मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश बार काउंसिल द्वारा अधिवक्ताओं को जारी किए जाने वाले सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (सीओपी) के नवीनीकरण में हो रही अनियमितताओं और लापरवाही पर अधिवक्ताओं ने नाराजगी जताई। अधिवक्ता अमित जायसवाल ने बार काउंसिल के अध्यक्ष व सचिव को पत्र लिखकर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और आर्थिक क्षतिपूर्ति की मांग की।
अधिवक्ता अमित जायसवाल ने बताया कि प्रदेश के हजारों अधिवक्ताओं ने वर्ष 2023 में नवीनीकरण के लिए आवेदन किए थे। लगभग ढाई वर्ष के लंबे इंतजार के बाद अब सर्टिफिकेट भेजे जा रहे हैं। अधिवक्ताओं को मिल रहे नए सर्टिफिकेट में बहुत से अधिवक्ताओं के नाम, पता और बार एसोसिएशन के विवरण गलत हैं। इससे बहुत से अधिवक्ताओं को प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं हुए। हद तो तब हो गई जब महिला अधिवक्ताओं के कार्ड पर पुरुषों की फोटो चस्पा कर दी गई है। बार काउंसिल ने इन लिपिकीय गलतियों को सुधारने के लिए अधिवक्ताओं को स्वयं के खर्च पर प्रयागराज कार्यालय बुलाया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि जब गलती विभाग की है, तो उसका आर्थिक बोझ अधिवक्ता क्यों उठाए। इसलिए पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि यदि विभाग की गलती है तो परिषद संबंधित अधिवक्ताओं को 500 संशोधन शुल्क के बराबर की क्षतिपूर्ति और यात्रा व्यय प्रदान करे। साथ ही एक दिन का मुआवजा भी दें। त्रुटिपूर्ण प्रमाणपत्रों को सुधारने के लिए ऑनलाइन हेल्पलाइन नंबर जारी करें और संशोधन कर बिना अतिरिक्त शुल्क के नए कार्ड डाक से भेजे जाएं। साथ ही बार काउंसिल अपनी जवाबदेही तय करे ताकि भविष्य में ऐसी घोर लापरवाही न हो। ज्ञापन देने में कुलदीप खंडेलवाल, अतुल जायसवाल, गंगाधर सिंह, रामजी, शारदा प्रसाद, धर्मेंद्र गिरी, संजय गुप्ता, नीरज त्यागी, कुश मिश्रा, प्रमोद गुप्ता, रितेश सिंह, गुंजन सिंह, पुनीत कुमार, भानु गुप्ता आदि रहे।