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मनरेगा मजदूरों को काम के लिए नही पड़ेगा भटकना
Updated Sun, 15 Apr 2018 11:36 PM IST
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मिर्जापुर। सूखा प्रभावित गांवों में मनरेगा मजदूरों को अब काम के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। अब उन्हें ग्राम पंचायत में ही काम दिया जाएगा। इसके लिए प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने जिलाधिकारी को निर्देश दिया है।
जनपद में सूखे की स्थिति से निपटने के साथ ही गांव में ग्रामीणों को काम दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए शासन ने कवायद शुरू कर दी गई है। शासन मनरेगा मजदूरों की समस्या को ध्यान में रखते हुए काम उपलब्ध कराएगी। मनरेगा योजना के तहत वनीकरण, वन संरक्षण, भूमि विकास, पौधरोपण, नर्सरी स्थापना आदि कार्य कराए जाएंगे। प्रमुख सचिव ने कहा कि जॉब कार्डधारक और इच्छुक मनरेगा मजदूरों को मांग के अनुसार काम दिलाया जाए। मनरेगा उपायुक्त अनय कुमार मिश्र ने बताया कि मनरेगा योजना के तहत जॉब कार्डधारकों को गांव में ही रोजगार दिलाया जा रहा है। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर काम शुरू कराया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को रोजगार के लिए गांव से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
गर्मी में पशुपालकों को पशुओं के लिए चारे के संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। मनरेगा योजना के तहत गांवों में चारागाह की व्यवस्था की जा रही है। मनरेगा व ग्राम्य विकास विभाग के माध्यम से चारागाह का विकास और पशु आश्रय स्थल बनाया जाएगा। उपायुक्त मनरेगा अनय कुमार मिश्र ने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार डेयरी, भूमि विकास, चारागाह का कार्य मनरेगा के तहत कराया जाएगा। कार्यों के बेहतर वित्तीय प्रबंधन के लिए मनरेगा एवं 14वें वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग, वन विभाग, उद्यान विभाग, पशुपालन विभाग, कृषि विभाग के तहत उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के माध्यम से कार्य कराया जाएगा। पशुधन संवर्धन के क्षेत्र में कुक्कुट, बकरी, सुकर आश्रय बनाए जाएंगे और चारागाह की व्यवस्था होगी।
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सीडीओ प्रियंका निरंजन ने कहा कि पेयजल व्यवस्था की जा रही है।गांव में ही ग्रामीणों को मनरेगा के तहत रोजगार और पशुओं के लिए चारागाह की व्यवस्था हो रही है। मनरेगा के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक काम अवश्य कराने का निर्देश दिया गया है, जिससे ग्रामीणों को रोजगार मिल सके।
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जनपद में सूखे की स्थिति से निपटने के साथ ही गांव में ग्रामीणों को काम दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए शासन ने कवायद शुरू कर दी गई है। शासन मनरेगा मजदूरों की समस्या को ध्यान में रखते हुए काम उपलब्ध कराएगी। मनरेगा योजना के तहत वनीकरण, वन संरक्षण, भूमि विकास, पौधरोपण, नर्सरी स्थापना आदि कार्य कराए जाएंगे। प्रमुख सचिव ने कहा कि जॉब कार्डधारक और इच्छुक मनरेगा मजदूरों को मांग के अनुसार काम दिलाया जाए। मनरेगा उपायुक्त अनय कुमार मिश्र ने बताया कि मनरेगा योजना के तहत जॉब कार्डधारकों को गांव में ही रोजगार दिलाया जा रहा है। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर काम शुरू कराया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को रोजगार के लिए गांव से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
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गर्मी में पशुपालकों को पशुओं के लिए चारे के संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। मनरेगा योजना के तहत गांवों में चारागाह की व्यवस्था की जा रही है। मनरेगा व ग्राम्य विकास विभाग के माध्यम से चारागाह का विकास और पशु आश्रय स्थल बनाया जाएगा। उपायुक्त मनरेगा अनय कुमार मिश्र ने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार डेयरी, भूमि विकास, चारागाह का कार्य मनरेगा के तहत कराया जाएगा। कार्यों के बेहतर वित्तीय प्रबंधन के लिए मनरेगा एवं 14वें वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग, वन विभाग, उद्यान विभाग, पशुपालन विभाग, कृषि विभाग के तहत उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के माध्यम से कार्य कराया जाएगा। पशुधन संवर्धन के क्षेत्र में कुक्कुट, बकरी, सुकर आश्रय बनाए जाएंगे और चारागाह की व्यवस्था होगी।
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सीडीओ प्रियंका निरंजन ने कहा कि पेयजल व्यवस्था की जा रही है।गांव में ही ग्रामीणों को मनरेगा के तहत रोजगार और पशुओं के लिए चारागाह की व्यवस्था हो रही है। मनरेगा के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक काम अवश्य कराने का निर्देश दिया गया है, जिससे ग्रामीणों को रोजगार मिल सके।