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सीबीआई खोजती रह गई, नहीं मिला कुआं
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Sat, 21 Jan 2017 11:28 PM IST
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परसिया ग्राम सभा के सिलहटा गांव में मनरेगा से कूप खुदवाया गया था। सीबीआई के डिप्टी एसपी प्रशांत कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में मनरेगा घोटाले की जांच करने आई टीम शनिवार को गांव में कूप खोजती रह गई लेकिन न वह था और न मिला।
टीम ने हलिया ब्लॉक में मनरेगा के तहत हुए कार्यो की जांच की। सिलहटा में वहीं ग्रामीणों ने बताया कि 2009 में जगलाल कोल के घर के पास कूप का निर्माण कराया गया था। पर सीबीआई की टीम खोजने लगी तो कूप मिला मिला ही नहीं। सीबीआई अधिकारियों ने आसपास भी पड़ताल की लेकिन कूप नहीं मिला। इसके अलावा टीम ने अन्य कामों की भी जांच की। जानकारों का कहना है कि उनमें से कई कार्यों का कोई नामोनिशान नहीं मिला।
हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 31 जनवरी को मनरेगा के तहत वर्ष 2007 से 2010 तक हुए कार्यों की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया था। अब तक आठ बार टीम जांच करने आ चुकी है। इसके पहले स्पेशल क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर अशरफ सिद्दकी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम जनपद में आकर जांच कर चुकी है। हलिया ब्लाक में भी मनरेगा के तहत कार्यों को कराने में काफी अनियमितता बरती गई है। सीबीआई हलिया ब्लॉक में हुए पौने चार करोड़ रुपये के घोटाले से संबंधित फाइलों को खंगाल रही है। सीबीआई वर्ष 2012 में 54 मुकदमें दर्ज करा चुकी है। टीम के सदस्यों ने कई लोगों के बयान भी दर्ज किए।
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टीम ने हलिया ब्लॉक में मनरेगा के तहत हुए कार्यो की जांच की। सिलहटा में वहीं ग्रामीणों ने बताया कि 2009 में जगलाल कोल के घर के पास कूप का निर्माण कराया गया था। पर सीबीआई की टीम खोजने लगी तो कूप मिला मिला ही नहीं। सीबीआई अधिकारियों ने आसपास भी पड़ताल की लेकिन कूप नहीं मिला। इसके अलावा टीम ने अन्य कामों की भी जांच की। जानकारों का कहना है कि उनमें से कई कार्यों का कोई नामोनिशान नहीं मिला।
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हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 31 जनवरी को मनरेगा के तहत वर्ष 2007 से 2010 तक हुए कार्यों की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया था। अब तक आठ बार टीम जांच करने आ चुकी है। इसके पहले स्पेशल क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर अशरफ सिद्दकी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम जनपद में आकर जांच कर चुकी है। हलिया ब्लाक में भी मनरेगा के तहत कार्यों को कराने में काफी अनियमितता बरती गई है। सीबीआई हलिया ब्लॉक में हुए पौने चार करोड़ रुपये के घोटाले से संबंधित फाइलों को खंगाल रही है। सीबीआई वर्ष 2012 में 54 मुकदमें दर्ज करा चुकी है। टीम के सदस्यों ने कई लोगों के बयान भी दर्ज किए।
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