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सतगुरु नानक प्रगटिया मिटी धुंध...
Mirzapur
Updated Mon, 18 Nov 2013 05:41 AM IST
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मिर्जापुर। सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरुनानक देव जी का 554 वां प्रकाशोत्सव रविवार को श्रद्धा पूर्वक मनाया गया। नगर के रतनगंज स्थित गुरुद्वारा श्रीगुरु सिंह सभा की सजावट देखते ही बन रही थी। गुरुद्वारे में प्रात:काल निशान साहब की सेवा के उपरांत रागी जत्था ने शबद-कीर्तन किया गया। गुरुद्वारा परिसर में अटूट लंगर में बड़ी संख्या में लोगों ने लंगर ग्रहण किया।
नगर के रतनगंज स्थित गुरुद्वारा श्रीगुरु सिंह सभा शबद-कीर्तन के प्रवाह के साथ ही गुरुबानी गाई गई। इस अवसर पर यमुना नगर से पधारे ज्ञानी हरजीत सिंह जी के जत्थे एवं गुरुनानक इंटर कालेज व गुरुनानक गर्ल्स इंटर के बच्चों ने शबद-कीर्तन किया। रागी जत्थे ज्ञानी हरजीत सिंह जी ने- सत्गुरु नानक प्रगटिया मिटी धुंध जग चानण होवा..प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। गुरुद्वारे में शुक्रवार से चल रहे अखंड पाठ का समापन भी रविवार को हुआ। कार्यक्रम के दौरान सिख समाज के लोगों ने श्री गुरुनानक देव जी के जीवन मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। अरदास के उपरांत कार्यक्रम की समाप्ति पर आयोजित लंगर में सिख समुदाय के लोगों के साथ ही अन्य समुदाय के लोगों ने लंगर ग्रहण किया। जयंती समारोह में बड़ी संख्या में सिख समाज के नर-नारी व बच्चे उत्साह पूर्वक शामिल हुए। गुरुद्वारा श्री गुरुसिंह सभा के सचिव सरजीत सिंह ने कहा कि सूर्य स्वरूप जगद्गुरु नानकदेव जी का जन्म राईभोइ की तलवंडी, जो अब ननकाना साहिब के नाम से प्रसिद्ध है, में हुआ था। गुरुनानक देव जी का मन सदा ईश्वर की ओर ही लगा रहता था। उन्होंने सांसारिक काम छोड़ दिया और ईश्वर की उपासना में लग गए। इस दौरान अध्यक्ष चरनजीत सिंह सोखी, धरमपाल सिंह सरना, जसवंत सिंह सरना, जगजीत सिंह, जसविंदर सिंह, बलविंदर सिंह, गुरुमिंदर सिंह सरना, सुरजीत कौर, जसवंत कौर सहित बड़ी संख्या में सिख समाज के लोग उपस्थित रहे।
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नगर के रतनगंज स्थित गुरुद्वारा श्रीगुरु सिंह सभा शबद-कीर्तन के प्रवाह के साथ ही गुरुबानी गाई गई। इस अवसर पर यमुना नगर से पधारे ज्ञानी हरजीत सिंह जी के जत्थे एवं गुरुनानक इंटर कालेज व गुरुनानक गर्ल्स इंटर के बच्चों ने शबद-कीर्तन किया। रागी जत्थे ज्ञानी हरजीत सिंह जी ने- सत्गुरु नानक प्रगटिया मिटी धुंध जग चानण होवा..प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। गुरुद्वारे में शुक्रवार से चल रहे अखंड पाठ का समापन भी रविवार को हुआ। कार्यक्रम के दौरान सिख समाज के लोगों ने श्री गुरुनानक देव जी के जीवन मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। अरदास के उपरांत कार्यक्रम की समाप्ति पर आयोजित लंगर में सिख समुदाय के लोगों के साथ ही अन्य समुदाय के लोगों ने लंगर ग्रहण किया। जयंती समारोह में बड़ी संख्या में सिख समाज के नर-नारी व बच्चे उत्साह पूर्वक शामिल हुए। गुरुद्वारा श्री गुरुसिंह सभा के सचिव सरजीत सिंह ने कहा कि सूर्य स्वरूप जगद्गुरु नानकदेव जी का जन्म राईभोइ की तलवंडी, जो अब ननकाना साहिब के नाम से प्रसिद्ध है, में हुआ था। गुरुनानक देव जी का मन सदा ईश्वर की ओर ही लगा रहता था। उन्होंने सांसारिक काम छोड़ दिया और ईश्वर की उपासना में लग गए। इस दौरान अध्यक्ष चरनजीत सिंह सोखी, धरमपाल सिंह सरना, जसवंत सिंह सरना, जगजीत सिंह, जसविंदर सिंह, बलविंदर सिंह, गुरुमिंदर सिंह सरना, सुरजीत कौर, जसवंत कौर सहित बड़ी संख्या में सिख समाज के लोग उपस्थित रहे।
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