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हवाओं के शहर में दीप हमने भी जलाया है...
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मिर्जापुर। साहित्यिक संस्था आराधना मिर्जापुर की ओर से नगर के लाल डिग्गी स्थित गैलेक्सी पवेलियन में सोमवार को काव्य संध्या का आयोजन किया गया। साहित्यकार स्व. बनारसी लाल पंकज की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में ख्यातिलब्ध कवियों व शायरों ने अपनी उत्कृष्ट पेशकश से समां बांध दिया। रचनाकारों ने अपनी धारदार रचनाओं से सबका मन मोह लिया।
काव्य संध्या का शुभारंभ कवयित्री नंदिनी वर्मा ने वाणी वंदना से किया। अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार अनुज प्रताप सिंह ने, घूंघट के भीतर की बातें पनघट जान गया... सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। विशिष्ट अतिथि विंध्य सेवा मंच के प्रबंधक त्रियोगी मिट्ठू मिश्र ने, सारे कमरे बांट लिए बेटों ने बटवारे में... पेश कर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार बृजदेव पांडेय ने, सफेद होना ही सफेद होने की गारंटी नहीं होता... पेश कर वाहवाही लूटी शायर जफर मिर्जापुरी ने, दिल को किसी ने शहगुजर कह दिया... पेश कर समां बांध दिया। वहीं, वरिष्ठ गीतकार गणेश गंभीर ने, मोहब्बत में मोहब्बत की अभी तासीर बाकी है.. सुनाकर कार्यक्रम को एक आयाम दिया। कवि लल्लू तिवारी ने, अब उठती नहीं मन में कोई लहर... सुनाया। इनके अलावा कवि भोलानाथ कुशवाहा, प्रमोद कुमार सुमन, ने भी कविताएं सुर्नाइं। संचालन करते हुुए अरविंद अवस्थी ने, हवाओं के शहर में दीप हमने भी जलाया है.. सुनाकर सभी की खूब वाहवाही लूटी। इनके अलावा शायर मुहिब, इरफान कुरैशी, कवि सूर्य नारायण सूर, शुभम श्रीवास्तव, शिव प्रसाद द्विवेदी, अमित दूबे, बृजेश सेठ, हेलाल मिर्जापुरी, अताउल्लाह सिद्दीकी ने भी अपनी पेशकश से तालियां बटोरी। अंत में आयोजक वीरेंद्र श्रीवास्तव ने सभी के प्रति आभार जताया।
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काव्य संध्या का शुभारंभ कवयित्री नंदिनी वर्मा ने वाणी वंदना से किया। अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार अनुज प्रताप सिंह ने, घूंघट के भीतर की बातें पनघट जान गया... सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। विशिष्ट अतिथि विंध्य सेवा मंच के प्रबंधक त्रियोगी मिट्ठू मिश्र ने, सारे कमरे बांट लिए बेटों ने बटवारे में... पेश कर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार बृजदेव पांडेय ने, सफेद होना ही सफेद होने की गारंटी नहीं होता... पेश कर वाहवाही लूटी शायर जफर मिर्जापुरी ने, दिल को किसी ने शहगुजर कह दिया... पेश कर समां बांध दिया। वहीं, वरिष्ठ गीतकार गणेश गंभीर ने, मोहब्बत में मोहब्बत की अभी तासीर बाकी है.. सुनाकर कार्यक्रम को एक आयाम दिया। कवि लल्लू तिवारी ने, अब उठती नहीं मन में कोई लहर... सुनाया। इनके अलावा कवि भोलानाथ कुशवाहा, प्रमोद कुमार सुमन, ने भी कविताएं सुर्नाइं। संचालन करते हुुए अरविंद अवस्थी ने, हवाओं के शहर में दीप हमने भी जलाया है.. सुनाकर सभी की खूब वाहवाही लूटी। इनके अलावा शायर मुहिब, इरफान कुरैशी, कवि सूर्य नारायण सूर, शुभम श्रीवास्तव, शिव प्रसाद द्विवेदी, अमित दूबे, बृजेश सेठ, हेलाल मिर्जापुरी, अताउल्लाह सिद्दीकी ने भी अपनी पेशकश से तालियां बटोरी। अंत में आयोजक वीरेंद्र श्रीवास्तव ने सभी के प्रति आभार जताया।
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