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कुंभ मेला अतिम शाही स्नान माघ की पूणिमा पर उमड़ा जन सैलाब
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विंध्याचल/मिर्जापुर। कुंभ मेला अतिम शाही स्नान माघ मास के पूर्णिमा के अवसर पर आस्थावानों की भीड़ विंध्याचल में उमड़ पड़ी। जिससे पूरा बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन भक्तों की भीड़ से पट गया। यात्रियों के भीड़ के चलते किसी भी ट्रेन या बस में बैठने तक की जगह नहीं मिली। यात्री ट्रेन और बसों में भारी भीड़ के बाजवूद धक्का खाते हुए खड़े होकर यात्रा करने के लिए मजबूर रहे।
प्रयागराज में स्नान के बाद बुधवार की सुबह से सायंकाल तक कुंभ मेला से भक्ताओं का विंध्याचल में आने का सिलसिला शुरू हो गया। शाम होते होते लाखों भक्त अपने निजी वाहन, बस और ट्रेन में सवार होकर पहुंच गए। इससे विंध्याचल के साथ साथ रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर भक्तों का जमावड़ा लग गया। कोलकाता, बिहार, दिल्ली समेत अन्य राज्यों एवं जनपदों से विंध्याचल आए दशनार्थियों ने मां के दरबार में मत्था टेककर आशीर्वाद लिया। घंटों लाइन में लगकर दर्शन पूजन करने के बाद भक्त अपने घर जाने के लिए बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पहुंचे। लेकिन पुरूषोत्तम एक्स्प्रेस, बह़्पुत्रा मेल, चंबल एक्सप्रेस, मूरी एक्सप्रेस, जोधपुर हावड़ा, आदि ट्रेनें तीन से छह घंटे की देरी से चलने के कारण यात्रियों को भारी सुविधा का सामना करना पड़ा। यात्री घंटों रेलवे स्टेशन पर बैठकर ट्रेन का इंतजार करते रहे। जैसे जैसे भक्तों की ओर जाने वाली गाड़ी आती गयी भक्तों ने गंतव्य की जाते रहे। सांयकाल ढलते ही फिर भी विंध्याचल रेलवे स्टेशन परिसर में भक्तों से चारो ओर पटा रहा।
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प्रयागराज में स्नान के बाद बुधवार की सुबह से सायंकाल तक कुंभ मेला से भक्ताओं का विंध्याचल में आने का सिलसिला शुरू हो गया। शाम होते होते लाखों भक्त अपने निजी वाहन, बस और ट्रेन में सवार होकर पहुंच गए। इससे विंध्याचल के साथ साथ रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर भक्तों का जमावड़ा लग गया। कोलकाता, बिहार, दिल्ली समेत अन्य राज्यों एवं जनपदों से विंध्याचल आए दशनार्थियों ने मां के दरबार में मत्था टेककर आशीर्वाद लिया। घंटों लाइन में लगकर दर्शन पूजन करने के बाद भक्त अपने घर जाने के लिए बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पहुंचे। लेकिन पुरूषोत्तम एक्स्प्रेस, बह़्पुत्रा मेल, चंबल एक्सप्रेस, मूरी एक्सप्रेस, जोधपुर हावड़ा, आदि ट्रेनें तीन से छह घंटे की देरी से चलने के कारण यात्रियों को भारी सुविधा का सामना करना पड़ा। यात्री घंटों रेलवे स्टेशन पर बैठकर ट्रेन का इंतजार करते रहे। जैसे जैसे भक्तों की ओर जाने वाली गाड़ी आती गयी भक्तों ने गंतव्य की जाते रहे। सांयकाल ढलते ही फिर भी विंध्याचल रेलवे स्टेशन परिसर में भक्तों से चारो ओर पटा रहा।
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