{"_id":"5bdc965ebdec2269827d4e52","slug":"91541183070-mirzapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कवि सम्मेलन में कविताओं की धार ने मोहा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कवि सम्मेलन में कविताओं की धार ने मोहा
Updated Fri, 02 Nov 2018 11:58 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जमालपुर (मिर्जापुर)। क्षेत्र के डोहरी गांव के पंचायत भवन पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें रचनाकारों ने अपनी उम्दा प्रस्तुतियों से श्रोताओं को तालियां बटोरीं। कवि सम्मेलन के दौरान जहां कवियों ने अपनी कविताओं से समाज में व्याप्त कुरीतियों पर प्रहार किया, वहीं समाज की ज्वलंत समस्या को भी निशाना बनाया। इस मौके पर आसपास के इलाकों से आए श्रोताओं ने खूब आनंद लिया। कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि चंद्रभान सिंह ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
सम्मेलन का शुभारंभ कवि मनोज द्विवेदी मधुर ने वाणी वंदना प्रस्तुत कर किया। तत्पश्चात कवि नरसिंह साहसी ने अपनी कविता से पाकिस्तान पर वार किया। इसी क्रम में कवि बंधुपाल बंधु ने- घरवाली जब से प्रधान हो गईल अब जियब दुश्वार हो गईल.. सुनाकर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। रचनाकार डॉ. सुरेंद्र सिंह ने- सूबे सरहद मुझे जाने दे.. प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी। कवि फारूख सरवाली ने- कश्मीर दे नहीं सकते जागीर दे नहीं सकते.. सुनाकर देश भक्ति की भावना को जागृत कर दिया। कवि सुरेंद्र मिश्र अंकुर ने हास्य कविता सुनाकर श्रोताओं को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। इसी क्रम में कवि साहिल मिर्जापुरी सहित राजेश कुमार, सलीम आदि कवियों ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं की वाहवाही लूटी। संचालन कमलेश्वर प्रसाद कमल ने किया। सभी कवियों का स्वागत मुख्य अतिथि द्वारा अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिह्न देकर किया गया। इस दौरान ज्ञान सिंह, पुणेंदु मिश्रा, विनित त्रिपाठी, अभय सिंह, अमरनाथ सिंह, ज्ञानधर त्रिपाठी, रविशंकर त्रिपाठी, बब्बन सिंह सहित तमाम गणमान्य मौजूद रहे।
विज्ञापन
सम्मेलन का शुभारंभ कवि मनोज द्विवेदी मधुर ने वाणी वंदना प्रस्तुत कर किया। तत्पश्चात कवि नरसिंह साहसी ने अपनी कविता से पाकिस्तान पर वार किया। इसी क्रम में कवि बंधुपाल बंधु ने- घरवाली जब से प्रधान हो गईल अब जियब दुश्वार हो गईल.. सुनाकर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। रचनाकार डॉ. सुरेंद्र सिंह ने- सूबे सरहद मुझे जाने दे.. प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी। कवि फारूख सरवाली ने- कश्मीर दे नहीं सकते जागीर दे नहीं सकते.. सुनाकर देश भक्ति की भावना को जागृत कर दिया। कवि सुरेंद्र मिश्र अंकुर ने हास्य कविता सुनाकर श्रोताओं को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। इसी क्रम में कवि साहिल मिर्जापुरी सहित राजेश कुमार, सलीम आदि कवियों ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं की वाहवाही लूटी। संचालन कमलेश्वर प्रसाद कमल ने किया। सभी कवियों का स्वागत मुख्य अतिथि द्वारा अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिह्न देकर किया गया। इस दौरान ज्ञान सिंह, पुणेंदु मिश्रा, विनित त्रिपाठी, अभय सिंह, अमरनाथ सिंह, ज्ञानधर त्रिपाठी, रविशंकर त्रिपाठी, बब्बन सिंह सहित तमाम गणमान्य मौजूद रहे।
विज्ञापन