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सम्मान पूर्वक मनाया गया गुरू तेग बहादुर का शहीदी पर्व
Updated Thu, 23 Nov 2017 11:50 PM IST
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मिर्जापुर। रतनगंज स्थित गुुुरूद्वारा में गुरुवार को गुरू तेग बहादुर का शहीदी पर्व मनाया गया। इस अवसर पर गुरुद्वारे में सुबह से ही अखंड पाठ साहेब की समाप्ति के बाद ज्ञानी अजमेर सिंह द्वारा शबद कीर्तन किया गया। गुरुद्वारा के प्रधान जसबीर सिंह चड़योक ने गुरू तेग बहादुर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब औरंगजेब अपने शासन काल में जुल्म की सारी हदें पार कर चुका था, तब कश्मीर के पंडितों ने गुरू साहेब के पास जाकर धर्म की रक्षा की गुहार लगाई थी।
गुरू ने कहा कि जब कोई तपी, सत्यवादी, धार्मिक पुरूष, अपना बलिदान देगा तभी जुल्म रुक सकता है। पास खड़े गुरू गोविंद सिंह ने कहा कि आपसे बड़ा तपस्वी कौन हो सकता है। यह सुन कर वह प्रसन्न हो गए, उन्होंने कहा कि औरंगजेब से बोला जाय कि गुरू तेग बहादुर का धर्म परिवर्तन करा दिया जाय तो कायनात मुसलमान बन जाएगी। यह सुनकर औरंगजेब ने उन्हें गिरफ्तार करवा लिया तथा उनके सामने ही चार शिष्यों का बलिदान कर दिया। मुगलिया हुकूमत धर्म बदलने के लिए सारी हदें पार कर चुकी थी। औरंगजेब खुद लालकिले से चल कर चांदनी चौक आया और उसने फतवा जारी कर दिया। जल्लाद की तलवार चली और गुरू तेग बहादुर शहीद हो गए । इतिहास का यह ऐसा पहला मोड़ था जो पूरे हिंदुस्तान का भविष्य बदल चुका था। इस तरह से गुरू जी ने अपना बलिदान देकर हिंदू धर्म की रक्षा की। शहीदी पर्व के अवसर पर अटूट लंगर वितरित किया गया। इस मौके पर खजांची रविंद्र सिंह सलूजा एवं साध संगत शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन सचिव हरदीप सिंह खुराना ने किया।
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गुरू ने कहा कि जब कोई तपी, सत्यवादी, धार्मिक पुरूष, अपना बलिदान देगा तभी जुल्म रुक सकता है। पास खड़े गुरू गोविंद सिंह ने कहा कि आपसे बड़ा तपस्वी कौन हो सकता है। यह सुन कर वह प्रसन्न हो गए, उन्होंने कहा कि औरंगजेब से बोला जाय कि गुरू तेग बहादुर का धर्म परिवर्तन करा दिया जाय तो कायनात मुसलमान बन जाएगी। यह सुनकर औरंगजेब ने उन्हें गिरफ्तार करवा लिया तथा उनके सामने ही चार शिष्यों का बलिदान कर दिया। मुगलिया हुकूमत धर्म बदलने के लिए सारी हदें पार कर चुकी थी। औरंगजेब खुद लालकिले से चल कर चांदनी चौक आया और उसने फतवा जारी कर दिया। जल्लाद की तलवार चली और गुरू तेग बहादुर शहीद हो गए । इतिहास का यह ऐसा पहला मोड़ था जो पूरे हिंदुस्तान का भविष्य बदल चुका था। इस तरह से गुरू जी ने अपना बलिदान देकर हिंदू धर्म की रक्षा की। शहीदी पर्व के अवसर पर अटूट लंगर वितरित किया गया। इस मौके पर खजांची रविंद्र सिंह सलूजा एवं साध संगत शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन सचिव हरदीप सिंह खुराना ने किया।
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