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भागवत कथा श्रवण मात्र से मनुष्य जन्म मृत्यु भय के बंधन से मुक्त हो जाता है

Thu, 01 Nov 2018 12:17 AM IST
Updated Thu, 01 Nov 2018 12:17 AM IST
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भागवत कथा श्रवण मात्र से मनुष्य जन्म मृत्यु भय के बंधन से मुक्त हो जाता है

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सीखड़। अदलपुरा के (साक्षी वाटिका) में चल रहे भागवत कथा के पहले दिन वृंदावन धाम से आए कथावाचक पं अनिरुद्धाचार्य जी महाराज की संगीतमय कथा सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। कथा का रसपान कराते हुए उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत ग्रंथ प्रेमाश्रुसक्ति नेत्र, परम रसज्ञ श्री शुकदेव जी के मुख से उद्रीत हुआ है। भागवत कथा सुनने से मनुष्य जन्म- मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है।

कथावाचक ने कहा मन की शुद्धि के लिए भगवत कथा से बढ़कर कोई साधन नहीं है। यह कथा देवताओं को भी दुर्लभ है। परीक्षित जी की सभा में शुकदेव जी ने कथामृत के बदले अमृत कलश नहीं लिया। कहा कि भगवान सत्य है। जिसका कभी नाश न हो वही सत्य है। सुदामा शृष्टि के सबसे अमीर व्यक्ति थे, जिसके पैर स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने धोए। इस अवसर तपेस यादव जिला पंचायत सदस्य, अजय सोनकर प्रधान, विजय शंकर सिंह , प्रधान ममता सिंह, रेखा सिंह, मनोज सिंह, जैन सिंह, राजू सिंह, ज्ञान धर शुक्ला, आजाद उपाध्याय, प्रदीप यादव, बृज मोहन जयसवाल, डॉ अजय सिंह आदि भारी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।
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