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सिरसी डैम के पट्टे की जमीन पर बाहरियों का कब्जा

Sat, 24 Jun 2017 12:55 AM IST
Updated Sat, 24 Jun 2017 12:55 AM IST
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सिरसी डैम के पट्टे की जमीन पर बाहरियों का कब्जा
भूमिहीन लगा रहे पट्टा पाने को चक्कर
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वन विभाग की जमीन पर अवैध झोपड़ी लगा कर बन रहे पात्र
अमर उजाला ब्यूरो
मड़िहान। तहसील से भूमिहीन होने प्रमाणपत्र बनाकर भूस्वामी भी जमीन पट्टा करा ले रहे हैं। वहीं स्थानीय भूमिहीन पट्टा पाने के लिए तहसील का चक्कर लगाने को मजबूर हैं। क्षेत्र के सिरसी डैम की जमीन पर बाहरी लोगों का कब्जा हो रहा है। वन विभाग सरकारी जमीन पर मनबढ़ लोग झोपड़ी लगा कर पात्र बन जा रहे हैं।
महिड़ान तहसील क्षेत्र के सिरसी बांध की जमीन का पांच साला पट्टा भूमिहीनों को दिया जाता है। सरकार की योजना का लाभ आम जनता की बजाए संपन्न और जमींदार परिवार और बच्चों के नाम से भूमिहीन प्रमाणपत्र लेकर उठा रहे हैं। वे अपनी पहुंच के चलते वह सरलता से सिरसी डैम के डूब की जमीन पर पट्टा ले लेते हैं। सिंचाई विभाग के अधिकारी तहसील के प्रमाणपत्र की अपने स्तर से जांच कराने की तक की जरूरत नहीं समझते हैं। गरीब तहसील से भूमिहीन प्रमाणपत्र आसानी से ले ही नहीं पाते हैं और पट्टे से वंचित हैं। वहीं इनको बड़े लोगों से खेती करने के लिए वही जमीन महंगे दर पर लेना पड़ रहा है। सिरसी बांध के डूब क्षेत्र में पट्टे का बड़ा खेल जारी है। सन् 1952 में अधिग्रहण के से आज तक सिरसी बांध प्रखंड यही तय नहीं कर पाया कि असल लाभार्थी कितने साल से गांव में निवास करने वाले लोगों को माना जाय। इसी लचर नियम के चलते हर पांच साला पट्टे का लाभ ऐसे लोगों को दे दिया जाता है, जो दस पांच वर्ष पहले यहां आकर सरकारी या वन भूमि पर अवैध झोपड़ी या खपरैल डाल कर रहने लगते हैं। इससे वास्तविक लाभार्थी पट्टे से वंचित रह जाते हैं। अधिग्रहण के समय जिन किसानों से डूब क्षेत्र के नाम जमीन ली गई, उनकी संख्या सीमित है। भूमि अधिग्रहण संबंधी ताजा कानून के अनुसार सरकार यदि अधिग्रहीत जमीन का उपयोग नहीं कर रही तो वह अधिग्रहण से प्रभावित लोगों को जमीन पट्टा करे। विगत दो दशक से इन गांवों में फर्जी भूमिहीनों की भरमार हो गई है। उन्होंने कुटुंब रजिस्टर में नाम दर्ज करा लिया है और लाभ ले रहे हैं जबकि अधिग्रहण से प्रभावित लोग पट्टा नहीं ले पा रहे हैं।
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स हैं।
वर्जन
वर्ष 2015 में ही पट्टा स्वीकृत हो गया था। प्रति वर्ष पट्टाधारकों को जमीन नाप कर दी जाती है। इस वर्ष जमीन सीमांकन में विवाद हुआ था, पट्टेदारों की सूची विरोधियों को उपलब्ध करा दी गई है। अब आगे से भूमिहीनों के बारे में तस्दीक करके डूब की जमीन का पट्टा दिया जाएगा। -गुलाब चंद्र राम, एसडीएम मड़िहान
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