{"_id":"58dc04904f1c1b841663dc1f","slug":"achievement-of-shakti-sadhana","type":"story","status":"publish","title_hn":"शक्ति साधना को उमड़ी आस्था ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शक्ति साधना को उमड़ी आस्था
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Thu, 30 Mar 2017 12:31 AM IST
विज्ञापन
दर्शन के लिए भीड़
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विंध्यवासिनी देवी के दरबार में चैत्र नवरात्र की प्रतिपदा और द्वितीया का पूजन बुधवार को किया गया। मंदिर में दर्शन करन के लिए मध्यरात्रि के बाद से ही कतार लगने लगी थी। भोर में मगंला आरती के बाद पट खुला तो दर्शनार्थियों का रेला उमड़ पड़ा। मंदिर परिसर में देर रात तक भक्तों की भीड़ लगी रही। पूरा क्षेत्र की देवी के जयकारे से गूंज रहा है। देर रात तक चार लाख से ज्यादा लोगों ने दर्शन किया।
नवरात्र के पहले ही देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु विंध्यवासिनी देवी का दर्शन करने पहुंचे हैं। पूरे विंध्य क्षेत्र का वातावरण ही आध्यात्मिक हो गया है। जगह-जगह जयकारे लग रहे हैं। क्षेत्र के सभी मंदिरों की विद्युत झालरों और पुष्प आदि से आकर्षक सजावट की गई है। नवरात्र का स्नान आधी रात से ही शुरू हो गया था। उसके बाद पूजन सामग्री लेकर भक्त कतार में खड़े हो गए। विंध्याचल धाम की पांच प्रमुख गलियों में लंबी-लंबी कतारें लग गई थीं। भोर में मंगला आरती के बाद दर्शन शुरू हुआ तो देर रात तक अनवरत चलता रहा।
मंदिर की छत पर साधक अनुष्ठान करते दिखे तो दिन भर परिसर में शहनाईयों की धुनें गूंजती रही और बच्चों का मुंडन संस्कार होता रहा। दोपहर में पारा 41 डिग्री तक पहुंच गया था लेकिन भक्तों को भीषण गर्मी की भी कोई परवाह नहीं थी। उनको तो लगन लगी थी सिर्फ मां के दर्शन की। मंदिर का कपाट बंद होने के बाद कतार में खड़े श्रद्धालु अपनी जगह पर बैठ कर आराम करने लगते और जब पट खुलता तो जयकारा लगाते हुए आगे बढ़ने लगते।
नवरात्र के पहले ही देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु विंध्यवासिनी देवी का दर्शन करने पहुंचे हैं। पूरे विंध्य क्षेत्र का वातावरण ही आध्यात्मिक हो गया है। जगह-जगह जयकारे लग रहे हैं। क्षेत्र के सभी मंदिरों की विद्युत झालरों और पुष्प आदि से आकर्षक सजावट की गई है। नवरात्र का स्नान आधी रात से ही शुरू हो गया था। उसके बाद पूजन सामग्री लेकर भक्त कतार में खड़े हो गए। विंध्याचल धाम की पांच प्रमुख गलियों में लंबी-लंबी कतारें लग गई थीं। भोर में मंगला आरती के बाद दर्शन शुरू हुआ तो देर रात तक अनवरत चलता रहा।
विज्ञापन
मंदिर की छत पर साधक अनुष्ठान करते दिखे तो दिन भर परिसर में शहनाईयों की धुनें गूंजती रही और बच्चों का मुंडन संस्कार होता रहा। दोपहर में पारा 41 डिग्री तक पहुंच गया था लेकिन भक्तों को भीषण गर्मी की भी कोई परवाह नहीं थी। उनको तो लगन लगी थी सिर्फ मां के दर्शन की। मंदिर का कपाट बंद होने के बाद कतार में खड़े श्रद्धालु अपनी जगह पर बैठ कर आराम करने लगते और जब पट खुलता तो जयकारा लगाते हुए आगे बढ़ने लगते।
विज्ञापन