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आयुर्वेद व योग से ही मिलेगी असंक्रामक बिमारियों से मुक्ति: वीके शुक्ला
Updated Sun, 08 Apr 2018 11:43 PM IST
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मिर्जापुर। आयुर्वेद और योग के जरिये हम स्वस्थ जीवन जी सकते है। साथ ही कई असंक्रामक बीमारियों से भी बचाव कर सकते हैं। ये बातें मुख्य अतिथि व चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. वीके शुक्ला ने बीएचयू के बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर के व्याख्यान संकुल में बीएचयू आयुर्वेद संकाय की ओर से आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के पहले दिन रविवार को कहीं। इसमें आयुर्वेद एवं योग में समकालीन प्रगति व आगामी दृष्टिकोण विषय पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। विशिष्ट अतिथि कैमरून विश्वविद्यालय के प्रो. कैनेथ अनचांग योंगाबी रहे।
इस दौरान मुख्य अतिथि डा. वीके शुक्ला ने स्मारिका और विवरणिका का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि विश्व में प्रत्येक वर्ष लगभग तीन करोड़ लोगों की मौत असंक्रामक बीमारियों की वजह से होती है। इसका मुख्य कारण बदली जीवन शैली और असंतुलित आहार है। आयुर्वेद और योग के जरिये हम पुरातन काल से प्रचलित परंपरागत पोषक तत्वों प्राप्त करते हुए स्वस्थ्य जीवन जी सकते हैं। साथ ही असंक्रामक बीमारियों से भी निदान पा सकते हैं। अध्यक्षता आचार्य प्रभारी प्रो. साकेत कुशवाहा ने कहा कि उन्नत और वैज्ञानिक कृषि प्रणाली में हर्बल उत्पादों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इससे विभिन्न जड़ी और औषधीय पौधों का उत्पादन किया जा सकता है। आयुर्वेद व योग में उद्यमिता विकास की आवश्यकता पर बल दिया। कहा कि चिकित्सा विज्ञान संस्थान एवं कृषि विज्ञान संस्थान की ओर से इसके लिए प्रयास करना चाहिए। विशिष्ट अतिथि प्रो. कैनेथ अनचांग योंगाबी ने कहा कि भारत की पहचान आयुर्वेद और योग से है। कहा कि कैमरून और भारत संयुक्त रूप से विभिन्न औषधीय पौधों का परीक्षण कर परंपरागत ज्ञान से लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। आयुर्वेद संकाय प्रमुख प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी ने कहा कि जटिल बीमारियों की चिकित्सा के लिए बहुआयामी चिकित्सा व्यवस्था की आवश्यकता है। आयुर्वेद शारीरिक क्रियाओं को संतुलित करने के लिए दिनचर्या, खानपान और योग के जरिये शरीर स्वस्थ बना रहता है। कार्यक्रम संयोजक डा. देवनाथ सिंह गौतम ने आगंतुकों का स्वागत किया। इस दौरान डा. मनोज कुमार सिंह, डा.बीएमएन कुमार, डा. एमके नंदी, डा. अश्वनी कुशवाहा, नवीन कुमार पांडेय, डा. नरेंद्र कुमार, अंबरीश, सुचेता मंडल, दीपा आदि मौजूद रहे।
बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में देश विदेश के लगभग 400 प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। प्रतिभागी आयुर्वेद एवं योग में समकालीन प्रगति व आगामी दृष्टिकोण विषय पर अपने विचार रखेंगे। इस दौरान आयुर्वेद और योग से संबंधित 100 शोध पत्र भी प्रस्तुत किए जाएंगे।
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इस दौरान मुख्य अतिथि डा. वीके शुक्ला ने स्मारिका और विवरणिका का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि विश्व में प्रत्येक वर्ष लगभग तीन करोड़ लोगों की मौत असंक्रामक बीमारियों की वजह से होती है। इसका मुख्य कारण बदली जीवन शैली और असंतुलित आहार है। आयुर्वेद और योग के जरिये हम पुरातन काल से प्रचलित परंपरागत पोषक तत्वों प्राप्त करते हुए स्वस्थ्य जीवन जी सकते हैं। साथ ही असंक्रामक बीमारियों से भी निदान पा सकते हैं। अध्यक्षता आचार्य प्रभारी प्रो. साकेत कुशवाहा ने कहा कि उन्नत और वैज्ञानिक कृषि प्रणाली में हर्बल उत्पादों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इससे विभिन्न जड़ी और औषधीय पौधों का उत्पादन किया जा सकता है। आयुर्वेद व योग में उद्यमिता विकास की आवश्यकता पर बल दिया। कहा कि चिकित्सा विज्ञान संस्थान एवं कृषि विज्ञान संस्थान की ओर से इसके लिए प्रयास करना चाहिए। विशिष्ट अतिथि प्रो. कैनेथ अनचांग योंगाबी ने कहा कि भारत की पहचान आयुर्वेद और योग से है। कहा कि कैमरून और भारत संयुक्त रूप से विभिन्न औषधीय पौधों का परीक्षण कर परंपरागत ज्ञान से लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। आयुर्वेद संकाय प्रमुख प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी ने कहा कि जटिल बीमारियों की चिकित्सा के लिए बहुआयामी चिकित्सा व्यवस्था की आवश्यकता है। आयुर्वेद शारीरिक क्रियाओं को संतुलित करने के लिए दिनचर्या, खानपान और योग के जरिये शरीर स्वस्थ बना रहता है। कार्यक्रम संयोजक डा. देवनाथ सिंह गौतम ने आगंतुकों का स्वागत किया। इस दौरान डा. मनोज कुमार सिंह, डा.बीएमएन कुमार, डा. एमके नंदी, डा. अश्वनी कुशवाहा, नवीन कुमार पांडेय, डा. नरेंद्र कुमार, अंबरीश, सुचेता मंडल, दीपा आदि मौजूद रहे।
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बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में देश विदेश के लगभग 400 प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। प्रतिभागी आयुर्वेद एवं योग में समकालीन प्रगति व आगामी दृष्टिकोण विषय पर अपने विचार रखेंगे। इस दौरान आयुर्वेद और योग से संबंधित 100 शोध पत्र भी प्रस्तुत किए जाएंगे।
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