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डायरिया से बालिका ने तोड़ा दम
Mirzapur
Updated Fri, 30 May 2014 05:31 AM IST
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मिर्जापुर। जिले में डायरिया की चपेट में आकर मरने वालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को भी जिला चिकित्सालय में उपचार के दौरान शाहगंज सोनभद्र की चार वर्षीय एक और बालिका की मौत हो गई।
सोनभद्र के शाहगंज निवासी अनिल कुमार चार दिन पूर्व ससुराल में शादी पड़ने पर परिवार समेत मड़िहान थाना क्षेत्र के बनदेइया गांव में आया था। बुधवार की रात उसकी चार वर्षीय बेटी अंतरा को उल्टी-दस्त होने लगी। देर रात हालत बिगड़ने पर उसको सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मड़िहान में भर्ती कराया गया। जहां बेहतर इलाज न मिल पाने के कारण परिवार के लोग उसको रेफर करा कर गुरुवार की सुबह जिला चिकित्सालय पहुुंचे। दोपहर बाद उसकी हालत इतनी बिगड़ी कि कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। बताते चलें कि पिछले दो सप्ताह के अंदर डायरिया से यह सातवीं मौत है। आए दिन किसी न किसी के डायरिया की चपेट में आकर मौत होने से लोगाें में धीरे-धीरे भय व्याप्त होने लगा है। आमजन ने गर्मी के मौसम में सरकारी अस्पतालाें में बेहतर इलाज की व्यवस्था कराने की मांग की है। सभी का कहना है कि जिले के सरकारी अस्पतालाें में सबसे पहले डाक्टर ही नहीं मिलते ही है। मिलते भी हैं तो सही तरीके से इलाज नहीं करते हैं। जिससे मरीज की हालत सुधरने की बजाय और बिगड़ जाती है।
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सोनभद्र के शाहगंज निवासी अनिल कुमार चार दिन पूर्व ससुराल में शादी पड़ने पर परिवार समेत मड़िहान थाना क्षेत्र के बनदेइया गांव में आया था। बुधवार की रात उसकी चार वर्षीय बेटी अंतरा को उल्टी-दस्त होने लगी। देर रात हालत बिगड़ने पर उसको सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मड़िहान में भर्ती कराया गया। जहां बेहतर इलाज न मिल पाने के कारण परिवार के लोग उसको रेफर करा कर गुरुवार की सुबह जिला चिकित्सालय पहुुंचे। दोपहर बाद उसकी हालत इतनी बिगड़ी कि कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। बताते चलें कि पिछले दो सप्ताह के अंदर डायरिया से यह सातवीं मौत है। आए दिन किसी न किसी के डायरिया की चपेट में आकर मौत होने से लोगाें में धीरे-धीरे भय व्याप्त होने लगा है। आमजन ने गर्मी के मौसम में सरकारी अस्पतालाें में बेहतर इलाज की व्यवस्था कराने की मांग की है। सभी का कहना है कि जिले के सरकारी अस्पतालाें में सबसे पहले डाक्टर ही नहीं मिलते ही है। मिलते भी हैं तो सही तरीके से इलाज नहीं करते हैं। जिससे मरीज की हालत सुधरने की बजाय और बिगड़ जाती है।
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