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वर्ष भर अतिक्रमण की जकड़न से जकड़ी रही सड़कें
Updated Thu, 28 Dec 2017 12:37 AM IST
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मिर्जापुर। हर वर्ष की तरह 2017 में भी जिले की सड़कें अतिक्रमण की जकड़न में जकड़ी रहीं। जनपद की तीन नगर पालिकाओं व एक नगर पंचायत में निवास करने वाले लोग जाम के मकड़जाल में फंसे रहे। अतिक्रमण से मुक्ति दिलाने में नगर पालिकाएं व नगर पंचायतें पूरी तरह से असफल रहीं। वर्ष में अतिक्रमण के खिलाफ चलाया जाने वाला अभियान फेल रहा।
जिला प्रशासन व पालिका प्रशासन के लापरवाही से अतिक्रमण करने वाले भयमुक्त होकर पालिका की जमीनों पर दूकानें लगा रहे हैं। वहीं पटरियों पर अतिक्रमण कर राहगिरों के लिए मुश्किलें पैदा खड़ी कर रहे हैं। सदियों पूर्व जिले की जनसंख्या को देखते हुए बनाई गई सड़कों पर वर्तमान में दो पहिया व चार पहिया वाहनों का रेला लगा हुआ है। सड़क पर वाहन आने की स्थिति में सड़क से निकलना आसान नही रह गया है। नतीजतन जनपदवासी घंटों जाम के मकड़ जाल में फंसकर परेशान हो रहे हैं। नगर का अधिकांश प्रवेश मार्ग जाम की भेंट चढ़ा है, कुछ इलाकों में प्राय: जाम लगी रहती है। जिला व पुलिस प्रशासन जाम से निपटने के लिए केवल कागजों पर ही योजना बनाते रहे हैं। लेकिन वर्ष के अंत तक जिला प्रशासन जाम का अंत करने में असफल रहा। आपने पांच वर्षों के कार्यकाल में पालिका व पंचायत अध्यक्ष कुंभकरणीय निद्रा में सोते रहे। इसके विपरीत अतिक्रमणकारी सड़क की पटरियों पर अपना पैर पसारते रहे।
इनसेट
अतिक्रमण से सिकुड़ती गए शहर के चौराहे व गलियां
मिर्जापुर। जिला व पालिका प्रशासन पूरे साल सोता रहा, इसका लाभ उठा कर अतिक्रमण करने वाले सड़क व गलियों में कब्जा जमाते रहे। जाम में फंसने वाले नगरवासी आए दिन कराहते रहे। सड़कों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए कोई ठोस कदम नही उठाया गया, जिसके फलस्वरूप लोगों को जाम के मकड़जाल से निकलने के लिए घंटों जूझना पड़ रहा है।
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सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या बनी मुसीबत
मिर्जापुर। वर्षों पूर्व जनसंख्या के आधार पर बनी सड़कों पर आज लाखों वाहन चल रहे हैं। सड़कों की चौड़ीकरण न हो पाने व लगातार अतिक्रमण किए जाने से पूरे दिन राहगीरों को जाम से जूझना पड़ रहा है। संकरी सड़कों पर वाहनों का आवागमन अधिक होने से लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रति वर्ष एक हजार के लगभग सभी कंपनियों के चार पहिया वाहन, 20 हजार के लगभग दो पहिया वाहन एवं सैकड़ों ट्रैक्टर्स व ट्रक बिक रहे हैं, जिससे सिकुड़ती सड़कों पर चलना दूभर हो गया है।
अतिक्रमण से मुक्ति पर अधिकारी बनाते रहे योजनाएं
मिर्जापुर। अतिक्रमण से मुक्ति दिला पाने में जिला व पालिका प्रशासन पूरी तरह से फेल रहा। अधिकारी इसके लिए कार्यालयों में कागजञों पर योजनाएं बनाते रहे। बैठकें होती रहीं सड़कें सिकुड़ती रहीं, नगरवासी जाम से जूझते रहे। वर्ष भर में कई बार अतिक्रमण अभियान चलाया गया, लेकिन हर बार यह महज खानापूर्ति ही साबित हुआ।
जिला प्रशासन व पालिका प्रशासन के लापरवाही से अतिक्रमण करने वाले भयमुक्त होकर पालिका की जमीनों पर दूकानें लगा रहे हैं। वहीं पटरियों पर अतिक्रमण कर राहगिरों के लिए मुश्किलें पैदा खड़ी कर रहे हैं। सदियों पूर्व जिले की जनसंख्या को देखते हुए बनाई गई सड़कों पर वर्तमान में दो पहिया व चार पहिया वाहनों का रेला लगा हुआ है। सड़क पर वाहन आने की स्थिति में सड़क से निकलना आसान नही रह गया है। नतीजतन जनपदवासी घंटों जाम के मकड़ जाल में फंसकर परेशान हो रहे हैं। नगर का अधिकांश प्रवेश मार्ग जाम की भेंट चढ़ा है, कुछ इलाकों में प्राय: जाम लगी रहती है। जिला व पुलिस प्रशासन जाम से निपटने के लिए केवल कागजों पर ही योजना बनाते रहे हैं। लेकिन वर्ष के अंत तक जिला प्रशासन जाम का अंत करने में असफल रहा। आपने पांच वर्षों के कार्यकाल में पालिका व पंचायत अध्यक्ष कुंभकरणीय निद्रा में सोते रहे। इसके विपरीत अतिक्रमणकारी सड़क की पटरियों पर अपना पैर पसारते रहे।
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अतिक्रमण से सिकुड़ती गए शहर के चौराहे व गलियां
मिर्जापुर। जिला व पालिका प्रशासन पूरे साल सोता रहा, इसका लाभ उठा कर अतिक्रमण करने वाले सड़क व गलियों में कब्जा जमाते रहे। जाम में फंसने वाले नगरवासी आए दिन कराहते रहे। सड़कों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए कोई ठोस कदम नही उठाया गया, जिसके फलस्वरूप लोगों को जाम के मकड़जाल से निकलने के लिए घंटों जूझना पड़ रहा है।
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सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या बनी मुसीबत
मिर्जापुर। वर्षों पूर्व जनसंख्या के आधार पर बनी सड़कों पर आज लाखों वाहन चल रहे हैं। सड़कों की चौड़ीकरण न हो पाने व लगातार अतिक्रमण किए जाने से पूरे दिन राहगीरों को जाम से जूझना पड़ रहा है। संकरी सड़कों पर वाहनों का आवागमन अधिक होने से लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रति वर्ष एक हजार के लगभग सभी कंपनियों के चार पहिया वाहन, 20 हजार के लगभग दो पहिया वाहन एवं सैकड़ों ट्रैक्टर्स व ट्रक बिक रहे हैं, जिससे सिकुड़ती सड़कों पर चलना दूभर हो गया है।
अतिक्रमण से मुक्ति पर अधिकारी बनाते रहे योजनाएं
मिर्जापुर। अतिक्रमण से मुक्ति दिला पाने में जिला व पालिका प्रशासन पूरी तरह से फेल रहा। अधिकारी इसके लिए कार्यालयों में कागजञों पर योजनाएं बनाते रहे। बैठकें होती रहीं सड़कें सिकुड़ती रहीं, नगरवासी जाम से जूझते रहे। वर्ष भर में कई बार अतिक्रमण अभियान चलाया गया, लेकिन हर बार यह महज खानापूर्ति ही साबित हुआ।