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6009 लोगों पर एक कोविड बेड, 86206 पर एक वेंटिलेटर
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मिर्जापुर। कोविड महामारी में बेड, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की कमी को लेकर लोगबाग अकारण ही परेशान नहीं है। जिले में 12 निजी और दो सरकारी कोविड अस्पतालों में मात्र 416 बेड और 29 वेंटिलेटर है। इन्हीं पर जिले की 25 लाख की आबादी निर्भर है। ऐसे में अगर आकलन किया जाए तो 6009 लोगों पर एक बेेड और 86206 लोगों पर एक वेंटिलेटर की उपलब्धता है।
मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के रिपोर्ट के मुताबिक जिले में कुल पंजीकृत 145 चिकित्सा प्रतिष्ठान है। इसमें 45 पैथालाजी और क्लीनिक है। लगभग 100 छोटे-बड़े अस्पताल है। जिसमें लगभग 900 बेड हैं। ये निजी अस्पताल का ब्योरा है। सरकारी अस्पताल में दो जिला अस्पताल, आठ सीएचसी, आठ पीएचसी, चार नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। इसमें लगभग 600 बेड हैं। एक 100 बेड का मातृ-शिशु विंग है। जो हैरिटेज द्वारा पीपीपी माडल पर संचालित होता है। मार्च 2020 से कोविड महामारी आने के बाद दो क्वारंटीन अस्पताल, एक एल-वन और एक एल-टू अस्पताल बनाया गया।
सरकारी अस्पताल के एल-टू में बेड की बढ़ोत्तरी हुई, पर अस्पताल नहीं बढ़ा। होम आईसोलेशन शुरू होने के चलते क्वारंटीन अस्पताल बंद हो गया। वर्तमान समय में दो सरकारी और 12 निजी अस्पताल में कोविड का इलाज चल रहा है। इसमें 105 सरकारी और 311 निजी अस्पताल में बेड है। 18 वेंटिलेटर सरकारी और 11 वेंटिलेटर निजी अस्पताल में है। जिले के निजी अस्पतालों में उपलब्ध लगभग 900 बेड के सापेक्ष वर्तमान में कुल क्षमता के 35 प्रतिशत बेड कोविड के अस्पताल को कोविड केयर अस्पताल में शमिल किया गया है। इसमें भी कुछ अस्पताल में ही मरीज भर्ती हो रहे हैं।
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केस-1
नहीं मिला आक्सीजन, मौत
भदोही जिले के कला तुलसी गांव निवासी 32 वर्षीय प्रदीप मिश्रा को सांस लेने में परेशानी होने पर परिजन भदोही के सरकारी अस्पताल ले गए। वहां बेड न मिलने पर निजी अस्पताल में पता किया। वहां भी बेड न मिलने पर मिर्जापुर के मंडलीय अस्पताल में लेकर आए। जहां आधे घंटे तक आक्सीजन न मिलने के कारण उनकी मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि इमरजेंसी में आए तो आक्सीजन मशीन खाली नहीं थी, मरीज लेटे थे। आधे घंटे तक इंतजार करने के बाद मौत हो गई।
केस-दो
चार घंटे तक नहीं मिला था बेड
अदलहाट थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुर निवासी 65 वर्षीय सेवालाल को सांस लेने में परेशानी होने पर परिजन मंडलीय अस्पताल लेकर आए। जहां दोपहर 12 बजे मंडलीय अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे। वहां पर आक्सीजन कंसंट्रेटर से आक्सीजन दिया जा रहा था। शाम को चार बजे तक अस्पताल में बेड न मिलने के कारण वहीं पर पड़े रहे।
एल-टू में वेंटिलेटर चलाने वाले विशेषज्ञ नहीं
ट्रामा सेंटर में बने एल-टू अस्पताल में कहने को तो 18 वेंटिलेटर है, पर बस नाम मात्र के है। एल-टू अस्पताल में पाइपलाइन, सिलेंडर और आक्सीजन कंस्ट्रेटर के जरीए ही आक्सीजन दिया जा रहा है। वेंटिलेटर चलाने के लिए विशेषज्ञ डाक्टर की जरूरत होती है। जिसकी नियुक्ति अभी तक नहीं हो सकी है। एक टेक्निशीयन है। वो भी वेंटिलेटर नहीं चला पाता। ऐसे में एल-टू अस्पताल एल-वन की तरह ही है।
मंडलीय अस्पताल में आ रहे सांस के मरीज
मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल में लगभग 200 बेड है। इसमें से 70 बेड पर पाइप लाइन के जरीए सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई है। ऑक्सीज वाले सभी बेड फुल चल रहे है। बाकी के बेड पर भी मरीज है। इसमें कुछ को सिलेंडर के जरीए आक्सजीन दिया जा रहा है। यहां पर सांस लेने में परेशानी होने वाले मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। भर्ती रहने के दौरान इनकी कोविड जांच होती है। कोविड रिपोर्ट आने पर इनको एल-टू में स्थानांरित किया जाता है, पर कुछ प्रतिशत मरीज ही पाजिटव आने पर स्थानांतरित हो रहे है। रिपोर्ट आने में तीन से चार दिन लग रहा है, तब तक मरीज की मौत हो जा रही है। हालत ये है कि अस्पताल में डिस्चार्ज होने पर नहीं बल्कि मौत होने पर बेड खाली हो रहे है।
सीएमओं डॉ. पीडी गुप्ता ने बताया कि 30 बेड का विंध्याचल सीएचसी का एल-वन, 50 बेड का ट्रामा सेंटर का एल-टू अस्पताल चल रहा है। ट्रामा सेंटर में 50 बेड बढ़ाया जाना है। इसमें 25 बेड पर आक्सीजन पाइपलाइन लगाकर बेड की संख्या को 50 से बढ़ाकर 75 कर दिया गया है। 25 और बेड पर पाइपलाइन से आक्सीजन पाइप लाइन लगाने की तैयारी चल रही है। इसके अलावा चुनार और मड़िहान सीएचसी पर 30 बेड को बढ़ाकर 50-50 बेड का कोविड अस्पताल बनाया जा रहा है।
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मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के रिपोर्ट के मुताबिक जिले में कुल पंजीकृत 145 चिकित्सा प्रतिष्ठान है। इसमें 45 पैथालाजी और क्लीनिक है। लगभग 100 छोटे-बड़े अस्पताल है। जिसमें लगभग 900 बेड हैं। ये निजी अस्पताल का ब्योरा है। सरकारी अस्पताल में दो जिला अस्पताल, आठ सीएचसी, आठ पीएचसी, चार नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। इसमें लगभग 600 बेड हैं। एक 100 बेड का मातृ-शिशु विंग है। जो हैरिटेज द्वारा पीपीपी माडल पर संचालित होता है। मार्च 2020 से कोविड महामारी आने के बाद दो क्वारंटीन अस्पताल, एक एल-वन और एक एल-टू अस्पताल बनाया गया।
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सरकारी अस्पताल के एल-टू में बेड की बढ़ोत्तरी हुई, पर अस्पताल नहीं बढ़ा। होम आईसोलेशन शुरू होने के चलते क्वारंटीन अस्पताल बंद हो गया। वर्तमान समय में दो सरकारी और 12 निजी अस्पताल में कोविड का इलाज चल रहा है। इसमें 105 सरकारी और 311 निजी अस्पताल में बेड है। 18 वेंटिलेटर सरकारी और 11 वेंटिलेटर निजी अस्पताल में है। जिले के निजी अस्पतालों में उपलब्ध लगभग 900 बेड के सापेक्ष वर्तमान में कुल क्षमता के 35 प्रतिशत बेड कोविड के अस्पताल को कोविड केयर अस्पताल में शमिल किया गया है। इसमें भी कुछ अस्पताल में ही मरीज भर्ती हो रहे हैं।
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केस-1
नहीं मिला आक्सीजन, मौत
भदोही जिले के कला तुलसी गांव निवासी 32 वर्षीय प्रदीप मिश्रा को सांस लेने में परेशानी होने पर परिजन भदोही के सरकारी अस्पताल ले गए। वहां बेड न मिलने पर निजी अस्पताल में पता किया। वहां भी बेड न मिलने पर मिर्जापुर के मंडलीय अस्पताल में लेकर आए। जहां आधे घंटे तक आक्सीजन न मिलने के कारण उनकी मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि इमरजेंसी में आए तो आक्सीजन मशीन खाली नहीं थी, मरीज लेटे थे। आधे घंटे तक इंतजार करने के बाद मौत हो गई।
केस-दो
चार घंटे तक नहीं मिला था बेड
अदलहाट थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुर निवासी 65 वर्षीय सेवालाल को सांस लेने में परेशानी होने पर परिजन मंडलीय अस्पताल लेकर आए। जहां दोपहर 12 बजे मंडलीय अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे। वहां पर आक्सीजन कंसंट्रेटर से आक्सीजन दिया जा रहा था। शाम को चार बजे तक अस्पताल में बेड न मिलने के कारण वहीं पर पड़े रहे।
एल-टू में वेंटिलेटर चलाने वाले विशेषज्ञ नहीं
ट्रामा सेंटर में बने एल-टू अस्पताल में कहने को तो 18 वेंटिलेटर है, पर बस नाम मात्र के है। एल-टू अस्पताल में पाइपलाइन, सिलेंडर और आक्सीजन कंस्ट्रेटर के जरीए ही आक्सीजन दिया जा रहा है। वेंटिलेटर चलाने के लिए विशेषज्ञ डाक्टर की जरूरत होती है। जिसकी नियुक्ति अभी तक नहीं हो सकी है। एक टेक्निशीयन है। वो भी वेंटिलेटर नहीं चला पाता। ऐसे में एल-टू अस्पताल एल-वन की तरह ही है।
मंडलीय अस्पताल में आ रहे सांस के मरीज
मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल में लगभग 200 बेड है। इसमें से 70 बेड पर पाइप लाइन के जरीए सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई है। ऑक्सीज वाले सभी बेड फुल चल रहे है। बाकी के बेड पर भी मरीज है। इसमें कुछ को सिलेंडर के जरीए आक्सजीन दिया जा रहा है। यहां पर सांस लेने में परेशानी होने वाले मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। भर्ती रहने के दौरान इनकी कोविड जांच होती है। कोविड रिपोर्ट आने पर इनको एल-टू में स्थानांरित किया जाता है, पर कुछ प्रतिशत मरीज ही पाजिटव आने पर स्थानांतरित हो रहे है। रिपोर्ट आने में तीन से चार दिन लग रहा है, तब तक मरीज की मौत हो जा रही है। हालत ये है कि अस्पताल में डिस्चार्ज होने पर नहीं बल्कि मौत होने पर बेड खाली हो रहे है।
सीएमओं डॉ. पीडी गुप्ता ने बताया कि 30 बेड का विंध्याचल सीएचसी का एल-वन, 50 बेड का ट्रामा सेंटर का एल-टू अस्पताल चल रहा है। ट्रामा सेंटर में 50 बेड बढ़ाया जाना है। इसमें 25 बेड पर आक्सीजन पाइपलाइन लगाकर बेड की संख्या को 50 से बढ़ाकर 75 कर दिया गया है। 25 और बेड पर पाइपलाइन से आक्सीजन पाइप लाइन लगाने की तैयारी चल रही है। इसके अलावा चुनार और मड़िहान सीएचसी पर 30 बेड को बढ़ाकर 50-50 बेड का कोविड अस्पताल बनाया जा रहा है।