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15 चिकित्सक समेत 46 कर्मचारी मिले अनुपस्थित
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मिर्जापुर। मंडलायुक्त योगेश्वर राम मिश्र ने बुधवार की सुबह आठ बजे मंडलीय चिकित्सालय पहुंचकर औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने एक-एक चिकित्सक के कक्ष व लैब टेक्नीशियन कक्ष सहित सभी कमरों का निरीक्षण किया। उपस्थिति पंजिका में चिकित्सकों व अन्य स्टाफ के उपस्थित की जांच की। पंजिका के निरीक्षण के दौरान 15 चिकित्सक सहित कुल 46 स्वास्थ्य कर्मी अनुपस्थित पाए गए। जिसमें कुछ चिकित्सकों व कर्मचारियों ने उपस्थिति पंजिका में एक अप्रैल से अभी तक हस्ताक्षर ही नहीं बनाया है।
आयुक्त सुबह आठ बजे मंडलीय अस्पताल पहुंचे। सबसे पहले इमरजेंसी कक्ष में गए। वहां पर स्टाफ को यूनिफार्म में रहने की नसीहत दी। इसके बाद विभिन्न ओपीडी कक्ष का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकांश ओपीडी कक्ष में डाक्टर नहीं थे। जो आए थे वे वार्ड में राउंड पर थे। आयुक्त ने मरीज पंजीकरण कक्ष के सामने लगी लाइन व ओपीडी कक्ष के पास बैठे उपस्थित मरीजों के परिजनों से वार्ता की। वार्डों में जाकर एक-एक मरीज से अस्पताल में मिल रही सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। इसके बाद चिकित्सकों के उपस्थिति पंजिका का निरीक्षण किया। इस दौरान डॉ. राज कुमार, डॉ. एके सिन्हा, डॉ. एसके नायक, डॉ. केएन पाण्डेय, डॉ. अनुराग पटेल, डॉ. घनश्याम रमन, डॉ. महेन्द्र कुमार, डॉ. शिव शंकर पाण्डेय, डॉ. नन्दलाल, डॉ. विद्या कुशवाहा, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. पंकज रणधीर, डॉ. खुशबू शिखांगी, डॉ. किरन गुप्ता अनुपस्थित पाए गए। जिसमें से डॉ. नन्दलाल पिछले चार दिन, डॉ. विद्या कुशवाहा दो दिन, डॉ. पंकज कुमार चार दिन, पंकज रणधीर ने दो दिन से रजिस्टर में हस्ताक्षर नहीं बनाया था। डॉ. एसके सिन्हा व डॉ. एसके नायक ने एक, दो, चार, पांच व छह अप्रैल को हस्ताक्षर नहीं बनाया था। इसके अलावा अन्य स्टाफ अनुपस्थित रहे। आयुक्त ने इस लापरवाही पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्य अधीक्षक मंडलीय चिकित्सालय एवं अपर निदेशक स्वास्थ्य को निर्देशित किया कि अनुपस्थित कर्मियों से स्पष्टीकरण प्राप्त करते हुए विभागीय कार्रवाई करें। कहा कि बड़ी संख्या में अनुपस्थित कर्मियों व चिकित्सकों से प्रतीत होता है कि इन कर्मियों व चिकित्सकों द्वारा घोर लापरवाही बरती जा रही है। इसे शासन को पत्राचार कर अवगत कराया जाएगा।
विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर भी उठे सवाल
मिर्जापुर। कमिश्नर के औचक निरीक्षण में न केवल स्वास्थ्यकर्मियों की बड़े पैमाने पर मनमानी सामने आई बल्कि जिले में स्वास्थ्य महकमे में व्यवस्था व सुविधा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लग गया। मंडलीय अस्पताल से लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की लंबी लिस्ट है। बावजूद इसके कमिश्नर को औचक निरीक्षण करना पड़ा। जिसमें बड़ी संख्या में लोग काम से नदारद मिले। जांच से जाहिर है कि यह अव्यवस्था लंबे समय से चली आ रही थी पर जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। मरीजों की परेशानी और शिकायत जब कमिश्नर के पास पहुंची तो उन्होंने अचानक निरीक्षण किया।
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आयुक्त सुबह आठ बजे मंडलीय अस्पताल पहुंचे। सबसे पहले इमरजेंसी कक्ष में गए। वहां पर स्टाफ को यूनिफार्म में रहने की नसीहत दी। इसके बाद विभिन्न ओपीडी कक्ष का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकांश ओपीडी कक्ष में डाक्टर नहीं थे। जो आए थे वे वार्ड में राउंड पर थे। आयुक्त ने मरीज पंजीकरण कक्ष के सामने लगी लाइन व ओपीडी कक्ष के पास बैठे उपस्थित मरीजों के परिजनों से वार्ता की। वार्डों में जाकर एक-एक मरीज से अस्पताल में मिल रही सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। इसके बाद चिकित्सकों के उपस्थिति पंजिका का निरीक्षण किया। इस दौरान डॉ. राज कुमार, डॉ. एके सिन्हा, डॉ. एसके नायक, डॉ. केएन पाण्डेय, डॉ. अनुराग पटेल, डॉ. घनश्याम रमन, डॉ. महेन्द्र कुमार, डॉ. शिव शंकर पाण्डेय, डॉ. नन्दलाल, डॉ. विद्या कुशवाहा, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. पंकज रणधीर, डॉ. खुशबू शिखांगी, डॉ. किरन गुप्ता अनुपस्थित पाए गए। जिसमें से डॉ. नन्दलाल पिछले चार दिन, डॉ. विद्या कुशवाहा दो दिन, डॉ. पंकज कुमार चार दिन, पंकज रणधीर ने दो दिन से रजिस्टर में हस्ताक्षर नहीं बनाया था। डॉ. एसके सिन्हा व डॉ. एसके नायक ने एक, दो, चार, पांच व छह अप्रैल को हस्ताक्षर नहीं बनाया था। इसके अलावा अन्य स्टाफ अनुपस्थित रहे। आयुक्त ने इस लापरवाही पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्य अधीक्षक मंडलीय चिकित्सालय एवं अपर निदेशक स्वास्थ्य को निर्देशित किया कि अनुपस्थित कर्मियों से स्पष्टीकरण प्राप्त करते हुए विभागीय कार्रवाई करें। कहा कि बड़ी संख्या में अनुपस्थित कर्मियों व चिकित्सकों से प्रतीत होता है कि इन कर्मियों व चिकित्सकों द्वारा घोर लापरवाही बरती जा रही है। इसे शासन को पत्राचार कर अवगत कराया जाएगा।
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विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर भी उठे सवाल
मिर्जापुर। कमिश्नर के औचक निरीक्षण में न केवल स्वास्थ्यकर्मियों की बड़े पैमाने पर मनमानी सामने आई बल्कि जिले में स्वास्थ्य महकमे में व्यवस्था व सुविधा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लग गया। मंडलीय अस्पताल से लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की लंबी लिस्ट है। बावजूद इसके कमिश्नर को औचक निरीक्षण करना पड़ा। जिसमें बड़ी संख्या में लोग काम से नदारद मिले। जांच से जाहिर है कि यह अव्यवस्था लंबे समय से चली आ रही थी पर जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। मरीजों की परेशानी और शिकायत जब कमिश्नर के पास पहुंची तो उन्होंने अचानक निरीक्षण किया।
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