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बलात्कार के आरोपी को दस वर्ष की कैद
ब्यूरो,अमर उजाला,मिर्जापुर
Updated Sun, 16 Apr 2017 12:43 AM IST
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दस हजार रुपया अर्थदंड भी भरना होगा
- फोटो : demo
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न्यायालय विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट पीएन श्रीवास्तव ने शनिवार को छात्रा के साथ दुष्कर्म के आरोपी को दोषसिद्घ पाए जाने पर दस वर्ष के कड़ी कैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही दस हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित करते हुए जेल भेज दिया।
अभियोजन अनुसार अदलहाट थाना क्षेत्र के एक डिग्री कॉलेज में कार्यरत चपरासी के पुत्र राहुल चौधरी ने कालेज में पढ़ने वाली एक छात्रा के साथ 28 अप्रैल 2014 को दुराचार किया था। पीड़िता की तहरीर पर अदलहाट पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा दर्ज कर विवेचना करते हुए आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी केके पांडेय ने पांच गवाह परीक्षित कराए। जिसकी सुनवाई न्यायालय ने शनिवार को किया। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य, गवाहों के बयान तथा अधिवक्ताओं की दलील के आधार पर न्यायालय ने राहुल को दोषसिद्ध पाया।
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कोर्ट ने कहा कि यह कृत्य न केवल इस पीड़िता के लिए बल्कि कॉलेज में आने वाली उन तमाम छात्राओं को मानसिक आघात देने वाला है। न्याय में सहानुभूति पूर्वक दंड देने की कोई अपेक्षा नहीं है।
लिहाजा राहुल चौधरी को दस वर्ष की सश्रम कारावास तथा दस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जाता है। कोर्ट ने पीड़ित महिला को राज्य सरकार द्वारा अनुमन्य क्षतिपूर्ति की धनराशि देने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजा है।
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अभियोजन अनुसार अदलहाट थाना क्षेत्र के एक डिग्री कॉलेज में कार्यरत चपरासी के पुत्र राहुल चौधरी ने कालेज में पढ़ने वाली एक छात्रा के साथ 28 अप्रैल 2014 को दुराचार किया था। पीड़िता की तहरीर पर अदलहाट पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा दर्ज कर विवेचना करते हुए आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
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अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी केके पांडेय ने पांच गवाह परीक्षित कराए। जिसकी सुनवाई न्यायालय ने शनिवार को किया। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य, गवाहों के बयान तथा अधिवक्ताओं की दलील के आधार पर न्यायालय ने राहुल को दोषसिद्ध पाया।
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कोर्ट ने कहा कि यह कृत्य न केवल इस पीड़िता के लिए बल्कि कॉलेज में आने वाली उन तमाम छात्राओं को मानसिक आघात देने वाला है। न्याय में सहानुभूति पूर्वक दंड देने की कोई अपेक्षा नहीं है।
लिहाजा राहुल चौधरी को दस वर्ष की सश्रम कारावास तथा दस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जाता है। कोर्ट ने पीड़ित महिला को राज्य सरकार द्वारा अनुमन्य क्षतिपूर्ति की धनराशि देने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजा है।