{"_id":"62-141085","slug":"Mirzapur-141085-62","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमर सिंह ने मां के चरणाें में टेका माथा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमर सिंह ने मां के चरणाें में टेका माथा
Mirzapur
Updated Sun, 05 Oct 2014 05:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विंध्याचल। नवरात्र के दिनाें में केवल मां विंध्यवासिनी का दर्शन पूजन करने आए हैं। मां से अपने तथा बेटी के उज्जवल भविष्य की कामना की है। इसलिए किसी राजनीतिक मुद्दे पर आज बात नहीं करेंगे। यह कहना था सांसद अमर सिंह का। वह रविवार को विंध्याचल में दर्शन-पूजन करने के बाद रविवार को पत्रकाराें से वार्ता कर रहे थे। दोबारा मुलायम सिंह से नजदीकी बढ़ाने के सवाल पर वह चुप्पी साध गए।
अमर सिंह ने रविवार की दोपहर करीब बारह बजे मंदिर बंद होने से पहले मां विंध्यवासिनी का दर्शन पूजन करने पहुंचे। उनको पंडा समाज के पूर्व अध्यक्ष राजन पाठक ने दर्शन पूजन कराया। इसके बाद अमर सिंह फैंस एसोसिएशन के भंडारे में पहुंचे और कन्या पूजन कर लोगाें को प्रसाद वितरण किया। इस दौरान भारी संख्या में लोग प्रसाद ग्रहण करने पहुंचे। पत्रकाराें से बात करते हुए कहा कि राजनेता राशन के लिए भाषण करते हैं। जनता को चाहिए कि उनका भाषण राशन से ही जोड़कर देखें। कहा कि कथनी और करनी में अंतर रखने वाले राजनेता से वह घृणा करते हैं। इस दौरान अमर सिंह फैंस एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय उपाध्याय, मनीष औचित्य, शंकर बिंद, दिनेश्वर त्रिपाठी आदि रहे।
विज्ञापन
अमर सिंह ने रविवार की दोपहर करीब बारह बजे मंदिर बंद होने से पहले मां विंध्यवासिनी का दर्शन पूजन करने पहुंचे। उनको पंडा समाज के पूर्व अध्यक्ष राजन पाठक ने दर्शन पूजन कराया। इसके बाद अमर सिंह फैंस एसोसिएशन के भंडारे में पहुंचे और कन्या पूजन कर लोगाें को प्रसाद वितरण किया। इस दौरान भारी संख्या में लोग प्रसाद ग्रहण करने पहुंचे। पत्रकाराें से बात करते हुए कहा कि राजनेता राशन के लिए भाषण करते हैं। जनता को चाहिए कि उनका भाषण राशन से ही जोड़कर देखें। कहा कि कथनी और करनी में अंतर रखने वाले राजनेता से वह घृणा करते हैं। इस दौरान अमर सिंह फैंस एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय उपाध्याय, मनीष औचित्य, शंकर बिंद, दिनेश्वर त्रिपाठी आदि रहे।
विज्ञापन