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पदोन्नति निरस्त शिक्षकों में मचा हड़कंप
Updated Sat, 02 Sep 2017 12:11 AM IST
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मिर्जापुर। परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के 600 सहायक अध्यापकों की पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में वर्ष 2015 में हुई पदोन्नति को बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी ने निरस्त कर दिया, जिसके बाद से पदोन्नत शिक्षकों में हड़कंप मच गया है वहीं दूसरी तरफ न्यायालय में पदोन्नति मामला स्टे होने के बावजूद निरस्त होने से रोष भी है। बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया कि पदोन्नत शिक्षकों को मूल विद्यालयों में लौटने के लिए कार्यमुक्त करके सूचना दें।
बता दें कि परिषदीय विद्यालयों में वर्ष 2015 में पदोन्नति में अनियमितता को लेकर शिक्षिका कंचन वर्मा ने न्यायालय में गुहार लगाया था। जिसके बाद बीते 15 सितंबर 2015 को पदोन्नति आदेश को स्थगित भी कर दिया गया, परंतु अद्यतन अध्यापक अपने मूल तैनाती के विद्यालयों पर कार्य कर रहे हैं। इन शिक्षकों को वेतन मूल विद्यालयों से मिल रहा है। जिससे पठन पाठन और सूचनाओं को तैयार करने में परेशानी हो रही है। वहीं उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अनिल सिंह ने बीएसए को पत्रक देकर पदोन्नति को निरस्त करने पर नाराजगी जताया। उन्होंने कहा कि पदोन्नति न्यायालय में स्टे होने के बाद भी निरस्त कैसे कर दिया गया है। वहीं 600 शिक्षकों के कार्य करने के बावजूद स्कूलों में कैसे पठन पाठन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि बीएसए द्वारा न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए शोषण की मंशा से पदोन्नति को निरस्त किया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के पदोन्नति निरस्त आदेश को वापस नहीं किया गया तो शिक्षक संघ आंदोलन करने को बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन व विभाग की होगी।
बता दें कि परिषदीय विद्यालयों में वर्ष 2015 में पदोन्नति में अनियमितता को लेकर शिक्षिका कंचन वर्मा ने न्यायालय में गुहार लगाया था। जिसके बाद बीते 15 सितंबर 2015 को पदोन्नति आदेश को स्थगित भी कर दिया गया, परंतु अद्यतन अध्यापक अपने मूल तैनाती के विद्यालयों पर कार्य कर रहे हैं। इन शिक्षकों को वेतन मूल विद्यालयों से मिल रहा है। जिससे पठन पाठन और सूचनाओं को तैयार करने में परेशानी हो रही है। वहीं उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अनिल सिंह ने बीएसए को पत्रक देकर पदोन्नति को निरस्त करने पर नाराजगी जताया। उन्होंने कहा कि पदोन्नति न्यायालय में स्टे होने के बाद भी निरस्त कैसे कर दिया गया है। वहीं 600 शिक्षकों के कार्य करने के बावजूद स्कूलों में कैसे पठन पाठन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि बीएसए द्वारा न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए शोषण की मंशा से पदोन्नति को निरस्त किया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के पदोन्नति निरस्त आदेश को वापस नहीं किया गया तो शिक्षक संघ आंदोलन करने को बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन व विभाग की होगी।
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