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वृद्घ की मौत पर भड़के मानवाधिकार एवं मिर्जापुर सेवा समिति लोग
Updated Wed, 08 Aug 2018 01:16 AM IST
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मिर्जापुर। रेलवे स्टेशन के बाहर मिले 65 वर्षीय अज्ञात वृद्ध की समय से इलाज की सुविधा नहीं मिलने से हुई मौत मामले में भारतीय मानवाधिकार एवं मिर्जापुर सेवा समिति के लोगों ने नाराजगी जताई। दोनों संगठनों ने जिला मुख्यालय पर वृद्ध का शव रखकर प्रदर्शन किया और जिला अस्पताल में अनियमितता का आरोप लगाया। कहा कि वृद्ध को ले जाने के लिए सूचना दी गई लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। मंगलवार की सुबह जब वृद्ध को जिला चिकित्सालय ले जाया गया तो चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सुनील कुमार मिश्र को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते एक वृद्ध की इलाज के अभाव में मौत हुई। इसकी जांच कर दोषियों के विरुद्घ कार्रवाई की जाए। साथ ही वृद्ध का दाहसंस्कार कराया जाए।
मिर्जापुर सेवा समिति के संयोजक दिलीप सिंह गहरवार ने बताया कि 65 वर्षीय एक अज्ञात वृद्ध काफी बीमार चल रहा था। जो रेलवे स्टेशन पर रहता था। जिसे वहां की पुलिस ने कुछ दिन पूर्व भगा दिया था। इसके चलते वह स्टेशन के बाहर पार्क के पास खुले आसमान के नीचे भूखे प्यासा रहता था। सोमवार को मिर्जापुर न्यायालय के दो न्यायिक अधिकारी दिल्ली जा रहे थे। जिन्होंने वृद्घ को रेलवे स्टेशन के बाहर तड़पते हुए देखा तो उन्होंने भारतीय मानवाधिकार के मनीष सिंह को फोन कर बताया । जज की सूचना पर मनीष सिंह वहां पहुंचे। वृद्घ को जिला चिकित्सालय पहुंचाने के लिए मंगलवार की सुबह सात बजे एंबुलेस को फोन किया लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद वह निजी साधन से वृद्घ को जिला चिकित्सालय ले आए जहां देखते ही चिकित्सकों ने उसको मृत घोषित कर दिया। इससे नाराज मानवाधिकार एवं मिर्जापुर सेवा समिति के लोगों ने प्रशासन एवं एंबुलेंस कर्मियों की लापरवाही को लेकर जिला मुख्यालय में प्रदर्शन किया। मनीष सिंह ने कहा कि वृद्घ की हालत देखकर लग रहा था कि वह कई दिनों से भूखा प्यासा था। इसके चलते उसकी तबीयत खराब हो गई। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उसकी भूख और बीमारी से मौत हो गई। यह भी कहा कि एंबुलेंस सेवा गरीबों के लिए है लेकिन इस समय केवल अमीरों के लिए काम रही है। योगी सरकार में एंबुलेंस व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गई है। एंबुलेंस कर्मी मनमाने तरीके से कार्य कर रहे है। जिससे मरीज चिकित्सालय नहीं पहुंच पा रहे है और उनकी मौत हो जा रही है। लोगों ने एंबुलेंस सेवा के कार्य में सुधार लाने की मांग की। प्रिंस सिंह, मनीष त्रिपाठी, सुनील पांडेय, रामकृष्ण मालवीय, राजमणि दूबे आदि शामिल रहे।
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मिर्जापुर सेवा समिति के संयोजक दिलीप सिंह गहरवार ने बताया कि 65 वर्षीय एक अज्ञात वृद्ध काफी बीमार चल रहा था। जो रेलवे स्टेशन पर रहता था। जिसे वहां की पुलिस ने कुछ दिन पूर्व भगा दिया था। इसके चलते वह स्टेशन के बाहर पार्क के पास खुले आसमान के नीचे भूखे प्यासा रहता था। सोमवार को मिर्जापुर न्यायालय के दो न्यायिक अधिकारी दिल्ली जा रहे थे। जिन्होंने वृद्घ को रेलवे स्टेशन के बाहर तड़पते हुए देखा तो उन्होंने भारतीय मानवाधिकार के मनीष सिंह को फोन कर बताया । जज की सूचना पर मनीष सिंह वहां पहुंचे। वृद्घ को जिला चिकित्सालय पहुंचाने के लिए मंगलवार की सुबह सात बजे एंबुलेस को फोन किया लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद वह निजी साधन से वृद्घ को जिला चिकित्सालय ले आए जहां देखते ही चिकित्सकों ने उसको मृत घोषित कर दिया। इससे नाराज मानवाधिकार एवं मिर्जापुर सेवा समिति के लोगों ने प्रशासन एवं एंबुलेंस कर्मियों की लापरवाही को लेकर जिला मुख्यालय में प्रदर्शन किया। मनीष सिंह ने कहा कि वृद्घ की हालत देखकर लग रहा था कि वह कई दिनों से भूखा प्यासा था। इसके चलते उसकी तबीयत खराब हो गई। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उसकी भूख और बीमारी से मौत हो गई। यह भी कहा कि एंबुलेंस सेवा गरीबों के लिए है लेकिन इस समय केवल अमीरों के लिए काम रही है। योगी सरकार में एंबुलेंस व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गई है। एंबुलेंस कर्मी मनमाने तरीके से कार्य कर रहे है। जिससे मरीज चिकित्सालय नहीं पहुंच पा रहे है और उनकी मौत हो जा रही है। लोगों ने एंबुलेंस सेवा के कार्य में सुधार लाने की मांग की। प्रिंस सिंह, मनीष त्रिपाठी, सुनील पांडेय, रामकृष्ण मालवीय, राजमणि दूबे आदि शामिल रहे।
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