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ग्रामीण क्षेत्रों में कैश की ज्यादा किल्लत
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Wed, 14 Dec 2016 11:33 PM IST
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चौबे टोला स्थित विजया बैंक के एटीएम पर कैश लेने के लिए लगी ग्राहकों की लाइन ।
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नोटबंदी के 35 दिन गुजर जाने के बाद भी जिले के ग्रामीण अंचलों में रुपये के लिए त्राहिमाम मचा हुआ है। जिले के 12 ब्लॉकों में स्थित अधिकांश एटीएम नोटबंदी की तिथि से नहीं खुले हैं, वहीं विभिन्न बैंकों से पर्याप्त भुगतान नहीं होने से किसानों की खेती-किसानी प्रभावित हो रही है। अधिकांश ऐसे भी एटीएम हैं, जो महीनों से ही खुले नहीं। वहीं आरबीआई के निर्देश पर सभी बैंकों के सीसीटीवी कैमरा चल रहे हैं। ऐसा बैंकों में हो रही हेरफेर की आशंका पर किया जा रहा है।
ग्राम्यांचलों के एटीएम व बैंकों से पर्याप्त पैसा नहीं मिलने से वेतनभोगी, पेंशनभोगी सहित व्यवसायी, मजदूर एवं किसान परेशान नजर आ रहे हैं। छानबे संवाददाता के अनुसार विजयपुर, बिहसड़ा, गैपुरा, हरगढ़ के आधा दर्जन नोटबंदी के बाद से ही बंद चल रहे हैं, जिससे ग्राहकाें को अपने पैसा नहीं निकल पा रहा है। बैंकों में घंटाें लंबी कतार में खड़े होने के बाद भी पैसे का पर्याप्त भुगतान हो हा है, जिससे किसान रबी की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं।
पैसे के लिए किसान अपने धान को भी औने-पौने दाम में व्यापारियों को बेचने को मजबूर हैं। जमालपुर संवाददाता के अनुसार इलाहाबाद बैंक जमालपुर शाखा से विगत दो दिनों से भुगतान नहीं हो पा रहा है, जिससे लोगाें को खेती-किसानी तो प्रभावित हो ही रही है वहीं घर-गृहस्थी चलाना भी मुश्किल हो रहा है। बैंक मैनेजर शक्ति सिंह ने बताया कि कैश नहीं मिल रहा है। बैंकों के बाहर सुबह ही लंबी कतार लग जा रही है, लेकिन पैसा नहीं मिलने से खाताधारक बैरंग ही लौट जा रहे हैं। राजगढ़ संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के भारतीय स्टेट बैंक सहित इलाहाबाद बैंक, सहकारी बैंक एवं केनरा बैंक शाखा पर सुबह से ही ग्राहकों की लंबी कतार लगी रही। स्टेट बैंक के अलावा सभी बैंकाें से ग्राहकों को दो-दो हजार रुपये का भुगतान किया गया।
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बैंक से कम पैसे के भुगतान पर बैंक द्वारा कैश कम होने की बात बताई गई। सीखड़ संवाददाता के अनुसार कहने को तो क्षेत्र में आठ बैंक की शाखाएं स्थापित हैं, लेकिन ग्राहकों को पर्याप्त पैसा नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र के खैरा, पाहों, मगरहां, सीखड़, अदलपुरा एवं रामगढ़ में स्थित बैंकों से दो हजार रुपये के ऊपर भुगतान नहीं हो पा रहा है, उधर बैंक मैनेजर कैश कम आने का रोना रो रहे हैं। एटीएम के कैमरे तो ठीक हैं, लेकिन सबसे खराब हालत इलाहाबाद ग्रामीण यूपी बैंकाें का है, बैंक से ग्राहकों को दो दिन बाद पैसा मिलता है।
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ग्राम्यांचलों के एटीएम व बैंकों से पर्याप्त पैसा नहीं मिलने से वेतनभोगी, पेंशनभोगी सहित व्यवसायी, मजदूर एवं किसान परेशान नजर आ रहे हैं। छानबे संवाददाता के अनुसार विजयपुर, बिहसड़ा, गैपुरा, हरगढ़ के आधा दर्जन नोटबंदी के बाद से ही बंद चल रहे हैं, जिससे ग्राहकाें को अपने पैसा नहीं निकल पा रहा है। बैंकों में घंटाें लंबी कतार में खड़े होने के बाद भी पैसे का पर्याप्त भुगतान हो हा है, जिससे किसान रबी की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं।
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पैसे के लिए किसान अपने धान को भी औने-पौने दाम में व्यापारियों को बेचने को मजबूर हैं। जमालपुर संवाददाता के अनुसार इलाहाबाद बैंक जमालपुर शाखा से विगत दो दिनों से भुगतान नहीं हो पा रहा है, जिससे लोगाें को खेती-किसानी तो प्रभावित हो ही रही है वहीं घर-गृहस्थी चलाना भी मुश्किल हो रहा है। बैंक मैनेजर शक्ति सिंह ने बताया कि कैश नहीं मिल रहा है। बैंकों के बाहर सुबह ही लंबी कतार लग जा रही है, लेकिन पैसा नहीं मिलने से खाताधारक बैरंग ही लौट जा रहे हैं। राजगढ़ संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के भारतीय स्टेट बैंक सहित इलाहाबाद बैंक, सहकारी बैंक एवं केनरा बैंक शाखा पर सुबह से ही ग्राहकों की लंबी कतार लगी रही। स्टेट बैंक के अलावा सभी बैंकाें से ग्राहकों को दो-दो हजार रुपये का भुगतान किया गया।
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बैंक से कम पैसे के भुगतान पर बैंक द्वारा कैश कम होने की बात बताई गई। सीखड़ संवाददाता के अनुसार कहने को तो क्षेत्र में आठ बैंक की शाखाएं स्थापित हैं, लेकिन ग्राहकों को पर्याप्त पैसा नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र के खैरा, पाहों, मगरहां, सीखड़, अदलपुरा एवं रामगढ़ में स्थित बैंकों से दो हजार रुपये के ऊपर भुगतान नहीं हो पा रहा है, उधर बैंक मैनेजर कैश कम आने का रोना रो रहे हैं। एटीएम के कैमरे तो ठीक हैं, लेकिन सबसे खराब हालत इलाहाबाद ग्रामीण यूपी बैंकाें का है, बैंक से ग्राहकों को दो दिन बाद पैसा मिलता है।