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दहेज हत्या में पति, सास समेत चार को उम्र कैद
ब्यूरो/अमर उजाला, मिर्जापुर।
Updated Wed, 04 May 2016 12:35 AM IST
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अदालत
- फोटो : court
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अपर जिला जज राजेश भारद्वाज ने विवाहिता को जला कर मारने के बाद उसके मायके वालों को बगैर सूचना दिए उसका दाह संस्कार करने के जुर्म में पति सास, ससुर तथा देवर को दोष सिद्ध पाते हुए उम्र कैद की सजा दी। अभियोजन पक्ष के अनुसार भदोही जिले के गोपीगंज थाना क्षेत्र के दयाराम डेहरिया निवासी सदाफल ने अपनी पुत्री लालती देवी की शादी कछवां थाना क्षेत्र के परेड वार्ड बिंद बस्ती निवासी देव नारायण के पुत्र रविशंकर के साथ मई 2005 में किया था।
उसकी पुत्री को दो पुत्र पैदा हुए। पति रविशंकर, सास चंपा देवी, ससुर देव नारायण, देवर उमाशंकर, लालती को दहेज में मोटर साइकल की मांग को लेकर प्रताड़ित किया करते थे। जिसकी शिकायत उसने मायके वालों से किया था। मायके वालों ने उसे समझा बुझा कर विदा कर दिया था। आरोप है कि ससुराल वालों ने 19 अगस्त 2013 को लालती देवी की जला कर हत्या कर दिए। बगैर मायके वालों को बताए तथा पुलिस को सूचना दिए ही लालती का दाह संस्कार कर दिया गया।
इस घटना की नामजद रिपोर्ट मृतका के पिता ने उसी दिन थाना कछवां में दर्ज कराया। कछवां पुलिस ने चारों के खिलाफ दहेज हत्या में मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दिया, जिसकी सुनवाई न्यायालय द्वारा की जा रही है।
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अभियोजन पक्ष की ओर से कुल छह गवाह परीक्षित कराए गए। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य, गवाहों के बयान के आधार पर न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषसिद्ध पाते हुए उम्र कैद की सजा तथा जुर्माने से दंडित किया।
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उसकी पुत्री को दो पुत्र पैदा हुए। पति रविशंकर, सास चंपा देवी, ससुर देव नारायण, देवर उमाशंकर, लालती को दहेज में मोटर साइकल की मांग को लेकर प्रताड़ित किया करते थे। जिसकी शिकायत उसने मायके वालों से किया था। मायके वालों ने उसे समझा बुझा कर विदा कर दिया था। आरोप है कि ससुराल वालों ने 19 अगस्त 2013 को लालती देवी की जला कर हत्या कर दिए। बगैर मायके वालों को बताए तथा पुलिस को सूचना दिए ही लालती का दाह संस्कार कर दिया गया।
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इस घटना की नामजद रिपोर्ट मृतका के पिता ने उसी दिन थाना कछवां में दर्ज कराया। कछवां पुलिस ने चारों के खिलाफ दहेज हत्या में मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दिया, जिसकी सुनवाई न्यायालय द्वारा की जा रही है।
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अभियोजन पक्ष की ओर से कुल छह गवाह परीक्षित कराए गए। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य, गवाहों के बयान के आधार पर न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषसिद्ध पाते हुए उम्र कैद की सजा तथा जुर्माने से दंडित किया।