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भारत-पाक युद्ध में दुश्मनों के दांत किए खट्टे
Updated Thu, 10 Aug 2017 11:55 PM IST
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लालगंज। देश की रक्षा के लिए जान की कुर्बानी देने वाले जिले के कुंवर शहीद केशरी सिंह के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता। उनके अंदर बचपन से ही देश भक्ति की भावना कूट-कूटकर भरी थी। पढ़ाई बाद वह सेना में भर्ती हो गए थे। 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान दुश्मनों के दांत खट्टे करते हुए शहीद हो गए। उन्होंने देश की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर कर दिया है।
जिले के हलिया ब्लॉक स्थित बिलरा पटेहरा गांव निवासी केशरी सिंह की बारहवीं तक की शिक्षा लालगंज के बापू उपरौध इंटर कॉलेज से पूरी हुई। अपने माता-पिता के लाडले बेटे केशरी सिंह जब सेना में थे उसी दौरान 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हो गया और उन्हें युद्ध में जाना पड़ा। युद्ध में दुश्मनों के दांत खट्टे करते हुए केशरी सिंह शहीद हो गए। दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले शहीद केशरी सिंह के बलिदान पर आज पूरे जनपद को नाज है। जिस दिन शहीद केशरी सिंह की अस्थि उनके गांव स्थित घर पर पहुंची, उसी रात को उनकी पत्नी ने पुत्र को जन्म दिया था।
1971 के भारत-पाकिस्तान के युद्ध में शहादत पाने वाले शहीद के परिवार में पत्नी छोटी कुंवर सिंह सहित उनके पुत्र रणजीत सिंह की दो पुत्रियां व पुत्र हैं। रतेह चौराहा पर शहीद केशरी सिंह की मूर्ति लगाई गई है, जो खंडित अवस्था में पड़ी हुई है, वहीं एक मूर्ति लालगंज के बापू उपरौध इंटर कॉलेज परिसर में लगाई गई है, जहां उनको राष्ट्रीय पर्वों पर नमन किया जाता है। केशरी सिंह के शहीद होने के बाद उनके पुत्र रणजीत सिंह की भी मौत हो चुकी है, लिहाजा शहीद परिवार के सदस्यों के जीविका का एकमात्र साधन शहीद की पत्नी को मिलने वाली पेंशन है, आज इनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है।
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अमित तिवारी
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जिले के हलिया ब्लॉक स्थित बिलरा पटेहरा गांव निवासी केशरी सिंह की बारहवीं तक की शिक्षा लालगंज के बापू उपरौध इंटर कॉलेज से पूरी हुई। अपने माता-पिता के लाडले बेटे केशरी सिंह जब सेना में थे उसी दौरान 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हो गया और उन्हें युद्ध में जाना पड़ा। युद्ध में दुश्मनों के दांत खट्टे करते हुए केशरी सिंह शहीद हो गए। दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले शहीद केशरी सिंह के बलिदान पर आज पूरे जनपद को नाज है। जिस दिन शहीद केशरी सिंह की अस्थि उनके गांव स्थित घर पर पहुंची, उसी रात को उनकी पत्नी ने पुत्र को जन्म दिया था।
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1971 के भारत-पाकिस्तान के युद्ध में शहादत पाने वाले शहीद के परिवार में पत्नी छोटी कुंवर सिंह सहित उनके पुत्र रणजीत सिंह की दो पुत्रियां व पुत्र हैं। रतेह चौराहा पर शहीद केशरी सिंह की मूर्ति लगाई गई है, जो खंडित अवस्था में पड़ी हुई है, वहीं एक मूर्ति लालगंज के बापू उपरौध इंटर कॉलेज परिसर में लगाई गई है, जहां उनको राष्ट्रीय पर्वों पर नमन किया जाता है। केशरी सिंह के शहीद होने के बाद उनके पुत्र रणजीत सिंह की भी मौत हो चुकी है, लिहाजा शहीद परिवार के सदस्यों के जीविका का एकमात्र साधन शहीद की पत्नी को मिलने वाली पेंशन है, आज इनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है।
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