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Mirzapur News: 20 प्रतिशत युवाओं में कमर और जोड़ों के दर्द की समस्या, कामकाजी वर्ग अधिक प्रभावित
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बुजुर्गों की बीमारी समझकर न करें अनदेखी, युवाओं में भी हो रही जोड़ों के दर्द की शिकायत
लंबे समय तक बैठकर काम करना, व्यायाम की कमी और मोटापा प्रमुख कारक
संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। गठिया को पहले बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब युवाओं में भी घुटने, कमर और दूसरे जोड़ों में दर्द की शिकायतें सामने आ रही हैं। मंडलीय अस्पताल के हड्डी रोग विभाग, पेन क्लीनिक और फिजियोथेरेपी विभाग में इस तरह के मरीज पहुंच रहे हैं। इन विभागों में गठिया और जोड़ों के दर्द से पीड़ित मरीजों में 20 प्रतिशत युवा भी शामिल हैं। इनमें कामकाजी वर्ग के युवाओं की संख्या अधिक है, जो घंटों बैठकर काम करते हैं।
मेडिकल कॉलेज के सहायक आचार्य डॉ. प्रतीक पाठक ने बताया कि गठिया किसी एक बीमारी का नाम नहीं, बल्कि जोड़ों को प्रभावित करने वाली कई बीमारियों का समूह है। इनमें दर्द, सूजन, अकड़न और जोड़ों की गतिविधियों में कमी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गठिया के अलग-अलग प्रकारों के कारण और उपचार भी अलग होते हैं।
उन्होंने बताया कि ऑस्टियोआर्थराइटिस में जोड़ की कार्टिलेज और अन्य संरचनाओं में धीरे-धीरे बदलाव होते हैं। यह बीमारी ज्यादातर अधिक उम्र के लोगों में होती है। रूमेटॉइड आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली जोड़ों की परत पर हमला करती है। गाउट में यूरिक एसिड के क्रिस्टल जोड़ों में जमा होकर अचानक तेज सूजन पैदा कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त स्पॉन्डिलोआर्थराइटिस और बच्चों में होने वाला जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस भी गठिया के प्रकार हैं।
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डॉ. पाठक ने आगे बताया कि युवाओं में रूमेटॉइड आर्थराइटिस के पीछे आनुवंशिक कारण भी हो सकते हैं। इसके अलावा कॉरपोरेट क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को लंबे समय तक बैठने के कारण कमर और जोड़ों में दर्द की शिकायत हो सकती है। बाहर का भोजन अधिक खाने से यूरिक एसिड बढ़ने पर भी जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है। इनडोर कार्य अधिक होने और धूप नहीं मिलने से विटामिन डी की कमी हो सकती है, जिससे कम उम्र में हड्डियों में दर्द की समस्या सामने आ सकती है।
युवाओं में गठिया के प्रमुख जोखिम कारक
डॉ. प्रतीक पाठक ने बताया कि मोटापा और बढ़ता शारीरिक वजन भी जोड़ों की समस्याओं के जोखिम कारक हैं। अतिरिक्त वजन घुटनों और कूल्हों पर अधिक दबाव डालता है। इससे विशेष रूप से ऑस्टियोआर्थराइटिस का जोखिम और लक्षणों की गंभीरता बढ़ सकती है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, नियमित व्यायाम की कमी और मांसपेशियों की कमजोरी भी जोड़ों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। खेलकूद के दौरान लगी चोट और हादसे भी जोड़ों में दर्द का कारण बन सकते हैं।
लंबे समय तक एक जगह बैठने से बचें, रोज करें व्यायाम
डॉ. प्रतीक पाठक ने बताया कि युवाओं में कमर, घुटने और दूसरे जोड़ों के दर्द से बचाव के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि जरूरी है। लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करने वाले युवा हर 30 से 60 मिनट में उठकर कुछ देर चलें और हल्की स्ट्रेचिंग करें। बैठते समय कमर को सहारा दें और कंप्यूटर की स्क्रीन आंखों के स्तर पर रखें। रोजाना क्षमता के अनुसार पैदल चलना, साइकिल चलाना, तैराकी या हल्का व्यायाम करना फायदेमंद है। मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाले व्यायाम भी जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद करते हैं। वजन संतुलित रखें और भोजन में प्रोटीन, कैल्शियम तथा अन्य पोषक तत्वों से भरपूर चीजें शामिल करें। विटामिन डी की कमी का संदेह होने पर चिकित्सक की सलाह लें। यदि जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन या अकड़न बनी रहे, सुबह उठने पर जोड़ों में देर तक जकड़न महसूस हो या दर्द बार-बार हो, तो हड्डी रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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लंबे समय तक बैठकर काम करना, व्यायाम की कमी और मोटापा प्रमुख कारक
संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। गठिया को पहले बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब युवाओं में भी घुटने, कमर और दूसरे जोड़ों में दर्द की शिकायतें सामने आ रही हैं। मंडलीय अस्पताल के हड्डी रोग विभाग, पेन क्लीनिक और फिजियोथेरेपी विभाग में इस तरह के मरीज पहुंच रहे हैं। इन विभागों में गठिया और जोड़ों के दर्द से पीड़ित मरीजों में 20 प्रतिशत युवा भी शामिल हैं। इनमें कामकाजी वर्ग के युवाओं की संख्या अधिक है, जो घंटों बैठकर काम करते हैं।
मेडिकल कॉलेज के सहायक आचार्य डॉ. प्रतीक पाठक ने बताया कि गठिया किसी एक बीमारी का नाम नहीं, बल्कि जोड़ों को प्रभावित करने वाली कई बीमारियों का समूह है। इनमें दर्द, सूजन, अकड़न और जोड़ों की गतिविधियों में कमी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गठिया के अलग-अलग प्रकारों के कारण और उपचार भी अलग होते हैं।
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उन्होंने बताया कि ऑस्टियोआर्थराइटिस में जोड़ की कार्टिलेज और अन्य संरचनाओं में धीरे-धीरे बदलाव होते हैं। यह बीमारी ज्यादातर अधिक उम्र के लोगों में होती है। रूमेटॉइड आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली जोड़ों की परत पर हमला करती है। गाउट में यूरिक एसिड के क्रिस्टल जोड़ों में जमा होकर अचानक तेज सूजन पैदा कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त स्पॉन्डिलोआर्थराइटिस और बच्चों में होने वाला जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस भी गठिया के प्रकार हैं।
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डॉ. पाठक ने आगे बताया कि युवाओं में रूमेटॉइड आर्थराइटिस के पीछे आनुवंशिक कारण भी हो सकते हैं। इसके अलावा कॉरपोरेट क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को लंबे समय तक बैठने के कारण कमर और जोड़ों में दर्द की शिकायत हो सकती है। बाहर का भोजन अधिक खाने से यूरिक एसिड बढ़ने पर भी जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है। इनडोर कार्य अधिक होने और धूप नहीं मिलने से विटामिन डी की कमी हो सकती है, जिससे कम उम्र में हड्डियों में दर्द की समस्या सामने आ सकती है।
युवाओं में गठिया के प्रमुख जोखिम कारक
डॉ. प्रतीक पाठक ने बताया कि मोटापा और बढ़ता शारीरिक वजन भी जोड़ों की समस्याओं के जोखिम कारक हैं। अतिरिक्त वजन घुटनों और कूल्हों पर अधिक दबाव डालता है। इससे विशेष रूप से ऑस्टियोआर्थराइटिस का जोखिम और लक्षणों की गंभीरता बढ़ सकती है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, नियमित व्यायाम की कमी और मांसपेशियों की कमजोरी भी जोड़ों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। खेलकूद के दौरान लगी चोट और हादसे भी जोड़ों में दर्द का कारण बन सकते हैं।
लंबे समय तक एक जगह बैठने से बचें, रोज करें व्यायाम
डॉ. प्रतीक पाठक ने बताया कि युवाओं में कमर, घुटने और दूसरे जोड़ों के दर्द से बचाव के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि जरूरी है। लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करने वाले युवा हर 30 से 60 मिनट में उठकर कुछ देर चलें और हल्की स्ट्रेचिंग करें। बैठते समय कमर को सहारा दें और कंप्यूटर की स्क्रीन आंखों के स्तर पर रखें। रोजाना क्षमता के अनुसार पैदल चलना, साइकिल चलाना, तैराकी या हल्का व्यायाम करना फायदेमंद है। मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाले व्यायाम भी जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद करते हैं। वजन संतुलित रखें और भोजन में प्रोटीन, कैल्शियम तथा अन्य पोषक तत्वों से भरपूर चीजें शामिल करें। विटामिन डी की कमी का संदेह होने पर चिकित्सक की सलाह लें। यदि जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन या अकड़न बनी रहे, सुबह उठने पर जोड़ों में देर तक जकड़न महसूस हो या दर्द बार-बार हो, तो हड्डी रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।