फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mirzapur News ›   Boring water being sold in the name of mineral water

मिनरल वाटर के नाम पर बिक रहा बोरिंग का पानी

Wed, 04 May 2022 12:15 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 04 May 2022 12:15 AM IST
विज्ञापन
Boring water being sold in the name of mineral water
जिले भर में इन दिनों मिनरल वाटर के नाम पर शुद्ध पानी उपलब्ध कराने का धंधा जोरों पर है। अवैध तरीके से जिले में काफी संख्या में वाटर प्लांट संचालित किए जा रहे हैं। इनमें से एक-दो के पास ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड का लाइसेंस है, जबकि अधिसंख्य बिना किसी लाइसेंस के ही मनमाने तरीके से पानी बेच रहे हैं। मिनरल वाटर का प्लांट लगाने के लिए इस लाइसेंस का होना पहली शर्त है। बिना सील बंद पानी की बिक्री पर प्रतिबंध होने के बावजूद जिले में लगभग दर्जन भर कारोबारी प्रतिदिन केन और पाउच के माध्यम से हजारों लीटर पानी की आपूर्ति कर रहे हैं।
विज्ञापन

नियमों की अनदेखी कर हो रहे पानी के इस कारोबार के प्रति जिम्मेदार भी उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं। उधर, स्थिति यह है कि शुद्ध पानी के नाम पर अधिकांश केनों पर न तो उसे तैयार करने की तिथि अंकित रहती है और न ही उसके उपयोग की तिथि अंकित होती है। इसके अलावा बैच नंबर और लाइसेंस नंबर भी अंकित नहीं रहता है। मिनरल वाटर के नाम पर अधिकांश जगहों पर केन में पानी भरकर दे दिया जाता है। इसके चलते पानी खरीदकर प्यास बुझाने वाले लोगों को विभिन्न तरह की बीमारियों की चपेट में आने का खतरा बढ़ता जा रहा है। शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी पानी के पाउच की जमकर बिक्री हो रही है। जिले में पानी के कारोबार के कितने लाइसेंस हैं, इसकी ठोस जानकारी विभागीय अधिकारियों को नहीं है। लोगों का कहना है कि अधिकांश जगहों पर बस केन में पानी भर कर दे दिया जाता है, लेकिन मिनरल वाटर के नाम पर आजकल यह फैशन हो गया है और वैवाहिक कार्यक्रमों व पार्टियों में इसका धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि इस प्रकार के पानी में प्रिजर्वेटिव व केमिकल का भी प्रयोग किया जा रहा है। उधर, मिनरल वाटर प्लांट लगाने के बाबत लाइसेंस के लिए आवेदन दिल्ली में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड को करना होता है। इसकी फीस तीन लाख रुपये से अधिक है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के अधिकारी मौके पर जांच करते हैं और पानी का नमूना लेते हैं। नमूना पास होने के बाद अनुमति पत्र जारी किया जाता है। यह पत्र जिला स्तर पर खाद्य विभाग को दिखाया जाता है। इसके बाद प्लांट का लाइसेंस जारी होता है। लाइसेंस से पहले मशीन की गुणवत्ता की जांच सहित कई अन्य औपचारिकताएं पूरी कराई जाती हैं। वाटर प्लांट लगाने के लिए कम से कम दो सौ फीट की बोरिंग होनी चाहिए। वहां पानी खारा न आता हो और वाटर लेबल ठीक हो। इसके लिए आरओ मशीन की आवश्यकता होती है। इस संबंध में भूगर्भ जल विभाग के सहायक भू-भौतिकविद स्वप्निल कुमार राय का कहना है कि अनधिकृत रूप से लगाए गए आरओ प्लांट संचालकों के खिलाफ शीघ्र ही अभियान चलाया जाएगा। नियमों के उल्लंघन के मामले में दो लाख रुपये से 15 लाख रुपये तक का जुर्माना और कम से कम छह माह की जेल हो सकती है। उनके विभाग में पंजीकरण के लिए अब तक चार आवेदन आए हैं। उधर, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अभिहीत अधिकारी एके सिंह का कहना है कि फिलहाल एक प्लांट का उनके विभाग में पंजीकरण है। शेष प्लांट पैकेज्ड पानी की श्रेणी में नहीं आने के कारण उन पर विभाग द्वारा कार्रवाई नहीं की जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed