने से कटान रोधी कार्य के अगल-बगल न सिर्फ कटान हुआ था, बल्कि कुछ स्थानों पर स्लोप स्टेप क्रेडेट में दरार तक पड़ गई थी। शास्त्री सेतु से शहर की तरफ गंगा के किनारे पुल के नीचे से लेकर घोड़े शहीद तक प्रति वर्ष कटान हो रहा है। नारघाट, पक्काघाट, बाबाघाट, बरियाघाट, जिला अस्पताल के पीछे कटान होता रहा है। कटान के चलते कई घर व गंगा के किनारे बने मंदिर उसकी जद में हैं। समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो कई घर, मकान व मंदिर गंगा में समाहित हो सकते हैं। मिर्जापुर नहर प्रखंड के अधिशासी अभियंता वैभव सिंह का कहना है कि सड़क के किनारे नालियों का समुचित प्रबंध नहीं होने से बरसात के मौसम में गंगा के कटान का खतरा बना रहता है। बरसात व लोगों के घरों से निकलने वाले पानी के लिए नाले और नालियां बनाकर किसी निश्चित स्थान पर पानी का निस्तारण कर दिया जाए तो समस्या का काफी हद तक समाधान किया जा सकता है। इसके लिए नगर पालिका को पत्र भी लिखा गया है।
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कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से 1044 लाख रुपये से सीडीओ आवास से आफिसर कालोनी, मल्हानी बस्ती व डीएम आवास तक जगह-जगह लांचिंग एप्रन डालकर कार्य कराए गए हैं। कार्य पूरे भी हो गए हैं। इसी तरह 1147 लाख रुपये से फतहां से घोड़े शहीद महावीर पार्क तक 310 मीटर कार्य कराए जाना है। जिनमें 250 मीटर कार्य पूरे होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन बारिश के मौसम में सड़क के किनारे जल निकासी के लिए ठोस उपाय नहीं किए जाने से बरसात का पानी इधर-उधर से सीधे गंगा नदी में जा रहा है। गंगा में पानी बढ़ने के साथ ही उसमें पानी बहने कटानरोधी कार्यों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जिलाधिकारी आवास के पास हुए कटान रोधी कार्य किया गया है लेकिन वहां अप और डाउन स्ट्रीम छूटा हुआ है। पिछले वर्ष गंगा में आई बाढ़ के दौरान पानी उफान पर होने से कटान रोधी कार्य के अगल-बगल न सिर्फ कटान हुआ था, बल्कि कुछ स्थानों पर स्लोप स्टेप क्रेडेट में दरार तक पड़ गई थी। शास्त्री सेतु से शहर की तरफ गंगा के किनारे पुल के नीचे से लेकर घोड़े शहीद तक प्रति वर्ष कटान हो रहा है। नारघाट, पक्काघाट, बाबाघाट, बरियाघाट, जिला अस्पताल के पीछे कटान होता रहा है। कटान के चलते कई घर व गंगा के किनारे बने मंदिर उसकी जद में हैं। समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो कई घर, मकान व मंदिर गंगा में समाहित हो सकते हैं। मिर्जापुर नहर प्रखंड के अधिशासी अभियंता वैभव सिंह का कहना है कि सड़क के किनारे नालियों का समुचित प्रबंध नहीं होने से बरसात के मौसम में गंगा के कटान का खतरा बना रहता है। बरसात व लोगों के घरों से निकलने वाले पानी के लिए नाले और नालियां बनाकर किसी निश्चित स्थान पर पानी का निस्तारण कर दिया जाए तो समस्या का काफी हद तक समाधान किया जा सकता है। इसके लिए नगर पालिका को पत्र भी लिखा गया है।
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