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शिक्षा के बिना विकास संभव नहीं
Mirzapur
Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
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छानबे। शिक्षा एवं विकास दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। शिक्षा के बिना विकास संभव नहीं है। ये बातें विश्व मानव समता परिषद के तत्वावधान में लालापुर स्थित मां त्रिपुर सुंदरी पब्लिक स्कूल में बुधवार को आयोजित ग्रामीण विकास में शिक्षा का महत्व विषयक संगोष्ठी में सीडीओ डा. सुरेंद्र पांडेय ने कहीं। इसके पूर्व उन्होंने संस्था के संस्थापक राम जियावन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया। इस मौके पर तीन सौ निर्धन महिलाओं को वस्त्र प्रदान किए गए।
मुख्य अतिथि डा. सुरेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि शिक्षा एवं विकास दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। शिक्षा के बिना विकास संभव नहीं है। ज्ञान के समान कोई दूसरी वस्तु नहीं है। श्री पांडेय ने कहा कि शिक्षा से भय, भूख एवं भ्रष्टाचार मिटता है। कहा कि शिक्षा ग्रहण करने में शार्ट कट रास्ता कभी भी नहीं अपनाना चाहिए। उन्हाेंने कहा कि अंग्रेजी और भारतीय संस्कार की शिक्षा बच्चों को साथ-साथ दी जानी चाहिए। श्री पांडेय ने कहा कि जो व्यक्ति अपनी भाषा, संस्कृति, जन्मभूमि व घर-परिवार को भूल जाता है, वह समाज से कट जाता है। पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख राजेश नारायण तिवारी ने कहा कि क्षेत्र में इंगलिश मीडियम का यह पहला विद्यालय है और शिक्षा की अलख जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य राजेंद्र प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि गरीबों की सेवा सबसे बड़ी सेवा होती है। खंड विकास अधिकारी दिलीप कुमार सोनकर ने कहा कि शिक्षा के कारण ही लोगों को विकास कार्यक्रमों की जानकारी होती है। प्रबंधक द्वारिका नाथ द्विवेदी ने आभार व्यक्त करते हुए विद्यालय के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजेंद्र प्रसाद दूबे व संचालन ओमप्रकाश उपाध्याय ने किया। इस दौरान अमरनाथ दूबे, ओमप्रकाश उपाध्याय, कर्मेश तिवारी, मालती उपाध्याय, अर्जुन चौबे, रंगनाथ दूबे, सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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मुख्य अतिथि डा. सुरेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि शिक्षा एवं विकास दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। शिक्षा के बिना विकास संभव नहीं है। ज्ञान के समान कोई दूसरी वस्तु नहीं है। श्री पांडेय ने कहा कि शिक्षा से भय, भूख एवं भ्रष्टाचार मिटता है। कहा कि शिक्षा ग्रहण करने में शार्ट कट रास्ता कभी भी नहीं अपनाना चाहिए। उन्हाेंने कहा कि अंग्रेजी और भारतीय संस्कार की शिक्षा बच्चों को साथ-साथ दी जानी चाहिए। श्री पांडेय ने कहा कि जो व्यक्ति अपनी भाषा, संस्कृति, जन्मभूमि व घर-परिवार को भूल जाता है, वह समाज से कट जाता है। पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख राजेश नारायण तिवारी ने कहा कि क्षेत्र में इंगलिश मीडियम का यह पहला विद्यालय है और शिक्षा की अलख जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य राजेंद्र प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि गरीबों की सेवा सबसे बड़ी सेवा होती है। खंड विकास अधिकारी दिलीप कुमार सोनकर ने कहा कि शिक्षा के कारण ही लोगों को विकास कार्यक्रमों की जानकारी होती है। प्रबंधक द्वारिका नाथ द्विवेदी ने आभार व्यक्त करते हुए विद्यालय के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजेंद्र प्रसाद दूबे व संचालन ओमप्रकाश उपाध्याय ने किया। इस दौरान अमरनाथ दूबे, ओमप्रकाश उपाध्याय, कर्मेश तिवारी, मालती उपाध्याय, अर्जुन चौबे, रंगनाथ दूबे, सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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