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दलितों पर अत्याचार रोकने को मुखर हुए कांग्रेसी
Updated Tue, 10 Apr 2018 12:21 AM IST
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कलेक्ट्रेट परिसर में धरना देते कांग्रेसजन
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मिर्जापुर। शीर्ष नेतृत्व के आह्वान पर सांप्रदायिक सौहार्द और दलितों पर अत्याचार बंद करने को लेकर जिला और शहर कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में धरना देकर उपवास किया। धरना की शुरुआत रामधुन से हुई। धरना सभा में मड़िहान के पूर्व विधायक ललितेशपति त्रिपाठी ने कहा कि भाजपा सरकार दलितों, अल्पसंख्यकों और पिछड़ों को आपस में बांटने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि दलित संगठनों ने एससीएसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में दो अप्रैल को भारत बंद किया था। उस दौरान सरकार ने हिंसा रोकने के लिए प्रयास नहीं किया। भारत बंद के दौरान हिंसा भाजपा सरकार की दलितों, अल्पसंख्यकों और पिछड़ों को आपस में बांटने की साजिश का परिणाम था। जिलाध्यक्ष गिरीश त्रिपाठी ने कहा कि सांप्रदायिक और जातिवादी दंगों, खेती की बदहाली, उच्च शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों पर हमले जैसे विषयों पर मोदी सरकार मौन है। पीसीसी सदस्य स्वरूप सिंह ने कहा कि कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए डीजल, पेट्रोल मूल्यों को जीएसटी के दायरे में नहीं लाया गया है। जिला उपाध्यक्ष भारतेंदु यादव ने साठ साल से अधिक उम्र के मजदूरों को पेंशन देने की मांग की। शहर महासचिव अर्चना चौबे ने कहा कि जनता आज बढ़ती महंगाई से परेशान है। सरकार महंगाई पर अंकुश नहीं लगा पा रही है। अशोक उपाध्याय, राजन पाठक, शहर अध्यक्ष अब्दुल वहीद, प्रवक्ता दयाशंकर पांडेय, कैलाशनाथ उपाध्य, शीतलेश्चर पाठक, राम सिंह, दीपचंद्र जैन, शिवप्रताप सिंह, शिबू पांडेय आदि ने भी संबोधित किया। पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी ने राष्ट्रपति को संबोधित पत्रक नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा। इसमें भाजपानीत प्रदेश सरकारों को बर्खास्त करने की मांग की गई थी। इस दौरान राम श्रृृंगार दूबे, भूपेंद्र शुक्ला, सतीश मिश्रा, सुधाकर, शशिभूषण दूबे, अखिलेश मिश्र, श्रीराम पांडेय, छोटे खान, जुबैदा खातुन, जगदीश्वर दूबे, मुन्ना लाल मौर्य, संजय पांडेय, जनार्दन पाठक, संजय यादव, नसरत खां, हाजी रोज मोहम्मद, संतोष मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि दलित संगठनों ने एससीएसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में दो अप्रैल को भारत बंद किया था। उस दौरान सरकार ने हिंसा रोकने के लिए प्रयास नहीं किया। भारत बंद के दौरान हिंसा भाजपा सरकार की दलितों, अल्पसंख्यकों और पिछड़ों को आपस में बांटने की साजिश का परिणाम था। जिलाध्यक्ष गिरीश त्रिपाठी ने कहा कि सांप्रदायिक और जातिवादी दंगों, खेती की बदहाली, उच्च शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों पर हमले जैसे विषयों पर मोदी सरकार मौन है। पीसीसी सदस्य स्वरूप सिंह ने कहा कि कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए डीजल, पेट्रोल मूल्यों को जीएसटी के दायरे में नहीं लाया गया है। जिला उपाध्यक्ष भारतेंदु यादव ने साठ साल से अधिक उम्र के मजदूरों को पेंशन देने की मांग की। शहर महासचिव अर्चना चौबे ने कहा कि जनता आज बढ़ती महंगाई से परेशान है। सरकार महंगाई पर अंकुश नहीं लगा पा रही है। अशोक उपाध्याय, राजन पाठक, शहर अध्यक्ष अब्दुल वहीद, प्रवक्ता दयाशंकर पांडेय, कैलाशनाथ उपाध्य, शीतलेश्चर पाठक, राम सिंह, दीपचंद्र जैन, शिवप्रताप सिंह, शिबू पांडेय आदि ने भी संबोधित किया। पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी ने राष्ट्रपति को संबोधित पत्रक नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा। इसमें भाजपानीत प्रदेश सरकारों को बर्खास्त करने की मांग की गई थी। इस दौरान राम श्रृृंगार दूबे, भूपेंद्र शुक्ला, सतीश मिश्रा, सुधाकर, शशिभूषण दूबे, अखिलेश मिश्र, श्रीराम पांडेय, छोटे खान, जुबैदा खातुन, जगदीश्वर दूबे, मुन्ना लाल मौर्य, संजय पांडेय, जनार्दन पाठक, संजय यादव, नसरत खां, हाजी रोज मोहम्मद, संतोष मौजूद रहे।
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