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भागवत कथा सुनने से मन और तन होता है निर्मल

Sun, 27 Dec 2015 01:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ मिर्जापुर
ब्यूरो/अमर उजाला/ मिर्जापुर Updated Sun, 27 Dec 2015 01:03 AM IST
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Bhagwat Katha is listening clear the mind and body
पुष्टिमार्गीय वैष्णव तीर्थ स्थल चरणाट्धाम चुनार में महाप्रभू विट्ठल नाथ जी का पांच सौ वॉ प्राकट्यपूर्ती महोत्सव में शनिवार को राजस्थान से आए कथा वाचक यदुनाथजी गड़ीकोटा ने व्यासपीठ से जगतगुरू श्रीमदवल्लभाचार्य की महिमा और उनके पुत्र महाप्रभू गुसाई विट्ठलनाथ जी के प्राकट्य कथा का सुंदर वर्णन कर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
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संगीतमयी भागवत कथा को सुनने के लिए कथा पंडाल में देश और विदेश से आए भक्तों की भारी भीड़ मौजूद थी।

व्यासपीठ से भागवत कथा के महातम का वर्णन करते हुए यदुनाथजी ने कहा कि कथा सुनने से मन निर्मल और शुद्ध हो जाता है। महाप्रभू जी के दर्शन मात्र से मानव जीवन सफल होता है।
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कथा श्रवण का लाभ तब मिलता है जब आप अपनी समस्त वासनाओं को छोड़ कर शांत चित्त से कथा श्रवण करें।
पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय के षष्ठपीठाधीश्वर गोस्वामी 108 श्याममनोहर जी महाराज ने चरणाट्धाम की महत्ता का वर्णन करते हुए भक्तों को बताया कि यह स्थान गुप्त वृदांवन के रूप में विख्यात है।
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मान्यता है कि जब महाप्रभू विट्ठलनाथ जी का प्राकट्य इस स्थान पर गोपियों के साथ श्रीकृष्ण ने रास लीला रचाई थी।

बताया कि अखण्ड भूमण्डलाचार्यवर्य जगदगुरू श्रीमद्वल्लभाचार्य ने शुद्धाद्वैत एवं अधिदैविक स्वरूपों को स्वीकारा है। अधिभौतिक दृष्टि से चरणाटधाम गंगातट पर स्थित हाने से महान पुनीत स्थल है।


जब जगतगुरू तीसरी बार पृथ्वी परिक्रमा कर विक्रम संवत 1572 को यहां पधारे और तब यहां उनको पुत्र रत्न के रूप में गुसाई विट्ठलनाथ जी पैदा हुए।

भक्तोद्धारक अवतार होने के नाते यहां होने वाले उत्सव पुष्टिमार्गीय सेवा पद्धति से मनाया जाता है। जिसका वर्णन गर्ग संहिता में भी मिलता है।

जिस प्रकार ब्रजधाम का वर्णन श्रीमद्भागवत में मिलता है। गौरी तंत्र में वर्णित श्लोक इस बात को प्रमाणित करता है। तब से हर वर्ष यहां पर महाप्रभू जी का प्राकट्य नंद महोत्सव का आयोजन किया जाता है।  
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